Saturday, 22 August 2026
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अमेरिका में बिलावल भुट्टो की किरकिरी, भारत पर लगाए झूठे आरोप तो मुस्लिम पत्रकार ने किया करारा जवाब

नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी को अमेरिका में उस समय भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में प्रेस वार्ता के दौरान भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के बहाने मुस्लिमों को आतंकवाद से जोड़ने की साजिश रची है।

लेकिन बिलावल का यह बयान वहां मौजूद एक मुस्लिम पत्रकार को नागवार गुज़रा। पत्रकार ने तुरंत करारा जवाब देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग किसी और ने नहीं बल्कि भारतीय सेना की मुस्लिम महिला अधिकारी – कर्नल सोफिया कुरैशी – ने की थी। यह सुनकर बिलावल भुट्टो निरुत्तर हो गए और चुपचाप बैठ गए।

भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा हुआ बेनकाब
बिलावल भुट्टो अमेरिका में पाकिस्तान के “ऑपरेशन बनयान उल मरसूस” को लेकर भारत पर निशाना साधने आए थे, जिसे भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के जवाब में शुरू किया गया था। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने भारत पर इज़राइल जैसी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना सीधे बेंजामिन नेतन्याहू से कर डाली। उन्होंने कहा कि भारत शांति नहीं चाहता और जानबूझकर तनाव को हवा दे रहा है।

भारत ने रखा स्पष्ट और तथ्यपूर्ण पक्ष
बिलावल ने भले ही भारत पर मनगढ़ंत आरोप लगाए हों, लेकिन भारत सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट रहा। पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया। इस अभियान की जानकारी देने के लिए भारत सरकार ने दो महिला सैन्य अधिकारियों – कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह – को सामने रखा, जिनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे।

इससे स्पष्ट हो गया कि भारत में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता, और पाकिस्तान की न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग की रणनीति अब अप्रभावी हो चुकी है। भारत ने कई बार स्पष्ट किया है कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों को माकूल जवाब दिया जाएगा।

अमेरिकी धरती पर बिलावल भुट्टो का भारत-विरोधी एजेंडा बुरी तरह नाकाम साबित हुआ। पत्रकार द्वारा तथ्यों के आधार पर जवाब दिए जाने के बाद बिलावल भुट्टो के आरोप पूरी तरह खोखले नजर आए। इससे यह भी साबित हो गया कि भारत न सिर्फ सैन्य रूप से मजबूत है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी आत्मविश्वास के साथ अपना पक्ष रखने में सक्षम है – चाहे वह किसी महिला अधिकारी के ज़रिए ही क्यों न हो।

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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