WWE के मैच पहले से तय होते हैं? जानिए Kayfabe, स्क्रिप्टेड स्टोरीलाइन और असली चोटों के बीच रेसलर्स की मेहनत का सच।
World Wrestling Entertainment (WWE) विश्व स्तर पर देखा जाने वाला सबसे विख्यात पेशेवर रेसलिंग शो है। किसी भी रेसलिंग कंपनी में काम कर रहे रेसलर के लिए WWE एक ड्रीम कंपनी मानी जाती है। 70 से भी अधिक सालों से चली आ रही इस कंपनी ने कई बड़े रेसलर दुनिया को दिए जैसे हल्क होगन, दि अंडरटेकर, स्टीव ऑस्टिन, दि रॉक, जॉन सीना, रैन्डी ऑर्टन, कोडी रोड्स, रोमन रेन्स इत्यादि।
क्या है WWE?
WWE एक अमरीकी कंपनी है, जिसकी संरचना स्पोर्ट्स और मनोरंजन के समावेश से होती है। इसकी लोकप्रियता एशियाई देशों में सबसे अधिक है, विशेषकर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में। इन देशों में WWE के बारे में लोगों की अलग-अलग राय है।

कुछ लोग इसमें दिखाई जाने वाली हर चीज को सच मान लेते हैं, जिस वजह से वे इसे पसंद करते हैं। दूसरे वो लोग जो इसे एक स्क्रिपटेड शो मानते हैं, यानी मैच में दिखाई जाने वाली हर घटना पहले से तय होती है, यहां तक कि यह भी कि कौन जीतेगा, कौन हारेगा। जिस वजह से कई लोगों को यह रेसलिंग फेक लगती है। एक तीसरी समझ भी है, जो सत्य के बेहद करीब जान पड़ती है।
WWE की शुरुआत और केफेब
दरअसल WWE की शुरुआत 1953 में हुई। इसकी संरचना ‘केफेब’ (Kayfabe) की अवधारणा पर आधारित है। Kayfabe, भ्रम को बनाए रखने की एक प्रथा है जिसका उपयोग कुश्ती की दुनिया में किया जाता है। इस भ्रम की मदद से दर्शकों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया जाता है कि उनके सामने दिखाई जाने वाली हर घटना सत्य है। रेसलर जिससे लड़ रहे हैं, उनसे उनका व्यक्तिगत द्वंद्व है। रेस्लर के नाम भी वास्तविक हैं। ठीक वैसे ही, जैसे हम किसी फिल्म को देखते हुए मानते हैं।

ये है WWE का सच
यह बात सच है कि WWE एक स्क्रिपटेड शो है। इसमें दिखाए जाने वाले एक-एक मूव पहले से तय होते हैं। मैच का नतीजा भी 99% मौकों पर तय होता है। कौन, कब और किससे लड़ेगा यह भी तय होता है। मैच में उपयोग होने वाले खतरनाक उपकरण, यहां तक कि कौन-सा मैच कितनी देर चलेगा, यह सब कुछ पहले से तय होता है ।
यहां तक कि उन रेसलरों के नाम भी 95% मौकों पर फेक ही होते हैं। लेकिन अधिकतर मामलों में रेसलर इस’ पहले से तय’ की धारणा को दर्शकों के मन में पनपने नहीं देते हैं। इसके पीछे का कारण है, इन रेसलर का पेशेवर रवैया।

जमीनी स्तर पर होता है रेसलरों का चुनाव
WWE जमीनी स्तर पर ही अपनी कंपनी के लिए बेहतर रेसलरों का चुनाव करना शुरु कर देते हैं जिससे भविष्य में वे कंपनी को अपनी सेवाएं दे सकें। इसके लिए WWE कई देशों में कैंप भी लगाती हैं, ताकि ऐसे रेसलरों को बड़े मंच के लिए तैयार किया जा सके। उन्हें चुन कर WWE सभी दांवपेच सिखाती है, ताकि उन्हें एक ट्रेंड रेसलर बनाया जा सके। रेसलिंग एक खतरनाक स्पोर्ट है, जिसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। रेसलर को खुद की सुरक्षा के साथ-साथ अपने विपक्षी की भी सुरक्षा का ध्यान रखना होता है।

Heel और Baby Face का Concept
दरअसल,WWE में अधिकतर फाईट दो रेसलर के बीच होती है। जिनमें से एक अच्छाई का प्रतीक या उसके रखवाले का किरदार निभाता है। रेसलिंग की दुनिया में ऐसे रेसलरों को ‘बेबी-फेस (Baby Face)’ कहते हैं। ये अपने मैच को पूरे नियमबद्ध तरीके से लड़ते हैं। ये अपने प्रतिद्वंद्वियों के सामने किसी भी प्रकार की कोई गलत रणनीति नहीं अपनाते हैं। इनके सामने कई सारी चुनौतियां आती हैं, जिन्हें वे स्वीकार करते हैं और उन पर विजय भी प्राप्त करते हैं।
बेबी फेस सूपर स्टार के सामने जो रेसलर चुनौती पेश करता है, वह हील (Heel) कहलाता है। यह बुराई का उपासक माना जाता है, जो अपने मैच को जीतने के लिए कई तरह की गलत रणनीति अपनाता है, ताकि फेस रेसलर के समक्ष कठिन चुनौतियां आ सकें।
WWE इन दोनों ही किरदारों को जानबूझकर आमने सामने रखती है, ताकि दोनों के बीच एक कहानी और उद्देश्य बनाया जा सके। दर्शक दोनों के बीच के द्वंद्व में इतने मग्न होते हैं कि उनके दिमाग से कुछ समय के लिए असली और नकली का फर्क खत्म हो जाता है।

सबसे खास बात यह है कि रेसलर के किरदार समय और कहानी की मांग के अनुसार बदलते रहते हैं। कोई भी रेसलर फेस से हील और हील से फेस में परिवर्तित हो सकता है। लेकिन यह सभी फैसले WWE की क्रिएटिव टीम करती है।
किरदार को वास्तविक रखना सबसे बड़ी चुनौती
सूपरस्टार को अपने रिंग के किरदार को वास्तविक दिखाने के लिए कई बार इसे आम लोगों के बीच भी अपनाना पड़ता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण रेसलर ‘The Undertaker’ के प्रसिद्ध किरदार ‘The Deadman’ के रुप में देखा जा सकता है।
Undertaker ने दशकों तक इस किरदार को रिंग पर जीवंत बनाए रखा। रिटायर होने के बाद उन्होंने कई साक्षात्कारों में यह बात कही कि इस किरदार के दौरान उन्होंने रिंग के बाहर भी कई शादियों, पार्टियों में, यहां तक कि एअरपोर्ट में भी दि डेडमैन के पोशाक को पहना, ताकि उनसे मिलने वाले सभी दर्शक और उनके प्रशंसक सच में उन्हें डेडमैन ही समझें और दर्शकों की भावना भी आहत न हो।

WWE में क्या है रियल?
अगर इस उद्योग की इतने सारे पहलू फेक हैं, तो फिर इसमें रियल क्या है? तो वह है इन रेसलरों के बीच मैच में होने वाले सीक्वेंस। मैच में दिखाए जाने वाले सभी मूव पहले से तय जरूर होते हैं, लेकिन मैच में होने वाली लड़ाई बिलकुल रियल होती है। मैच के दौरान लगने वाली चोटें असली होती हैं।

ये प्रोफेशनल रेसलर्स दर्शकों के मनोरंजन के लिए अपने शरीर को हर हफ्ते दांव पर लगाते हैं। रेसलिंग एक बेहद ही रिस्की स्पोर्ट है, जिसे कहानी, उद्देश्य और शारीरिक लड़ाई के समावेश से मसालेदार और मनोरंजक बनाया जाता है। अगर चीजें पहले से तय न हों, तो कोई भी बड़ी अनचाही दुर्घटना घट सकती है। और शायद रेसलरों द्वारा की जाने वाली मेहनत और इस उद्योग के प्रति उनका प्रेम ही दर्शकों को कुछ समय के लिए ही सही, पर इसके रियल और फेक के बीच के अंतर को मिटा देता है।
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