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बाराबंकी टोल प्लाज़ा पर शुल्क नियमों के उल्लंघन को लेकर विवाद

निजी वाहन से यात्रा कर रहे अधिवक्ता की बार-बार टोल-मुक्त मांग को नियमों का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई

लखनऊ, 16 जनवरी 2026:

गोटोना बारा टोल प्लाज़ा, बाराबंकी पर घटित घटनाक्रम के संबंध में यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि प्रस्तुत मामला किसी आकस्मिक या एकतरफा आचरण का परिणाम नहीं था, बल्कि यह जान बूझकर उत्पन्न किए गए विवाद की श्रृंखला का हिस्सा था।

यह तथ्य अभिलेख पर लाया जाता है कि दिनांक 30 दिसंबर 2025 को एक अधिवक्ता महोदय अपने निजी वाहन से टोल प्लाज़ा पर उपस्थित हुए और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के अंतर्गत देय टोल शुल्क का भुगतान करने से इनकार किया। जबकि उक्त नियमों के अंतर्गत अधिवक्ताओं को निजी वाहन से यात्रा करने पर किसी प्रकार की टोल-मुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है।

उक्त तिथि को संबंधित व्यक्ति द्वारा टोल-फ्री आवागमन की मांग करते हुए जानबूझकर विवाद की स्थिति उत्पन्न की गई, जिससे टोल प्लाज़ा की सामान्य संचालन व्यवस्था बाधित हुई। टोल कर्मियों द्वारा नियमों के अनुरूप एवं संयमित ढंग से स्थिति को संभालते हुए उन्हें आगे बढ़ने दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्सा न उत्पन्न हो।

इसके पश्चात, उसी अधिवक्ता द्वारा पुनः टोल प्लाज़ा पर आकर टोल-फ्री संचालन की मांग की गई, जो कि न केवल नियमों के प्रतिकूल थी, बल्कि यह टोल प्रबंधन पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास भी प्रतीत होता है। यह स्पष्ट है कि इस प्रकार की पुनरावृत्ति आकस्मिक नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित थी। यह भी उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के अंतर्गत टोल भुगतान से इनकार करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध तत्‌काल कोई दंडात्मक प्रवर्तन तंत्र उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण संपूर्ण अनुपालन की जिम्मेदारी टोल कर्मियों पर ही आ जाती है। यदि टोल कर्मी नियमों का पालन न कराएं, तो उनके विरुद्ध एवं एजेंसी के विरुद्ध अनुबंधीय दंड, ऑडिट आपत्तियाँ तथा प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना बनी रहती है।

टोल प्लाज़ा पर तैनात कर्मचारी नियमों के पालन हेतु कानूनी रूप से बाध्य होते हैं। ऐसे में विवाद के दौरान उनका हस्तक्षेप उनके कर्तव्य का हिस्सा है, न कि कोई व्यक्तिगत या दुर्भावनापूर्ण आचरण। यह भी संज्ञान में आया है कि घटना से संबंधित चयनित वीडियो क्लिप्स एवं चित्रों को सोशल मीडिया पर प्रसारित कर एकतरफा नैरेटिव तैयार किया गया, जबकि घटनाक्रम की संपूर्ण पृष्ठभूमि और 30 दिसंबर

को हुई पूर्व घटनाओं को जानबूझकर छुपाया गया। बिना निष्पक्ष जांच के इस प्रकार की सार्वजनिक धारणा बनाना अनुचित है।

कंपनी यह स्पष्ट करती है कि किसी भी परिस्थिति में शारीरिक टकराव या अनुचित भाषा का समर्थन नहीं किया जाता। इसके बावजूद, उच्चतम पेशेवर मानकों को बनाए रखने हेतु, कंपनी ने संबंधित कर्मचारी की सेवाएं समा‌ कर दी हैं, यद्यपि यह निर्णय नैतिक जिम्मेदारी के तहत लिया गया है, न कि किसी एकतरफा दोष-स्वीकार के रूप में।

यह भी चिंता का विषय है कि कुछ मामलों में कानूनी पेशेवर अथवा प्रभावशाली व्यक्ति ऐसी घटनाओं का उपयोग व्यक्तिगत, पेशेवर अथवा प्रचारात्मक लाभ के लिए करते हैं, जिससे टोल एजेंसियों एवं उनके कर्मचारियों की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचती है।

उपरोक्त परिस्थितियों को दृ‌ष्टिगत रखते हुए यह अनुशंसा की जाती है कि NHAI द्वारा एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा / मध्यस्थ तंत्र की स्थापना की जाए, जो ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के साक्ष्यों के आधार पर संतुलित निर्णय दे सके।

यह नोट जनहित, कानूनी स्पष्टता एवं निष्पक्षता के उद्देश्य से जारी किया जा रहा है, ताकि यह पुनः स्थापित किया जा सके कि कानून का पालन सभी नागरिकों के लिए समान रूप से अनिवार्य है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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