Saturday, 03 October 2026
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राष्ट्रीय एसएंडटी सर्वेक्षण 2024-25 : डीएसटी–फिक्की कार्यशाला में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मिली प्राथमिकता

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सर्वेक्षण 2024-25 में निजी क्षेत्र की भूमिका, डेटा पारदर्शिता और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर डीएसटी–फिक्की कार्यशाला।

नई दिल्ली: भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और फिक्की ने राष्ट्रीय एसएंडटी सर्वेक्षण 2024-25 के लिए आयोजित कार्यशाला में निजी क्षेत्र की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए सटीक और भरोसेमंद डेटा साझा करने पर बल दिया।

कार्यशाला में, सरकारी विभागों, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के हितधारकों ने इस बात पर बल दिया कि उच्च गुणवत्ता और व्यापक डेटा साक्ष्य-आधारित एसएंडटी नीति निर्माण का आधार है। डीएसटी के राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन सूचना प्रणाली (एनएसटीएमआईएस) के सलाहकार और प्रमुख, डॉ. अरविंद कुमार ने औद्योगिक संगठनों से सक्रिय रूप से डेटा साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मजबूत प्रतिक्रिया दर और डेटा की सत्यनिष्ठा सर्वेक्षण की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. कुमार ने बताया, “विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कॉर्पोरेट क्षेत्र सकल अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) व्यय का 70-75% योगदान देता है, जबकि भारत में यह आंकड़ा लगभग 36.5% है।” उन्होंने उल्लेख किया कि भारत का वर्तमान आरएंडडी निवेश जीडीपी का लगभग 0.64% है, हालांकि आरएंडडी व्यय और जीडीपी में निरंतर वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए, भारत का सकल अनुसंधान और विकास व्यय (जीईआरडी) वित्त वर्ष 2010-11 में ₹60,196.8 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2020-21 में ₹127,381 करोड़ हो गया है।

डॉ. कुमार ने निजी क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली प्रमुख सरकारी पहलों पर भी प्रकाश डाला। इनमें ₹1 लाख करोड़ का प्रस्तावित अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड शामिल है, जो ऊर्जा परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव-विनिर्माण, चिकित्सा उपकरण और डिजिटल कृषि जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में वाणिज्यिक आरएंडडी और नवाचार में लगे कॉर्पोरेट्स और स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक रियायती वित्तपोषण प्रदान करेगा। यह फंड प्रारंभिक चरण के निवेश को जोखिममुक्त करने और निजी फर्मों को धैर्यपूर्ण पूंजी प्रदान करके उद्योग द्वारा आरएंडडी में निवेश को बढ़ावा देगा, जिससे सकल घरेलू अनुसंधान और विकास व्यय (जीईआरडी) में कॉर्पोरेट योगदान बढ़ेगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डीएसआईआर (औद्योगिक अनुसंधान और विकास संवर्धन कार्यक्रम) के प्रमुख, श्री विनय कुमार ने औद्योगिक आरएंडडी को बढ़ावा देने के लिए सरकार के सतत प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि भारत में 3 लाख से अधिक पंजीकृत इकाईयां हैं, लेकिन सीएमआईई डेटाबेस में वर्तमान में केवल 40,000 इकाईयां शामिल हैं, जिनमें लगभग 19,000 सार्वजनिक और 21,000 निजी उद्यम हैं। उन्होंने उद्योग हितधारकों से डेटा प्रस्तुति को राष्ट्रीय जिम्मेदारी मानने का आग्रह किया।

यूनेस्को सांख्यिकी संस्थान (नई दिल्ली) के क्षेत्रीय सांख्यिकीय सलाहकार, शैलेंद्र सिग्देल ने विकासशील देशों में डेटा संग्रह की संरचनात्मक चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने डेटा प्रदाताओं के लिए ठोस प्रोत्साहन और फ्रास्काटी मैनुअल जैसे अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि खराब इनपुट डेटा गुणवत्ता कमजोर परिणाम देती है।

पूर्व एनएसटीएमआईएस प्रमुख, डॉ. प्रवीण अरोड़ा ने भारत में कम आरएंडडी निवेश और निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी की दोहरी चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने फर्मों से डेटा साझा करने में प्रतिस्पर्धी जोखिम की चिंताओं को दूर करने और भागीदारी को आसान बनाने के लिए सर्वेक्षण उपकरणों को सरल करने की अपील की।

उद्योग की ओर से, श्री संकल्प सिन्हा (महाप्रबंधक, आईबीएम इंडिया) ने कहा कि कम प्रति व्यक्ति जीडीपी के बावजूद, भारत वैश्विक आरएंडडी उत्पादन के मानदंडों के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने आरएंडडी रिपोर्टिंग से संबंधित परिभाषाओं और जनादेश में अस्पष्टता को रेखांकित किया और पारदर्शी मूल्यांकन ढांचे तथा सर्वेक्षण परिणामों के व्यापक प्रसार के लिए आग्रह किया ताकि भागीदारी में विश्वास बढ़े।

श्री एस. वेंकटकृष्णन, सीटीओ और आरएंडडी प्रमुख (फोरस हेल्थ), ने भारत से चुनिंदा उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय डेटा न केवल नीति निर्माण के लिए बल्कि औद्योगिक विकास को निर्देशित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रोत्साहन को डेटा साझा करने को सहयोगात्मक कर्तव्य के रूप में डिज़ाइन किया जाए, न कि बोझ के रूप में।

श्री अयेकांश त्यागी (मैनकाइंड फार्मा) ने एक संरचित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें फर्मों को डेटा साझा करने के कारण, प्रेरणा और प्रक्रिया को लागू करने के सर्वोत्तम तरीके शामिल थे। उन्होंने चीन द्वारा राजकोषीय प्रोत्साहन, भूमि अनुदान और आपूर्ति श्रृंखला लाभ का उपयोग करके प्रमुख क्षेत्रों में प्रभुत्व स्थापित करने का उदाहरण दिया और चेतावनी दी कि भारत को अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने डेटा प्रस्तुति को अनुदान पात्रता से जोड़ने, डेटा संकलन में सहायता के लिए छात्र इंटर्न का उपयोग करने और प्रगति की निगरानी के लिए नियमित समीक्षा शुरू करने जैसे उपायों का प्रस्ताव रखा।

कार्यशाला का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि राष्ट्रीय एसएंडटी सर्वेक्षण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना और डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करना, साक्ष्य-आधारित नीतियों को आकार देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और भारत की दीर्घकालिक विकास आकांक्षाओं को साकार करने के लिए केंद्रीय है।

सर्वेक्षण के बारे में
राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रबंधन सूचना प्रणाली (एनएसटीएमआईएस), भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), देश में एसएंडटी गतिविधियों (मुख्य रूप से आरएंडडी) के लिए समर्पित संसाधनों पर डेटा एकत्र करने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण आयोजित करता है। सर्वेक्षण डेटा के आधार पर, कई एसएंडटी रिपोर्ट प्रकाशित की जाती हैं, जो राष्ट्रीय आरएंडडी संकेतकों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं और एसएंडटी मूल्यांकन तथा नीति निर्माण के लिए साक्ष्य-आधार के रूप में कार्य करती हैं।

राष्ट्रीय एसएंडटी सर्वेक्षण 2024-25 का उद्देश्य देश भर में फैले लगभग 8,000 आरएंडडी संगठनों, जैसे सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, उच्च शिक्षा, एसआईआरओ और गैर-सरकारी संगठनों से जानकारी एकत्र करके वर्तमान आरएंडडी परिदृश्य को कैप्चर करना है। अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण के आधार पर एक संरचित प्रश्नावली तैयार की गई है, जिसमें सामान्य जानकारी, एसएंडटी (आरएंडडी) गतिविधियों पर व्यय और आरएंडडी मानव संसाधन जैसे पहलुओं पर जानकारी मांगी गई है।

डिजिटल युग में, यह सर्वेक्षण एक वेब-आधारित मंच पर आयोजित किया जा रहा है ताकि समय अंतर को कम किया जा सके और इस विशाल कार्य को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके। जानकारी की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए, प्रत्येक उत्तरदाता संगठन को एक अद्वितीय उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड प्रदान किया गया है।

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Mansi Sharma

लेखक

Mansi Sharma is a journalist covering Global Affairs, and wellness, known for turning complex ideas into sharp, engaging narratives. Her work is driven by curiosity, depth, and a constant urge to question and explore. When she’s not writing, you’ll often find her diving into new ideas—preferably with a cup of coffee in hand, one sip at a time.

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