अल्मोड़ा की बेटी कविता चंद ने जीती डेनाली की चुनौती, उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ीं

अल्मोड़ा की बेटी कविता चंद ने जीती डेनाली की चुनौती, उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ीं

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मीं पर्वतारोही, मैराथन धाविका ने कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण अभियान को पार करते हुए अपने 7 समिट्स मिशन में एक और उपलब्धि जोड़ी

उत्तराखंड/ नई दिल्ली: भारतीय एंड्योरेंस एथलीट और पर्वतारोही कविता चंद ने डेनाली शिखर पर सफलतापूर्वक पहुंचकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची 6,190 मीटर ऊंची इस चोटी को फतह करने के बाद उन्होंने दुनिया के सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर चढ़ाई करने के अपने “7 समिट्स मिशन” में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मीं और पली-बढ़ीं कविता वर्तमान में मुंबई में रहती हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर लंबी दूरी की दौड़ और पर्वतारोहण को पूर्णकालिक रूप से अपनाया। 10 वर्षीय बच्चे की मां कविता ने पिछले कुछ वर्षों में एक समर्पित एंड्योरेंस एथलीट और उच्च हिमालयी पर्वतारोही के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

अमेरिका के अलास्का में स्थित डेनाली को 7 समिट्स अभियान की सबसे कठिन चोटियों में से एक माना जाता है। इसकी वजह यहां का अत्यंत प्रतिकूल मौसम, अधिक ऊंचाई और स्व-निर्भर (सेल्फ-सपोर्टेड) पर्वतारोहण प्रारूप है। अन्य बड़े अभियानों के विपरीत, डेनाली पर पर्वतारोहियों को अपना पूरा सामान, भोजन, ईंधन और अन्य जरूरी सामग्री स्वयं ढोनी पड़ती है।

इस अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को आमतौर पर 80 से 125 पाउंड तक का सामान अपने साथ ले जाना होता है। इसमें एक हिस्सा पीठ पर लदे बैग में और दूसरा स्लेज पर रखा जाता है। पहाड़ के निचले हिस्सों में पर्वतारोही भारी बैग के साथ ग्लेशियरों पर स्लेज खींचते हुए आगे बढ़ते हैं। ऊंचाई बढ़ने के साथ रास्ता अधिक खड़ा और कठिन हो जाता है, जहां स्लेज का इस्तेमाल संभव नहीं होता और पूरा सामान पीठ पर उठाकर ले जाना पड़ता है।

कविता का अभियान 19 मई को अलास्का के एंकरेज शहर में टीम मीटिंग और उपकरणों की जांच के साथ शुरू हुआ। 20 मई को टीम तालकीटना पहुंची, जहां से पर्वतारोहियों को विमान के जरिए ग्लेशियर तक ले जाया जाता है, जो अभियान का शुरुआती बिंदु होता है। खराब मौसम के कारण उड़ानों में दो दिन की देरी हुई और टीम 22 मई की शाम को डेनाली बेस कैंप पहुंच सकी।

इस चढ़ाई में डेनाली की प्रसिद्ध “डबल कैरी” रणनीति अपनाई गई। इसके तहत पर्वतारोही अपने सामान का एक हिस्सा ऊंचाई पर ले जाकर बर्फ में सुरक्षित रखते हैं, फिर नीचे लौटकर बाकी सामान ऊपर पहुंचाते हैं। इस प्रक्रिया में पर्वतारोहियों को भारी वजन के साथ कई हिस्सों का रास्ता दो बार तय करना पड़ता है, जिससे अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

23 मई को कैंप-1 स्थापित करने के बाद टीम ने खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के बीच धीरे-धीरे ऊंचाई हासिल करते हुए आगे बढ़ना जारी रखा। 25 मई को कैंप-2, 30 मई को कैंप-3 और 3 जून को कैंप-4 पहुंचने के बाद टीम ने 5 जून को शिखर के लिए अंतिम चढ़ाई शुरू की।

डेनाली पर सफलता कविता चंद के 7 समिट्स अभियान की चौथी बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले उन्होंने अगस्त 2025 में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस, दिसंबर 2025 में अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विन्सन मैसिफ और जनवरी 2026 में दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकोंकागुआ पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

पर्वतारोहण के अलावा कविता एक सफल एंड्योरेंस एथलीट भी हैं। वह बोस्टन मैराथन के लिए क्वालिफाई कर चुकी हैं और दुनिया की चार प्रमुख मैराथन—बर्लिन (2024), लंदन (2025), न्यूयॉर्क (2025) और बोस्टन (2026)—पूरी कर चुकी हैं। वर्ष 2025 की न्यूयॉर्क सिटी मैराथन में वह सबसे तेज भारतीय महिला प्रतिभागी रहीं थी।

फिटनेस रेसिंग प्रतियोगिता HYROX में भी कविता ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने वर्ष 2025 में आयोजित दिल्ली और मुंबई दोनों HYROX प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की थी।

अपनी यात्रा पर बात करते हुए कविता ने कहा कि मातृत्व, एंड्योरेंस खेलों और ऊंचे पर्वतों पर चढ़ाई के बीच संतुलन बनाना अनुशासन, धैर्य और निरंतर प्रयास की मांग करता है। उनका मानना है कि लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी व्यक्ति बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना करते हुए अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है।

यूरोप, अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका और अब उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई के बाद कविता चंद 7 समिट्स चुनौती को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। साथ ही वह विशेष रूप से महिलाओं सहित अधिक भारतीयों को एंड्योरेंस खेलों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *