Sunday, 18 October 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट ने अमेरिका में नाबालिग से बलात्कार के आरोपी भगोड़े अपराधी को जमानत दे दी

नई दिल्ली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2004 से 2006 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका में एक नाबालिग के साथ कथित बलात्कार के लिए प्रत्यर्पण जांच का सामना कर रहे एक भगोड़े अपराधी (एफसी) को जमानत दे दी है। उसका प्रत्यर्पण अनुरोध दिल्ली की एक अदालत में लंबित है। इंटरपोल के जरिए अमेरिकी पुलिस के इनपुट पर उसे आगरा से गिरफ्तार किया गया। वह पिछले 17 साल से कानून से भाग रहा था। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कड़ी शर्तें लगाते हुए आरोपी रत्नेश भूटानी को जमानत दे दी।

जस्टिस ने अपने आदेश में कहा कि यह निर्देशित किया जाता है कि यदि आवेदक प्रत्यर्पण कार्यवाही से निपटने वाले विद्वान ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही में भाग नहीं लेगा या कार्यवाही में देरी के उद्देश्य से अनावश्यक स्थगन की मांग करेगा, तो यह जमानत रद्द करने का आधार बन जाएगा। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को 6 महीने के भीतर प्रत्यर्पण कार्यवाही को शीघ्र पूरा करने का भी निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि आवेदक वर्ष 2007 से भारत में रह रहा है। वह पहले ही लगभग 5 महीने तक न्यायिक हिरासत में रह चुका है और समय-समय पर अंतरिम जमानत पर भी बाहर रहा है।

इस अवधि के दौरान आवेदक द्वारा किसी भी शर्त के उल्लंघन की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है या उसने उसे दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है। आवेदक ने अंतरिम जमानत की समाप्ति पर विधिवत आत्मसमर्पण किया था। पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि जिन अपराधों के लिए आरोपी पर संयुक्त राज्य अमेरिका में आरोप लगाया गया है, वे कैलिफोर्निया दंड संहिता के अनुसार जमानती अपराध हैं और आवेदक को निरंतर कारावास की जरूरत नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर और अधिवक्ता अर्पित बत्रा ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने शुरुआत में आवेदक पर 5 मामलों में आरोप लगाते हुए छेड़छाड़ के आरोप में कैलिफोर्निया में संबंधित पुलिस के पास वर्ष 2007 में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि यह कहा गया है कि वर्ष 2012 में, छेड़छाड़ के आरोपों के संबंध में उक्त शिकायत जबरन बलात्कार के मामले में बदल गई थी, जिसके बाद ही संयुक्त राज्य अमेरिका में कार्यवाही शुरू की गई थी और आवेदक की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था। ये पेश किया गया कि वर्तमान मामले में कथित अपराध कैलिफोर्निया कानून के तहत सभी जमानती अपराध हैं और यहां तक कि इसके लिए समझौते की भी अनुमति है।

यह भी तर्क दिया गया कि प्रत्यर्पण के मामलों में, भारत में न्यायालयों को भी विदेशी देश के दंडात्मक प्रावधानों के आलोक में अपराध की गंभीरता की जांच करनी होगी। यह भी तर्क दिया गया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर वर्तमान शिकायत दर्ज की गई है और आवेदक के प्रत्यर्पण की मांग की गई है, उन्हें संबंधित न्यायालय के समक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है और जब तक उन्हें ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता है।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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