Wednesday, 12 August 2026
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अदाणी समूह को US केस में बड़ी राहत, राहुल गांधी के ‘Compromised PM’ वाले बयान पर गरमाई सियासत

अमेरिका में अदाणी समूह के खिलाफ आपराधिक मामला ‘with prejudice’ खारिज होने से बड़ी कानूनी राहत मिली। राहुल गांधी के ‘Compromised PM’ बयान और महाराष्ट्र की वनभूमि मंजूरी पर भी सियासत गरमाई।

वाशिंगटन, डीसी/ नई दिल्ली: एक तरफ अमेरिका में अदाणी समूह से जुड़े बहुचर्चित आपराधिक मामले का पटाक्षेप हो चुका है, तो दूसरी तरफ भारत में इसे लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। अमेरिकी अदालत में गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला ‘with prejudice’ खारिज किए जाने का अर्थ है कि उसी मामले में इन आरोपों को दोबारा उसी रूप में दाखिल नहीं किया जा सकता। यह घटनाक्रम अदाणी समूह के लिए लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी कानूनी दबाव के खत्म होने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

इसी बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘Compromised PM’ कहा है। राहुल गांधी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अदाणी को लेकर अमेरिकी कार्रवाई के संदर्भ में देशहित से समझौता किया।

मामले को और चर्चा में लाने वाली दूसरी खबर महाराष्ट्र से आई है। राज्य सरकार ने अदाणी समूह की दो कंपनियों की परियोजनाओं के लिए करीब 83,700 वर्ग फुट वनभूमि के डायवर्जन को मंजूरी दी है। इसमें रायगढ़ के अलीबाग क्षेत्र में सीमेंट परियोजना से जुड़ी जमीन और अमरावती में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के लिए वनभूमि शामिल है।

अमेरिका में अदाणी को मिली राहत

अमेरिका के Eastern District of New York में चल रहे आपराधिक मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने अभियोग को Rule 48(a) के तहत खारिज करने का अनुरोध किया था। अदालत ने इसे with prejudice मंजूर किया। मामले में गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी के तत्कालीन सीईओ वनीत एस. जैन और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।

अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया था कि न्याय विभाग ने मामले की समीक्षा की और अपने अभियोजन विवेक के तहत इन व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन खर्च नहीं करने का फैसला किया। अदालत ने इसके बाद अभियोग को स्थायी रूप से खारिज कर दिया।

यहां ‘with prejudice’ शब्द बेहद महत्वपूर्ण है। सामान्य तौर पर किसी आपराधिक मामले को बिना prejudice खारिज किए जाने की स्थिति में कुछ परिस्थितियों में अभियोजन दोबारा मामला ला सकता है। लेकिन इस मामले में अदालत का आदेश ‘with prejudice’ होने के कारण संबंधित अभियोग को दोबारा उसी आधार पर आगे बढ़ाने का रास्ता बंद हो गया।

किस मामले में लगे थे आरोप?

यह मामला नवंबर 2024 में अमेरिकी अधिकारियों की कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया था। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए करीब 265 मिलियन डॉलर की कथित रिश्वत योजना बनाई गई और अमेरिकी निवेशकों तथा वित्तीय संस्थानों से संबंधित जानकारी में कथित तौर पर गलतबयानी की गई।

अदाणी समूह और संबंधित लोगों ने इन आरोपों को खारिज किया था और मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही थी। बाद में अमेरिकी न्याय विभाग ने आपराधिक मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर भी समझना जरूरी है। अमेरिकी आपराधिक मामला खत्म होना और अमेरिकी Securities and Exchange Commission (SEC) से जुड़े नागरिक मामले का निपटारा एक ही चीज नहीं है।

SEC से जुड़े मामले में गौतम अदाणी और सागर अदाणी ने नागरिक दावों का निपटारा किया था। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों ने बिना आरोपों को स्वीकार या अस्वीकार किए आर्थिक भुगतान पर सहमति जताई थी। इसके अलावा अमेरिकी राजकोष विभाग (Treasury Department) से जुड़े Iran-sanctions मामले में भी अलग समझौता हुआ था।

इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को अदाणी समूह के खिलाफ अमेरिका में चल रहे आपराधिक अभियोग के अंत के तौर पर देखना अधिक सटीक है, न कि सभी प्रकार की अमेरिकी जांचों या विवादों को एक ही फैसले में खत्म मान लेना।

अदाणी समूह के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

अमेरिका में चल रहा मामला अदाणी समूह के लिए केवल कानूनी चुनौती नहीं था। इसका असर कंपनी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा, निवेशकों के भरोसे और विदेशों में पूंजी जुटाने की क्षमता पर भी पड़ सकता था।

नवंबर 2024 में मामला सामने आने के बाद अदाणी समूह को वैश्विक स्तर पर काफी जांच और सवालों का सामना करना पड़ा था। अमेरिकी अदालत में आपराधिक अभियोग के खत्म होने से समूह पर मौजूद एक बड़ा कानूनी दबाव हट गया है।

इसी संदर्भ में अदाणी समूह के लिए अमेरिका में निवेश और विस्तार की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। रिपोर्टों में समूह की अमेरिकी कारोबार और डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

यानी कानूनी राहत का असर केवल अदालत तक सीमित नहीं है। यह समूह की भविष्य की कारोबारी रणनीति और वैश्विक निवेशकों के साथ उसके संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरा

अमेरिकी मामले में राहत के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘compromised PM’ कहा।

राहुल गांधी का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अदाणी को लेकर अमेरिकी कानूनी कार्रवाई के संदर्भ में भारत के हितों से समझौता किया। उन्होंने इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार की नीतियों और अदाणी समूह के साथ कथित नजदीकी के सवाल से जोड़ा है।

राहुल गांधी ने एक्स पर एक खबर से जुड़ी तस्वीर साझा करते हुए लिखा –

“इसमें दिखने वाली तस्वीर से कहीं ज्यादा कुछ छिपा है। एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री को भारत के हितों को बेचने के लिए मजबूर किया गया। भारत इसकी भारी कीमत चुका रहा है।”

महाराष्ट्र में अदाणी समूह को 83,700 वर्ग फुट वनभूमि की मंजूरी

इसी राजनीतिक माहौल में महाराष्ट्र से सामने आई एक और खबर ने बहस को और हवा दी है।

महाराष्ट्र सरकार ने अदाणी समूह की दो कंपनियों की परियोजनाओं के लिए कुल करीब 83,700 वर्ग फुट यानी लगभग 0.78 हेक्टेयर वनभूमि के डायवर्जन को मंजूरी दी है। यह जमीन दो अलग-अलग परियोजनाओं के लिए है।

पहला और बड़ा हिस्सा रायगढ़ जिले के अलीबाग तालुका में है। यहां करीब 0.6497 हेक्टेयर, यानी लगभग 69,933 वर्ग फुट जमीन अदाणी सीमेंटेशन लिमिटेड की परियोजना के लिए मंजूर की गई है।

इसमें शाहापुर और शाहबाज गांवों के क्षेत्र में आरक्षित वन, नाला मैंग्रोव और क्रीक मैंग्रोव वनभूमि शामिल है। प्रस्तावित उपयोग में रायगढ़ सीमेंट बल्क टर्मिनल के लिए बर्थिंग जेटी, कन्वेयर कॉरिडोर, बैकअप फैसिलिटीज और अप्रोच रोड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

दूसरा हिस्सा अमरावती में है। करीब 0.1281 हेक्टेयर यानी लगभग 13,788 वर्ग फुट वनभूमि अदाणी टोटल गैस लिमिटेड को प्राकृतिक गैस वितरण नेटवर्क के लिए भूमिगत स्टील पाइपलाइन बिछाने के उद्देश्य से मंजूर की गई है।

पर्यावरण पर उठता सवाल

महाराष्ट्र की मंजूरी का सबसे संवेदनशील पहलू मैंग्रोव क्षेत्र है। मैंग्रोव तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वे तटों को कटाव से बचाने, जैव विविधता को सहारा देने और समुद्री पारिस्थितिकी में भूमिका निभाने के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने में भी योगदान देते हैं।

इसलिए रायगढ़ में प्रस्तावित परियोजना के लिए वनभूमि और मैंग्रोव क्षेत्र के इस्तेमाल को लेकर पर्यावरणीय निगरानी का सवाल स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है।

अदाणी समूह के सामने अब क्या तस्वीर है?

अमेरिका में आपराधिक मामला खत्म होना अदाणी समूह के लिए निश्चित तौर पर एक बड़ी कानूनी राहत है। समूह अब उस आपराधिक अभियोग के कारण पैदा होने वाली अनिश्चितता से बाहर निकलने की स्थिति में है।

इसके साथ ही, अमेरिकी बाजार और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच समूह की स्थिति को लेकर भी नए सिरे से चर्चा होगी। लेकिन कंपनी के सामने केवल अमेरिकी मामला ही एकमात्र मुद्दा नहीं रहा है। भारत में भी उसके अलग-अलग कारोबार, पर्यावरणीय मंजूरियों, भूमि आवंटन और नियामकीय मामलों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। महाराष्ट्र की ताजा वनभूमि मंजूरी इसी व्यापक बहस का नया हिस्सा बन गई है।

एक तरफ कानूनी राहत, दूसरी तरफ राजनीतिक सवाल

पूरे घटनाक्रम को देखें तो तस्वीर दो अलग हिस्सों में बंटी नजर आती है।

पहला हिस्सा अमेरिकी अदालत का है, जहां गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक अभियोग को स्थायी रूप से ‘with prejudice’ खारिज कर दिया गया। यह प्रक्रिया ट्रायल या दोषमुक्ति के फैसले के बजाय अभियोजन पक्ष द्वारा मामला आगे न बढ़ाने और अदालत द्वारा उसे स्थायी रूप से बंद करने का परिणाम है।

दूसरा हिस्सा भारत की राजनीति का है, जहां राहुल गांधी ने इस राहत को प्रधानमंत्री मोदी और अदाणी समूह के बीच कथित संबंधों के संदर्भ में उठाया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र में अदाणी समूह की दो परियोजनाओं के लिए वनभूमि डायवर्जन की मंजूरी ने विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का एक और मुद्दा दिया है।

यही इस पूरे मामले की सबसे अहम बात है। अदाणी समूह को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन भारत में अदाणी को लेकर राजनीतिक बहस खत्म नहीं हुई। अमेरिकी अदालत का आदेश एक कानूनी अध्याय बंद करता है, जबकि राहुल गांधी के आरोप और महाराष्ट्र की वनभूमि मंजूरी ने भारत में इस विवाद के नए राजनीतिक और पर्यावरणीय सवाल पेश कर दिए हैं।

ये भी पढ़ें :- केरल का नाम होगा ‘केरलम’, लोकसभा ने दी मंजूरी! जानिए नाम बदलने के पीछे की पूरी कहानी

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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