Tuesday, 04 August 2026
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Apple ने Telegram को App Store से हटाकर फिर किया बहाल, बाल शोषण सामग्री पर उठे सवाल

एप्पल और टेलीग्राम के बीच कंटेंट मॉडरेशन को लेकर नया विवाद सामने आया है। जानिए CSAM सामग्री मिलने के बाद Apple ने Telegram पर क्या कार्रवाई की और ऐप को फिर से क्यों बहाल किया गया

कैलिफोर्निया, अमेरिका: लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में शामिल टेलीग्राम को एक बड़ा झटका लगा है। खबरों के मुताबिक एप्पल ने टेलीग्राम को अपने App Store से अस्थायी तौर पर हटा दिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब Apple की समीक्षा में Telegram पर Child Sexual Abuse Material (CSAM) यानी बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री मिलने की बात सामने आई।

हालांकि, यह कार्रवाई लंबे समय तक नहीं चली। Telegram की ओर से आपत्तिजनक सामग्री हटाने और उससे जुड़े यूजर को प्रतिबंधित किए जाने के बाद Apple ने ऐप को फिर से App Store पर उपलब्ध करा दिया।

घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर यूजर द्वारा पोस्ट की जाने वाली अवैध और आपत्तिजनक सामग्री को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। खासकर Telegram जैसे प्लेटफॉर्म के मामले में यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़े-बड़े सार्वजनिक चैनल, ग्रुप, बॉट और यूजर-जनरेटेड कंटेंट बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

यह पूरा विवाद केवल Apple और Telegram के बीच ऐप स्टोर नियमों का मामला नहीं है। इसके केंद्र में ऑनलाइन बाल सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन, यूजर की निजता, एन्क्रिप्शन और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे कई बड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

कुछ समय के लिए App Store से गायब हुआ Telegram

अगस्त 2026 की शुरुआत में Telegram अचानक Apple के ऐप स्टोर से गायब हो गया, जिससे यूजर्स के बीच हलचल मच गई। कई क्षेत्रों में iPhone और iPad यूजर्स के लिए ऐप को खोजने या दोबारा डाउनलोड करने में परेशानी सामने आई। शुरुआती घंटों में इस कदम की वजह स्पष्ट नहीं थी, जिससे सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं।

हालांकि, बाद में Apple की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई। कंपनी ने बताया कि उसकी समीक्षा में Telegram पर ऐसा कंटेंट पाया गया, जो बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री के खिलाफ Apple की सख्त नीतियों का उल्लंघन करता था। इसके बाद Telegram ने संबंधित सामग्री को हटाया और उस यूजर पर कार्रवाई की, जिसने इसे पोस्ट किया था। इसके बाद ऐप को ऐप स्टोर पर फिर से बहाल कर दिया गया।

इस तरह Telegram को ऐप स्टोर से हटाना स्थायी प्रतिबंध नहीं था। यह एक अस्थायी कार्रवाई थी, जिसे Apple की कंटेंट सुरक्षा नीतियों के उल्लंघन के बाद लागू किया गया और सुधारात्मक कदम उठाए जाने के बाद वापस ले लिया गया।

एप्पल ने क्या कहा?

Apple की नीति यूजर-जनरेटेड कंटेंट वाले ऐप्स को लेकर काफी सख्त है। कंपनी के ऐप स्टोर रिव्यू गाइडलाइंस के मुताबिक, ऐसे प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री को फिल्टर करने की व्यवस्था, यूजर्स को रिपोर्ट करने की सुविधा और अभद्र व्यवहार करने वाले उपयोगकर्ताओं को ब्लॉक करने का विकल्प मौजूद है।

Apple के अनुसार, Telegram को अस्थायी रूप से इसलिए हटाया गया क्योंकि उसकी समीक्षा में ऐसा कंटेंट मिला, जो बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर कंपनी की सख्त पाबंदी का उल्लंघन करता था। Telegram द्वारा संबंधित कंटेंट हटाने और उसे पोस्ट करने वाले यूजर को बैन करने के बाद ऐप को वापस App Store पर उपलब्ध कराया गया।

यह कार्रवाई Apple की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी ऐप स्टोर पर उपलब्ध ऐप्स से यह अपेक्षा करती है कि वे अपने यूजर्स के लिए सुरक्षित वातावरण बनाए रखें। खास तौर पर उन ऐप्स पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है, जहां यूजर्स खुद कंटेंट बना और शेयर कर सकते हैं।

Telegram ने भी उठाए कदम

इस पूरे घटनाक्रम के बाद Telegram ने संबंधित सामग्री को हटाने और उससे जुड़े यूजर को प्लेटफॉर्म से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की। इसके बाद Apple ने ऐप को दोबारा App Store पर उपलब्ध करा दिया।

Telegram ने अपनी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर भी जोर दिया और दावा किया कि उसने 2026 में अब तक CSAM से जुड़े लगभग 3.38 लाख ग्रुप और चैनल ब्लॉक किए हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसने 2018 से इस तरह की सामग्री का पता लगाने के लिए डिटेक्शन सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपायों को मजबूत किया है।

हालांकि, इस घटना से यह सवाल जरूर उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में कंटेंट और यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म पर अवैध सामग्री की पहचान कितनी तेजी से होती है और क्या किसी आपत्तिजनक सामग्री के सामने आने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त है या प्लेटफॉर्म को उसे पहले ही रोकने के लिए ज्यादा प्रभावी सिस्टम तैयार करने चाहिए।

क्या कहती है Telegram की Content Policy?

Telegram की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसका बड़ा ग्रुप और चैनल इकोसिस्टम है। प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक चैनल और ग्रुप बड़ी संख्या में यूजर्स तक पहुंच सकते हैं। इसी वजह से कंटेंट मॉडरेशन भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

वह अपने नियमों में अवैध गतिविधियों, हिंसा को बढ़ावा देने, बाल शोषण से जुड़ी सामग्री और अन्य गंभीर अपराधों से संबंधित कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की बात करता है। कंपनी के अनुसार, यूजर्स को ऐसे कंटेंट की रिपोर्ट करने की सुविधा भी दी जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट या अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

लेकिन Telegram का मॉडल अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कुछ मायनों में अलग है। इसके बड़े सार्वजनिक चैनल, सुपरग्रुप और बॉट इकोसिस्टम ने इसे एक शक्तिशाली संचार माध्यम बनाया है। यही सुविधाएं कभी-कभी गलत इस्तेमाल का रास्ता भी खोल देती हैं।

लगातार बढ़ते बॉट्स बने टेलीग्राम के लिए चुनौती

टेलीग्राम पर बॉट्स प्लेटफॉर्म की सबसे उपयोगी सुविधाओं में से एक हैं। ये ऑटोमेटेड प्रोग्राम होते हैं, जो यूजर्स को अलग-अलग काम करने में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर कस्टमर सपोर्ट, सूचना उपलब्ध कराने, फाइल मैनेजमेंट और ऑटोमेशन जैसे कामों में बॉट उपयोगी साबित होते हैं।

लेकिन यही तकनीक गलत हाथों में जाने पर समस्या भी बन सकती है। कुछ मामलों में बॉट का इस्तेमाल स्पैम फैलाने, फर्जी लिंक भेजने, धोखाधड़ी, पायरेसी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

हालिया शोध ने टेलीग्राम के पायरेसी इकोसिस्टम में बॉट्स की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है। 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन ने 1,057 पायरेसी चैनलों और करीब 2.09 लाख पोस्ट का विश्लेषण किया। शोध के अनुसार, कुछ बॉट कंटेंट की होस्टिंग, एक्सेस कंट्रोल, मोनेटाइजेशन और चैनल डिस्कवरी जैसे कामों में इस्तेमाल किए जा रहे थे।

इससे यह स्पष्ट होता है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद हर बॉट अपने आप में खतरनाक नहीं है, लेकिन ऑटोमेशन की शक्ति का दुरुपयोग होने पर कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती कई गुना बढ़ सकती है।

आपत्तिजनक सामग्री पर भी बढ़ी चिंता

Telegram को लेकर एक और बड़ी चिंता आपत्तिजनक सामग्री की है। बड़े सार्वजनिक ग्रुप और चैनल कभी-कभी उत्पीड़न (Harassment) और घृणास्पद भाषण (Hate Speech), धमकी, धोखाधड़ी और अन्य आपत्तिजनक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

Apple की ऐप स्टोर नीति में भी यूजर-जनरेटेड कंटेंट वाले प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट सुरक्षा अपेक्षाएं हैं। कंपनी ऐसे ऐप्स से कंटेंट फिल्टर करने, रिपोर्टिंग सिस्टम देने और abusive users को ब्लॉक करने की व्यवस्था की मांग करती है।

यहां समस्या यह है कि किसी भी बड़े प्लेटफॉर्म पर हर पोस्ट को मैन्युअली जांचना संभव नहीं है। इसलिए कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेटेड डिटेक्शन और यूजर रिपोर्टिंग जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ता है।

लेकिन AI आधारित सिस्टम भी हर मामले में पूरी तरह सटीक नहीं होते। कभी-कभी वे संदर्भ को समझने में असफल हो सकते हैं और वैध कंटेंट को भी हटा सकते हैं। दूसरी तरफ, कुछ हानिकारक सामग्री सिस्टम से बचकर यूजर्स तक पहुंच सकती है।

Apple और Telegram के बीच पुराना विवाद

Telegram और Apple के बीच कंटेंट मॉडरेशन को लेकर विवाद नया नहीं है। 2018 में भी एक ऐसी स्थिति सामने आई थी, जिसके बाद Telegram ने अपने सुरक्षा उपायों को मजबूत किया था। मौजूदा घटना ने उस पुराने विवाद की याद भी ताजा कर दी है।

हालांकि, इस बार ऐप को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय Apple ने उसे अस्थायी रूप से हटाया और Telegram द्वारा संबंधित कंटेंट हटाने तथा यूजर को बैन करने के बाद बहाल कर दिया।

इससे यह संकेत मिलता है कि Apple की कार्रवाई का उद्देश्य Telegram को स्थायी रूप से हटाना नहीं था, बल्कि ऐप स्टोर के सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना था।

टेलीग्राम पर बढ़ता वैश्विक नियामकीय दबाव

Telegram के सामने केवल Apple जैसी टेक कंपनियों की नीतियों की चुनौती नहीं है। दुनिया के अलग-अलग देशों में भी प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और यूजर सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ब्रिटेन की ऑनलाइन सुरक्षा नियामक संस्था Ofcom ने अप्रैल 2026 में Telegram Messenger Inc. के खिलाफ जांच शुरू की। जांच का केंद्र यह था कि क्या प्लेटफॉर्म ने बच्चों के यौन शोषण से संबंधित अवैध सामग्री को लेकर Online Safety Act 2023 के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन किया है।

इस तरह की जांच दिखाती हैं कि दुनिया भर की सरकारें अब बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता की रक्षा की उम्मीद नहीं कर रही हैं, बल्कि उनसे यूजर सुरक्षा और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए भी अधिक सक्रिय भूमिका की मांग कर रही हैं।

एक अरब से अधिक यूजर्स वाला प्लेटफॉर्म

Telegram का आकार इस पूरे विवाद को और महत्वपूर्ण बनाता है। प्लेटफॉर्म के एक अरब से ज्यादा मासिक यूजर्स हैं। इतनी बड़ी संख्या में यूजर्स के साथ कंटेंट मॉडरेशन की जिम्मेदारी भी बहुत बड़ी हो जाती है।

एक तरफ प्लेटफॉर्म को यूजर्स की निजता और स्वतंत्र संचार का अधिकार बनाए रखना होता है, वहीं दूसरी तरफ उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि उसकी सेवाओं का इस्तेमाल बच्चों के शोषण, हिंसा, धोखाधड़ी या अन्य गंभीर अपराधों के लिए न हो। यही संतुलन आज दुनिया के लगभग हर बड़े सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।

क्या टेलीग्राम को लेकर आगे और सख्ती होगी?

Apple द्वारा Telegram को कुछ समय के लिए ऐप स्टोर से हटाना भले ही अस्थायी घटना रही हो, लेकिन इसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है। इससे यह संदेश जरूर गया है कि बड़े प्लेटफॉर्म भी ऐप स्टोर की सुरक्षा नीतियों से ऊपर नहीं हैं।

आने वाले समय में टेलीग्राम को अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करना पड़ सकता है। खासकर बॉट्स, सार्वजनिक चैनलों और बड़े ग्रुप्स की निगरानी एक अहम मुद्दा बनी रहेगी।

साथ ही, सरकारों और नियामकों की ओर से भी प्लेटफॉर्म से अधिक पारदर्शिता की मांग बढ़ सकती है। कंपनियों को यह बताना पड़ सकता है कि वे अवैध कंटेंट की पहचान कैसे करती हैं, कितने अकाउंट ब्लॉक करती हैं और यूजर रिपोर्ट पर कितनी तेजी से कार्रवाई करती हैं।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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