नायरा एनर्जी ने 2026 में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए हैं। मार्च में भी पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा किया गया था, जिसे जुलाई में कंपनी ने वापस ले लिया था।
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी निजी फ्यूल रिटेल कंपनियों में शामिल नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 से पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। नई दरें नायरा एनर्जी के देशभर में मौजूद उसके पेट्रोल पंपों पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। कंपनी के इस फैसले के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब सरकारी तेल विपणन कंपनियों यानी IOC, BPCL और HPCL ने घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में लंबे समय से बड़ा बदलाव नहीं किया है। सरकारी कंपनियों के स्थिर दाम और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत के बीच निजी ईंधन कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ रहा है। नायरा के नए दाम इसी लागत दबाव को कम करने की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं।
7,000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर बढ़ी कीमतें
नायरा एनर्जी के नेटवर्क में देशभर में 7,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशन हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार कंपनी के करीब 7,108 पेट्रोल पंप हैं। शनिवार से इन आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली अंतिम कीमत स्थानीय टैक्स, वैट और अन्य शुल्कों के कारण अलग हो सकती है।
इसका मतलब यह है कि 5 रुपये और 3 रुपये की बढ़ोतरी नायरा के ईंधन की बेस कीमत में बदलाव को दर्शाती है। किसी शहर में पेट्रोल या डीजल का अंतिम खुदरा भाव राज्य सरकार के स्थानीय करों और अन्य शुल्कों पर भी निर्भर करता है।
क्यों बढ़ाए गए पेट्रोल-डीजल के दाम?
नायरा एनर्जी का यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बढ़ी लागत के बीच आया है। कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी तेजी आई है। इससे ईंधन खरीदने और उसे बाजार तक पहुंचाने की लागत बढ़ती है। दूसरी ओर, घरेलू बाजार में खुदरा कीमतें लंबे समय तक स्थिर रहने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
हालिया रिपोर्टों में बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण रिफाइनरों और फ्यूल रिटेलरों की लागत बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए वैश्विक तेल बाजार में बदलाव का असर घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ता है।
अक्टूबर और नवंबर के महीने में भारतीय रिफाइनरों के लिए रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति भी अपेक्षाकृत कड़ी रहने की संभावना है। रूस से निर्यात में कमी और चीन की बढ़ी हुई मांग के कारण भारतीय कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों से भी कच्चा तेल लेना पड़ रहा है। इससे कुछ मामलों में खरीद लागत बढ़ सकती है।
इस साल दूसरी बार नायरा ने बढ़ाए दाम
नायरा एनर्जी ने इस साल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दूसरी बार बढ़ोतरी की है। इससे पहले 26 मार्च 2026 को कंपनी ने पेट्रोल में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। उस समय पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में दबाव बढ़ा था।
हालांकि, इसके बाद वैश्विक तेल बाजार में नरमी आई। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं में कमी के बाद 1 जुलाई 2026 को नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे। यह कमी उसके मार्च के बढ़ाए गए दाम को पूरी तरह वापस लेने के बराबर थी।
इस तरह अक्टूबर की मौजूदा बढ़ोतरी को मार्च में हुए बदलाव के बाद एक और महत्वपूर्ण मूल्य संशोधन माना जा सकता है। जुलाई में कीमतें घटाने के बाद अब कंपनी ने फिर से पेट्रोल और डीजल महंगा किया है।
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सरकारी तेल कंपनियों ने भी बढ़ाए दाम?
नायरा की कीमत बढ़ोतरी का एक अहम पहलू यह है कि सरकारी तेल कंपनियों ने उसी समयावधि में घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में समान अनुपात में बदलाव नहीं किया है। भारत के पेट्रोल पंप नेटवर्क में सरकारी तेल कंपनियों की हिस्सेदारी 90 फीसदी से अधिक है। देश में कुल पेट्रोल पंपों की संख्या 1.04 लाख से ज्यादा बताई गई है।
ऐसे में नायरा के दाम बढ़ने के बाद उसके पंपों और सरकारी तेल कंपनियों के पंपों के बीच कीमत का अंतर बढ़ सकता है। उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से अलग-अलग कंपनियों के पंपों पर उपलब्ध कीमतों की तुलना कर सकते हैं।
यह स्थिति निजी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू खुदरा कीमतों को स्थिर रखने की स्थिति में उन्हें मार्जिन का दबाव झेलना पड़ सकता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां भी वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के कारण पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर दबाव का सामना कर रही हैं।
पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमा को लेकर भी विवाद
नायरा की कीमत बढ़ोतरी से पहले ईंधन बाजार में एक और मुद्दा चर्चा में था। निजी ईंधन कंपनियों की ओर से कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री सीमित किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
रिपोर्टों के मुताबिक, निजी रिटेलरों के सामने एक समस्या यह थी कि रिटेल पंपों पर मिलने वाला डीजल कई मामलों में थोक कीमतों की तुलना में सस्ता था। इसके कारण औद्योगिक और बड़े उपभोक्ता भी रिटेल आउटलेट्स से अधिक मात्रा में डीजल खरीदने लगे। इससे कुछ पेट्रोल पंपों पर स्टॉक और सप्लाई का दबाव बढ़ा।
सरकार ने इस तरह की बिक्री सीमा को लेकर निजी ईंधन कंपनियों को चेतावनी भी दी है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि निजी कंपनियों की ओर से पेट्रोल या डीजल की बिक्री पर एकतरफा प्रतिबंध स्वीकार्य नहीं हैं और पहले जारी सरकारी निर्देश लागू हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता में परेशानी न हो।
कीमत बढ़ने का आम लोगों पर क्या असर होगा?
पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी सीधे तौर पर उन उपभोक्ताओं के खर्च को प्रभावित करेगी जो नायरा के पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदते हैं। निजी कार, बाइक और अन्य पेट्रोल वाहनों के मालिकों के लिए हर लीटर पर अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
डीजल की कीमत में बढ़ोतरी का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं रहता। डीजल का इस्तेमाल ट्रक, बस, माल ढुलाई और कृषि से जुड़े कई वाहनों में होता है। इसलिए डीजल की लागत बढ़ने पर परिवहन क्षेत्र की परिचालन लागत भी बढ़ सकती है।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस बढ़ोतरी से सभी वस्तुओं की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। किसी वस्तु की अंतिम कीमत पर ईंधन लागत के अलावा कच्चे माल, मजदूरी, परिवहन दूरी, टैक्स और मांग जैसे कई दूसरे कारकों का भी असर होता है। इसलिए ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है।
नायरा एनर्जी की रिफाइनरी भी महत्वपूर्ण
नायरा एनर्जी केवल फ्यूल रिटेल कंपनी नहीं है। गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले के वाडीनार में कंपनी की बड़ी रिफाइनरी है। नायरा के अनुसार, वाडीनार रिफाइनरी की क्षमता 20 मिलियन टन प्रति वर्ष है और यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी है। कंपनी के मुताबिक इसकी क्षमता भारत के कुल रिफाइनिंग उत्पादन में करीब 8% का योगदान देती है।
रिफाइनरी के अलावा कंपनी ने पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में भी विस्तार किया है। नायरा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार कंपनी के पास 450 KTPA क्षमता का पॉलीप्रोपाइलीन प्लांट भी है।
नायरा एनर्जी में रूसी रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी
नायरा एनर्जी का अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी शेयरहोल्डिंग है। रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के पास नायरा एनर्जी में 49.13% हिस्सेदारी है। रोसनेफ्ट की अपनी वेबसाइट के अनुसार, वाडीनार रिफाइनरी की क्षमता 20 मिलियन टन सालाना है।
हाल के वर्षों में नायरा की रिफाइनिंग और कच्चे तेल की खरीद भी अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में चर्चा में रही है। रूस से जुड़े प्रतिबंधों और वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बदलाव का असर भारतीय रिफाइनरों के कारोबार और निर्यात व्यवस्था पर पड़ा है। हालांकि, मौजूदा पेट्रोल-डीजल कीमत बढ़ोतरी के तत्काल कारण के तौर पर रिपोर्टों में मुख्य रूप से वैश्विक कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की बढ़ी हुई लागत को बताया गया है।
बढ़ती कीमतों के संभावित प्रभाव
नायरा एनर्जी की कीमत बढ़ोतरी का अगला असर निजी और सरकारी ईंधन खुदरा बाजार के बीच कीमत के अंतर पर दिखाई दे सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो निजी रिटेलरों पर लागत और मार्जिन का दबाव आगे भी बना रह सकता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार तेजी से बदलता है। हाल में G7 देशों ने आपातकालीन भंडार से तेल और डीजल जारी करने की योजना बनाई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने 2 अक्टूबर को कहा कि इस फैसले के बाद तेल की कीमतों में करीब 5 डॉलर की गिरावट देखी गई है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में कीमतों का रुख आगे फिर बदल सकता है।




