Friday, 07 August 2026
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कोहली और राहित के बाद अब पोलार्ड ने भी की इम्पैक्ट प्लेयर रूल की आलोचना। क्या है पूरी वजह…?

आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर रूल पर बढ़ता विवाद—कायरन पोलार्ड, विराट कोहली और रोहित शर्मा समेत कई दिग्गजों ने उठाए सवाल। जानिए इस नियम के पीछे की पूरी वजह, इससे जुड़े विवाद, और क्यों खिलाड़ी इसे क्रिकेट के संतुलन के लिए खतरा मान रहे हैं।

आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर रूल की आलोचनाओं को लेकर अब आवाजें बुलंद होती जा रही हैं। इस नियम का विरोध समय-समय पर कई दिग्गज खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ करते रहे हैं। इसमें विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी भी मौजूद हैं। इस फेहरिस्त में अब मुंबई इंडियंस के बेटिंग कोच कीरेन पोलार्ड का नाम भी शामिल हो चुका है। उन्होंने सीधे शब्दों में इस नियम की आलोचना की है।

उन्होंने कहा,  “अगर आप मुझसे व्यक्तिगत तौर पर पूछें तो मैं इस रूल का फैन नहीं हूं। लेकिन इससे छुटकारा पाना मेरे बस की बात नहीं है। यकीनन इस नियम के कारण आईपीएल में रनों का अंबार देखने को मिलता है। लेकिन क्या सिर्फ चौकों और छक्कों के दम पर क्रिकेट को दिलचस्प रखा जा सकता है? बिलकुल नहीं। यह नियम सिर्फ स्पोंसरशिप के लिए अच्छा है, इसके विपरीत देखें तो ये क्रिकेट की पारंपरिकता को खत्म कर रहा है। यह नियम खेल को जटिल और उलझा हुआ बनाता है।”

इससे पहले विराट कोहली भी इम्पैक्ट पलेयर रूल को खेल का संतूलन बिगाड़ने वाला नियम कह चुके हैं। साथ ही उन्होंने बीसीसीआई से इस नियम की समीक्षा करने की भी मांग की है। कोहली की ही तरह रोहित शर्मा भी इस नियम के विरोध में बयान देते नजर आए हैं। रोहित ने कहा था कि, “मैं इस नियम का मुरीद नहीं हूं। इससे ऑलराउंडरों पर विपरीत असर पड़ेगा। क्रिकेट 11 खिलाड़ियों का खेल है, इसे 11 का ही रहना चाहिए।”

क्या है इम्पैक्ट प्लेयर रूल

इम्पैक्ट प्लेयर नियम को 2023 के आईपीएल में भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई ने लागू किया था। इस नियम के अनुसार दोनों ही टीम के कप्तान, टॉस के समय अपने 11 खिलाड़ियों के अलावा 5 खिलाड़ियों के नाम वैकल्पिक तौर पर दे सकते हैं। कप्तान उनमें से किसी भी एक खिलाड़ी को पहले से खेल रहे खिलाड़ी की जगह मैदान पर उतार सकते हैं। इस नियम से टीम को अतिरिक्त बल्लेबाजी या गेंदबाजी का विकल्प मिलता है। साल दर साल इस नियम की चर्चा बढ़ती जा रही है। बीसीसीआई का कहना था कि इस नियम से खेल में रणनीतिक विकास होगा, खेल में रोचकता आएगी और अधिक खिलाड़ियों को मौका भी मिलेगा।

क्यों हो रही है नियम की आलोचना

हाल ही में आईपीएल 2026 की शुरुआत से ठीक पहले हुई बैठक में शुभमन गिल और अक्षर पटेल जैसे कप्तानों ने इस नियम को हटाने की मांग की थी। उनका कहना था कि इस नियम के कारण 11 खिलाड़ियों वाली पारंपरिक क्रिकेट को कहीं न कहीं ठेस पहुंच रही है। साथ ही इससे टीम का बैलेंस भी बिगड़ रहा है।

दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल इस नियम को ऑल-राउंडर विरोधी मानते हैं। उनके अनुसार यह नियम टीम में ऑल-राउंडर की भूमिका और प्रभाव को कम कर रही है। यदि मैच के बीच में भी इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में कोई फुल टाइम गेंदबाज या बल्लेबाज को मौका दिया जाता है, तो इससे ऑल राउंड खिलाड़ियों की अहमियत इस खेल से खत्म होती जाएगी। फिलहाल इस नियम को 2027 तक के लिए लागू किया गया है और इससे पहले बीसीसीआई इसे निरस्त करती नजर नहीं आ रही है।

पहले भी हो चुका है नियमों का विरोध

क्रिकेट में नियमों का विरोध कोई नई बात नहीं है। क्रिकेट के इतिहास में अब तक ऐसे कई नियम लागू हुए हैं जिसने इस खेल को रोचक बनाने की बजाए नीरस और विवादित बनाया है।

इनमें से सबसे विवादित नियमों में से एक नियम डीएलएस (डक्वर्थ लुइस सिस्टम) को माना जाता है। क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। इस खेल में एक तत्व ऐसा है जिसमें अनिश्चितता होने के बावजूद भी खेल प्रेमी और खिलाड़ी उसे पसंद नहीं करते। वह तत्व है, बारिश। यदि किसी मैच के बीच में बारिश हो जाती है, तो बारिश के ठीक बाद मैच को डीएलएस नियम के अनुसार आगे बढ़ाया जाता है। इस नियम के अनुसार बचे हुए मैच को समयानुसार खत्म करने के लिए बचे हुए ओवरों को कम कर के लक्ष्य को भी कम कर दिया जाता है। लेकिन इस नियम के कारण ओवर और लक्ष्य के बीच का तालमेल जटिल हो जाता है। सबसे पहले इस नियम को 1997 में पेश किया गया। 1999 में इसे आईसीसी ने अपना लिया।

कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से लक्ष्य का पीछा कर रही टीम को अधिक फायदा होता है। क्रिकेट कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने हाल ही में पर्थ में खेले गए ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत मैच में डीएलएस सिस्टम का विरोध किया। पहले 50 ओवर का मैच बारिश के कारण घट कर 26-26 ओवर का हुआ। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट के नुकसान पर 136 रन बनाए। लेकिन ऑस्ट्रेलिया को यह मैच जीतने के लिए 26 ओवरों में केवल 131 रनों का लक्ष्य मिला।

इन नियमों में दूसरा सबसे विवादित नियम है, मांकड़ नियम। इस नियम के अनुसार यदि कोई बल्लेबाज, गेंदबाज के गेंद डालने से पहले अपनी क्रीज से बाहर निकल जाता है तो गेंदबाज के पास उसे रन आउट करने का मौका होता है। इस नियम को पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीनू मांकड़ के नाम पर रखा गया है। दरअसल, साल 1947-48 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वीनू मांकड़ वह पहले गेंदबाज थे जिन्होंने इस नियम का उपयोग करके विकेट लेने की कोशिश की थी।

हाल के वर्षों में कई गेंदबाजों ने इस नियम से विकेट हासिल किए हैं। इसमें सबसे ज्वलंत मुद्दा साल 2019 के एक आईपीएल मैच में देखा गया, जहां किंग्स XI पंजाब (अब पंजाब किंग्स) की तरफ से गंदबाजी कर रहे भारतीय स्पिनर आर. अश्विन ने राजस्थान रॉयल्स के सलामी बल्लेबाज जॉस बटलर को मांकड़ नियम के तहत रन आउट किया, और अंपायर ने उन्हें रन आउट करार भी किया। इस घटना के बाद क्रिकेट जगत दो हिस्सों में बंट गया। एक हिस्सा अश्विन के पक्ष सें सामने आया, क्योंकि उन्होंने नियम के दायरे में रह कर खिलाड़ी को रन आउट किया। वहीं एक पक्ष ने इस कृत्य को खेल भावना के खिलाफ मानकर अश्विन का विरोध किया।

नियम में है बदलाव की जरूरत

लगातार खिलाड़ियों और कोच की बढ़ती शिकायतें इस बात का प्रमाण हैं कि उन्हें इस नियम को अपनाने में परेशानी हो रही है। खिलाड़ी अगर खुद किसी नियम को अपनाने से झिझक रहे हों तो इससे उस पूरे खेल पर बुरा असर पड़ सकता है। इस रूल से खेल में ऑलराउंड खिलाड़ियों के प्रभाव में कमी आई है। पारंपरिक खेल से हटकर अब कप्तान और कोच को 12वें खिलाड़ी के लिए अलग से रणनीति बनाने का दबाव बढ़ गया है। बीसीसीआई को इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इस नियम पर जल्द से जल्द बदलाव करने की जरूरत है। खेल में ऑलराउंड खिलाड़ियों के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए बल्लेबाजों के लिए सिर्फ बल्लेबाज या गेंदबाजों के विकल्प के तौर पर सिर्फ गेंदबाज को ही मैदान पर उतारने की इजाजत होनी चाहिए।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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