PM Kisan की 24वीं किस्त के लिए e-KYC अनिवार्य है। किसान आधार से जुड़े मोबाइल पर OTP, CSC केंद्र पर बायोमेट्रिक सत्यापन या मोबाइल ऐप के फेस ऑथेंटिकेशन से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। जानें भुगतान से पहले किन बातों का ध्यान रखें।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त को लेकर किसानों के बीच इंतजार अब खत्म हुआ। इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता खेती-किसानी से जुड़े परिवारों के लिए काफी अहम मानी जाती है। किस्त जारी होने के साथ ही लाभार्थियों के मन में यह सवाल भी है कि उनका नाम सूची में शामिल है या नहीं और भुगतान में किसी तरह की रुकावट तो नहीं आएगी।
वहीं, योजना से जुड़े दस्तावेजों और पात्रता की शर्तों को लेकर भी कई किसान जानकारी जुटा रहे हैं। ऐसे में 24वीं किस्त से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जानना जरूरी है, ताकि किसान समय रहते अपनी स्थिति जांच सकें और किसी समस्या की स्थिति में जरूरी कदम उठा सकें। आखिर किन किसानों को इस बार योजना का लाभ मिलेगा और किन वजहों से किस्त अटक सकती है?
पीएम किसान की 24वीं किस्त आज जारी होगी
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए 30 अक्टूबर का दिन अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के बनासकांठा से योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में अगली किस्त की राशि ट्रांसफर की गई। इस किस्त में 9.34 करोड़ से अधिक किसानों को 2,000 रुपये दिए गए हैं।
केंद्र सरकार के मुताबिक, इसके लिए 18,690 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जारी की गई। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचेगी।
हालांकि, हर पंजीकृत किसान को किस्त मिलना तय नहीं है। इसके लिए योजना की पात्रता शर्तें पूरी करना, ई-केवाईसी कराना और जमीन व बैंक खाते से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन जरूरी है। जिन किसानों की जानकारी अधूरी है या जिनके दस्तावेजों में गड़बड़ी है, उनके भुगतान में देरी हो सकती है।
क्या है पीएम किसान सम्मान निधि योजना?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे छोटे और सीमांत किसानों सहित पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल कुल 6,000 रुपये दिए जाते हैं। यह रकम एक साथ देने के बजाय 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में भेजी जाती है।
किस्तों का भुगतान आमतौर पर चार महीने के अंतराल पर किया जाता है। इसका मतलब है कि पात्र किसान परिवार को एक साल में तीन बार आर्थिक सहायता मिलती है। सरकार यह राशि सीधे बैंक खाते में भेजती है, ताकि बीच में किसी बिचौलिए की भूमिका न रहे।
योजना की शुरुआत दिसंबर 2018 में हुई थी और इसे 1 दिसंबर 2018 से प्रभावी माना गया। अब तक इसकी 23 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, पहली 23 किस्तों के माध्यम से पात्र किसानों को कुल 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। अब 24वीं किस्त के तहत करीब 19,000 करोड़ रुपये जारी किए जाने हैं।
किन किसानों को मिला योजना का लाभ?
पीएम किसान योजना का लाभ उन्हीं किसान परिवारों को मिलता है, जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। इसके लिए किसान परिवार के नाम पर खेती योग्य भूमि का रिकॉर्ड होना जरूरी है। संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन जमीन के दस्तावेजों और लाभार्थी की जानकारी का सत्यापन करता है।
योजना में किसान परिवार का अर्थ पति, पत्नी और उनके नाबालिग बच्चों से है। परिवार के पात्र होने पर निर्धारित सहायता राशि दी जाती है। जमीन के रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना, आधार से जुड़ी जानकारी और बैंक खाते का सही विवरण होना भुगतान के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, कुछ श्रेणियों के लोगों को इस योजना से बाहर रखा गया है। इनमें संस्थागत भूमि धारक, संवैधानिक पदों पर वर्तमान या पूर्व में रहे व्यक्ति और कुछ श्रेणियों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि शामिल हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के कई सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी भी योजना के पात्र नहीं हैं। हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी और समूह डी के कर्मचारियों के लिए निर्धारित अपवाद लागू हो सकते हैं।
इसके अलावा, 10,000 रुपये या उससे अधिक मासिक पेंशन पाने वाले कुछ सेवानिवृत्त पेंशनभोगी, आयकर देने वाले किसान और डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट तथा आर्किटेक्ट जैसे पंजीकृत पेशेवर भी योजना के दायरे से बाहर हैं।
e-KYC पूरी नहीं तो अटक सकती है किस्त
पीएम किसान योजना के लाभार्थियों के लिए e-KYC अनिवार्य है। जिन किसानों ने अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें 24वीं किस्त मिलने में परेशानी हो सकती है। सरकार का उद्देश्य इस प्रक्रिया के जरिए लाभार्थियों की पहचान की पुष्टि करना और गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वाले मामलों को रोकना है।
किसान ई-केवाईसी तीन तरीकों से पूरी कर सकते हैं:
- ओटीपी के जरिए: किसान PM-Kisan की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर e-KYC विकल्प चुन सकते हैं। इसके बाद आधार नंबर दर्ज कर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जा सकता है।
- बायोमेट्रिक सत्यापन: जिन किसानों के आधार से मोबाइल नंबर लिंक नहीं है या जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अधिकृत सेवा केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक e-KYC करा सकते हैं।
- फेस ऑथेंटिकेशन: PM-Kisan मोबाइल ऐप के जरिए चेहरे की पहचान के आधार पर भी e-KYC की सुविधा उपलब्ध है। किसान ऐप में दिए गए निर्देशों का पालन करके यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि केवल e-KYC पूरी कर लेना ही भुगतान की गारंटी नहीं है। जमीन के दस्तावेज, आधार और बैंक खाते की जानकारी सहित अन्य पात्रता शर्तों का सत्यापन भी जरूरी है।
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कैसे चेक करें 24वीं किस्त का स्टेटस?
किसान घर बैठे आधिकारिक पोर्टल पर अपनी किस्त और लाभार्थी की स्थिति देख सकते हैं। इसके लिए नीचे दिए गए तरीके अपनाएं:
- सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।
- होमपेज पर उपलब्ध ‘Farmers Corner’ सेक्शन में जाएं।
- यहां ‘Know Your Status’ विकल्प पर क्लिक करें।
- अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और स्क्रीन पर दिखाई देने वाला कैप्चा दर्ज करें।
- मांगी गई जानकारी भरने और जरूरी ओटीपी सत्यापन के बाद ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
- स्क्रीन पर आपकी लाभार्थी स्थिति, किस्त और भुगतान से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी।
अगर किसान को अपना नाम लाभार्थी सूची में देखना है, तो पोर्टल पर ‘Beneficiary List’ विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव का चयन करने के बाद सूची देखी जा सकती है।
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल या सरकारी मोबाइल ऐप के जरिए ही अपनी जानकारी जांचें। किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक विवरण या आधार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
खाते में राशि न पहुंच पाने का कारण
कई बार पात्रता होने के बावजूद किसानों को किस्त समय पर नहीं मिलती। इसकी वजह दस्तावेजों या सत्यापन से जुड़ी समस्या हो सकती है। आमतौर पर भुगतान अटकने के पीछे ये कारण हो सकते हैं:
- ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होना।
- आधार कार्ड और PM-Kisan पोर्टल पर दर्ज जानकारी में अंतर होना।
- बैंक खाते का विवरण गलत या अधूरा होना।
- बैंक खाते में आधार सीडिंग या भुगतान से जुड़ी समस्या होना।
- जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन लंबित रहना।
- किसान के नाम पर दर्ज भूमि से जुड़े दस्तावेजों में विसंगति होना।
- योजना के नियमों के तहत परिवार की पात्रता पर संदेह होने के कारण जांच चलना।
पीएम किसान पोर्टल के अनुसार, कुछ ऐसे मामलों में भुगतान अस्थायी रूप से रोका गया है, जिनमें जमीन का स्वामित्व 1 फरवरी 2019 के बाद हासिल किया गया हो या एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्य योजना का लाभ लेते पाए गए हों। ऐसे मामलों में भौतिक सत्यापन पूरा होने तक सहायता राशि रोकी जा सकती है।
बलरामपुर में 15,736 किसानों को नहीं मिलेगी 24वीं किस्त
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से सामने आई जानकारी बताती है कि जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी या अधूरे दस्तावेज किस तरह किसानों का भुगतान रोक सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 15,736 किसान इस बार पीएम किसान सम्मान निधि की राशि से वंचित रहेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, इन किसानों के नाम जमीन के रिकॉर्ड में विरासत यानी वरासत के आधार पर दर्ज हैं। वर्ष 2019 के बाद वरासत के जरिए जमीन का मालिकाना हक मिलने वाले कुछ मामलों में पुराने भूमि धारक से संबंधित दस्तावेज और अन्य सत्यापन रिकॉर्ड मांगे गए हैं। आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण इन किसानों की किस्त रोक दी गई है।
जिले में करीब 2.56 लाख किसानों के खातों में 24वीं किस्त पहुंचने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पहले बड़ी संख्या में किसानों के नाम लाभार्थी सूची से हटाए गए थे, लेकिन उनमें से अब तक सीमित किसानों ने ही अपने दस्तावेज जमा कराए हैं।
गुजरात से जारी हुई किस्त
पीएम किसान की 24वीं किस्त जारी करने के लिए गुजरात के बनासकांठा में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान कृषि क्षेत्र से जुड़ी अन्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की जानकारी के अनुसार, बनासकांठा में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की गई।
इस कार्यक्रम में कृषि अवसंरचना को मजबूत करने पर भी जोर रहा। कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत तैयार 521 परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की गईं। इन परियोजनाओं में कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन, गोदाम, साइलो, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और कृषि उत्पादों के प्राथमिक व द्वितीयक प्रसंस्करण से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। इनका कुल परियोजना खर्च करीब 4,950 करोड़ रुपये बताया गया है।
इसके अलावा, 12 बागवानी क्लस्टरों में जमीनी स्तर पर गतिविधियों की शुरुआत भी की गई। ये क्लस्टर करीब 1.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जाने हैं और इनसे 1.3 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उत्तर गुजरात के दो क्लस्टरों में आलू उत्पादन पर विशेष ध्यान रहा। इसका उद्देश्य उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देना और किसानों की आय के नए अवसर तैयार करना है।




