राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में चंपत राय का नाम पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट में नहीं है। जानिए आरोपों से लेकर FIR और दूसरी SIT तक पूरा घटनाक्रम।
अयोध्या/ नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले चढ़ावे और दान की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार, 18 अगस्त को इस मामले में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री चंपत राय को राहत मिली है। मामले की जांच कर रही पहली विशेष जांच टीम यानी SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा का नाम नहीं है।
उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने इस रिपोर्ट को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंप दिया है। हालांकि, इस क्लीन चिट के साथ मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित दूसरी SIT अभी भी पूरे मामले की जांच कर रही है।
क्या है राम मंदिर दान का पूरा मामला?
अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में नकद राशि, आभूषण और दूसरी मूल्यवान वस्तुएं दान करते हैं। इन दान और चढ़ावे को तय प्रक्रिया के तहत इकट्ठा किया जाता है, गिना जाता है और बैंक में जमा कराया जाता है।
इसी व्यवस्था में कथित गड़बड़ी का मामला जून 2026 में सामने आया। समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने 7 जून को आरोप लगाया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे में से करीब 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की रकम गायब की गई है। आरोप सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर काफी चर्चा पैदा कर दी।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये के कथित नुकसान का आंकड़ा शुरुआती आरोपों में सामने आया था। जांच के दौरान अलग-अलग स्तर पर नकदी के संचालन, गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जांच की गई।
कैसे शुरू हुई जांच?
मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच की मांग की। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया।
इस टीम की अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे। इसमें लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार सदस्य थे।
SIT ने 15 से 20 जून के बीच अयोध्या में शुरुआती जांच की। जांच में सिर्फ पैसे की गिनती पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि दान पेटियों से लेकर नकदी की गिनती, उसके रखे जाने, हिसाब-किताब, कर्मचारियों की आवाजाही और सीसीटीवी निगरानी तक पूरी व्यवस्था को देखा गया।
जांच में क्या सामने आया?
SIT की शुरुआती रिपोर्ट में मंदिर की नकदी गिनने वाले कमरे में कथित चोरी के कई मामलों का जिक्र किया गया। 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच गिनती वाले कमरे में करीब 70 बार नकदी चोरी का पता चला। सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर नकदी छिपाकर ले जाने की घटनाएं भी सामने आईं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच लागू मानक प्रक्रिया यानी एसओपी का पूरी तरह पालन नहीं हुआ था। खास तौर पर प्रवेश और बाहर निकलने के समय कर्मचारियों की सही तरीके से जांच नहीं होने की बात सामने आई।
यानी जांच में सिर्फ किसी एक व्यक्ति की भूमिका पर ध्यान नहीं था, बल्कि पूरी दान प्रबंधन व्यवस्था की कमियों को भी ध्यान में रखा गया।
8 लोगों के खिलाफ FIR और गिरफ्तारी
SIT की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में 25 जून को FIR दर्ज की गई।
FIR में आठ लोगों को नामजद किया गया। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और वे जेल में हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के तहत भी मामला दर्ज किया गया।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा
विवाद बढ़ने के बाद 27 जून को चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने दोनों के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा था कि ट्रस्ट की अगली बैठक में इन पर फैसला लिया जाएगा। साथ ही ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया था कि भगवान राम को दान में मिली चांदी की ईंटों और आभूषणों समेत मूल्यवान वस्तुओं का हिसाब मौजूद है।
बाद में 6 जुलाई को ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। चंपत राय की जगह ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
उस समय इस्तीफे को मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया था। हालांकि, चंपत राय की ट्रस्ट में सदस्यता और उनके पद से हटने के बीच कानूनी अंतर भी था। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार पद से इस्तीफा देने के बावजूद किसी व्यक्ति की ट्रस्ट सदस्यता अपने आप खत्म नहीं होती।
SIT की पूछताछ में चंपत राय ने क्या कहा?
इस्तीफा देने के बाद SIT ने चंपत राय से भी पूछताछ की थी। जांचकर्ताओं ने उनसे मंदिर में मिलने वाले दान की रसीद, नकदी की गिनती, उसे रखने और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया समेत कई मुद्दों पर जानकारी मांगी।
चंपत राय ने पूछताछ के दौरान कथित चोरी में अपनी भूमिका से इनकार किया था। उनके अनुसार, जब उन्हें गड़बड़ी की जानकारी मिली तो उन्होंने शिकायत की और इसके बाद संदिग्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
उन्होंने जांचकर्ताओं से यह भी कहा था कि दान की रकम की व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा था और गड़बड़ी की जानकारी मिलने पर उन्होंने कार्रवाई की।
अब पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट में उनका नाम नहीं होना उनके लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
चंपत राय की क्लीन चिट का मतलब
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। चंपत राय को मिली क्लीन चिट का मतलब यह नहीं है कि राम मंदिर दान मामले की पूरी जांच खत्म हो गई है।
पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने रिपोर्ट की जांच के बाद इसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
लेकिन इसी मामले में दूसरी SIT भी जांच कर रही है। यह टीम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम कर रही है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे मामले में सभी जांच पूरी हो चुकी हैं या मामला पूरी तरह बंद हो गया है।
दूसरी SIT की भूमिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच के लिए SIT को फिर से गठित किया गया। इस दूसरी टीम की अध्यक्षता लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस. कर रहे हैं। इसमें अयोध्या रेंज के डीआईजी और अयोध्या के एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर नजर रख रहा है और उत्तर प्रदेश सरकार से जांच की प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है। अदालत ने फिलहाल सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट को याचिकाकर्ताओं या अन्य लोगों के साथ साझा करने की अनुमति नहीं दी है। हालांकि, जांच से जुड़े सुझावों को सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय के जरिए SIT तक पहुंचाने की अनुमति दी गई है।
मंदिर ट्रस्ट की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस पूरे विवाद ने राम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन की व्यवस्था को भी सवालों के घेरे में ला दिया। शुरुआती जांच में नकदी गिनने वाले कमरे की सुरक्षा, कर्मचारियों की जांच और एसओपी के पालन जैसी व्यवस्थाओं पर सवाल उठे।
ट्रस्ट ने शुरुआत से ही यह कहा कि भगवान राम को चढ़ाई गई मूल्यवान वस्तुएं सुरक्षित हैं और उनका हिसाब मौजूद है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अफवाहों से बचने की अपील भी की और कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में नकदी के अलावा दान में मिलने वाले आभूषण और दूसरी मूल्यवान वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे थे। जांच के दायरे में इसी वजह से सिर्फ नकदी नहीं, बल्कि पूरी दान प्रबंधन व्यवस्था को शामिल किया गया।
राम मंदिर ट्रस्ट को अब तक कितना दान प्राप्त हुआ?
राम मंदिर में आने वाले दान का आकार इस मामले की गंभीरता समझने के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच ट्रस्ट को करीब 82.78 करोड़ रुपये का दान मिला था। यह आंकड़ा ट्रस्ट की कार्यकारी समिति के सामने 21 मार्च को हुई बैठक में रखा गया था।
इतनी बड़ी मात्रा में आने वाले दान के कारण नकदी की गिनती, रिकॉर्ड रखने और बैंक में जमा करने की व्यवस्था का मजबूत और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि इस मामले में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियों ने पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की।
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