बेंगलुरु के लग्जरी होटलों की रसोई में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई कार्रवाई ने चौंकाया है। अधिकारियों को एक्सपायर्ड दूध, बड़ी मात्रा में मांस और फंगस लगी सब्जियों समेत कई खामियां मिलीं।
बेंगलुरु: बाहर से चमचमाते होटल, आलीशान लॉबी, महंगे रेस्तरां और बेहतरीन खाने का दावा… लेकिन बेंगलुरु के कुछ नामी स्टार होटलों की रसोई में जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम पहुंची तो तस्वीर कुछ और ही सामने आई। कहीं एक्सपायर्ड दूध मिला, कहीं मांस और मछली के स्टॉक पर सवाल उठे, तो कहीं सब्जियों में फंगस दिखाई दी। कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की लेबलिंग और स्टोरेज को लेकर भी गंभीर कमियां पाई गईं।
कर्नाटक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से शुक्रवार, 7 अगस्त को बेंगलुरु में चलाए गए विशेष खाद्य सुरक्षा निरीक्षण अभियान में 26 तीन सितारा और पांच सितारा होटलों की जांच की गई। इसके लिए 30 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम बनाई गई थीं। अधिकारियों ने 35 खाद्य नमूने एकत्र किए, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही कई जगहों से एक्सपायर्ड और असुरक्षित पाए गए खाद्य पदार्थों को जब्त कर नष्ट किया गया।
इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब महंगे और प्रतिष्ठित होटलों की रसोई में ही खाद्य सुरक्षा के नियमों की अनदेखी हो सकती है, तो ग्राहकों को परोसे जाने वाले खाने की निगरानी आखिर कितनी मजबूत है?
शिकायतों के बाद शुरू किया गया विशेष अभियान
यह कार्रवाई अचानक सामने आई कोई एकल घटना नहीं थी। कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को लगातार खाद्य गुणवत्ता, साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें मिल रही थीं। इनमें सोशल मीडिया पर सामने आने वाली शिकायतें भी शामिल थीं। इन्हीं चिंताओं के बीच स्वास्थ्य मंत्री यू. टी. खादर के निर्देश पर विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया गया।
अभियान का उद्देश्य यह जांचना था कि बेंगलुरु के बड़े होटल खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उससे जुड़े नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। अधिकारियों ने केवल खाने की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि किचन की साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों का भंडारण, लेबलिंग और शाकाहारी तथा मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग रखने जैसी व्यवस्थाओं की भी जांच की।
स्वास्थ्य मंत्री यू. टी. खादर ने इस कार्रवाई के संदर्भ में यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि वे जो खाना खा रहे हैं, उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री कहां से आ रही है और कितनी ताजा है। उन्होंने खाद्य सामग्री की ताजगी और उसके स्टोरेज को लेकर सवाल उठाए।
26 होटलों से लिए गए 35 सैंपल
अधिकारियों के मुताबिक, अभियान के दौरान बेंगलुरु के 26 तीन सितारा और पांच सितारा होटलों का निरीक्षण किया गया। कुल 30 टीमें इस कार्रवाई में शामिल थीं। जांच के दौरान चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, मसाले और दूध समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए।
इन 35 नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है। इसलिए किसी खाद्य पदार्थ को अंतिम रूप से असुरक्षित घोषित करने का फैसला लैब रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाएगा। फिलहाल अधिकारियों ने जिन चीजों को मौके पर नियमों के खिलाफ पाया, उनके संबंध में नोटिस और आगे की कार्रवाई शुरू की है।
किस होटल में पाई गई गड़बडी?
निरीक्षण के दौरान कई प्रमुख होटलों में खाद्य पदार्थ जब्त किए गए। उपलब्ध अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक:
- द ललित अशोक, एनेक्स साउथ: 76 किलोग्राम मांस, 200 किलोग्राम सब्जियां और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध मिला।
- शांगरी-ला बेंगलुरु: 15 किलोग्राम मांस जब्त हुआ।
- फोर सीजन्स होटल: 19 किलोग्राम मांस मिला।
- विवांता बेंगलुरु, व्हाइटफील्ड: 3 किलोग्राम एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए।
- ताज यशवंतपुर: 72 किलोग्राम मांस और मछली जब्त की गई।
- रेडिसन ब्लू एट्रिया: 50 किलोग्राम चिकन, 25 किलोग्राम मांस, 23 किलोग्राम मछली और 7 किलोग्राम सब्जियां जब्त हुईं।
इन आंकड़ों से साफ है कि समस्या केवल एक होटल या एक तरह के खाद्य पदार्थ तक सीमित नहीं थी। अलग-अलग होटलों में मांस, मछली, दूध, सब्जियां और बेकरी उत्पादों से जुड़ी कमियां सामने आईं।
एक्सपायर्ड दूध से लेकर फंगस लगी सब्जियों तक
जांच के दौरान अधिकारियों ने कई तरह के खाद्य सुरक्षा उल्लंघन दर्ज किए। इनमें एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों का स्टोरेज, खाद्य सामग्री की गलत लेबलिंग, मिसब्रांडिंग, अस्वच्छ किचन और स्टोरेज एरिया, अनुचित तरीके से खाद्य पदार्थों को संभालना और सब्जियों में फंगस जैसी कमियां शामिल थीं।
अधिकारियों ने यह भी पाया कि कुछ जगहों पर शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के लिए अलग-अलग स्टोरेज की व्यवस्था नियमों के अनुरूप नहीं थी। होटल किचन में अलग-अलग तरह की खाद्य सामग्री रखने का तरीका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि गलत तरीके से स्टोरेज करने पर एक खाद्य पदार्थ से दूसरे में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा कुछ मांस उत्पादों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुरूप लेबलिंग नहीं मिली। लेबलिंग में गड़बड़ी केवल कागजी कमी नहीं है। इससे उपभोक्ता को खाद्य पदार्थ की पहचान, उसकी वैधता और अन्य जरूरी जानकारी हासिल करने में परेशानी हो सकती है।
सबसे ज्यादा जब्ती कहां से हुई?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जब्त किए गए खाद्य पदार्थों की मात्रा के लिहाज से द ललित अशोक के एनेक्स साउथ और रेडिसन ब्लू एट्रिया में बड़ी मात्रा सामने आई।
द ललित अशोक के एनेक्स साउथ से 200 किलोग्राम सब्जियां, 76 किलोग्राम मांस और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध की जब्ती हुई है। वहीं रेडिसन ब्लू एट्रिया से भारी मात्रा में चिकन, मांस, मछली और सब्जियां जब्त की गई।
क्या सभी होटल दोषी पाए गए?
इस पूरी जांच प्रक्रिया में कुल 26 होटलों का निरीक्षण किया गया, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में जिन प्रतिष्ठानों में विशिष्ट उल्लंघन दर्ज किए गए हैं, कार्रवाई उन्हीं के खिलाफ आगे बढ़ाई जा रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी किए हैं। जहां उल्लंघन पाए गए हैं, वहां खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत अधिनिर्णयन यानी एडजुडिकेशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आगे की कार्रवाई लैब रिपोर्ट और संबंधित उल्लंघन पर लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होगी।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल सभी मामलों में अंतिम दंड या कार्रवाई तय नहीं हुई है। जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस होटल पर किस तरह की कार्रवाई की जाती है।
होटलों की रसोई में सफाई क्यों जरूरी?
होटल और रेस्तरां में रोजाना बड़ी संख्या में लोगों के लिए खाना तैयार होता है। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी खरीद, तापमान नियंत्रण, स्टोरेज, सफाई और इस्तेमाल की समय सीमा का पालन बेहद जरूरी होता है।
अगर एक्सपायर्ड दूध या खराब हो चुकी सब्जियां भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होती हैं, तो खाद्य जनित बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह मांस और मछली जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को सही तापमान पर रखने और उनकी ताजगी की नियमित जांच की जरूरत होती है।
इसी वजह से खाद्य सुरक्षा निरीक्षण केवल ग्राहक की प्लेट तक सीमित नहीं रहता। अधिकारियों को पूरी सप्लाई चेन और किचन प्रक्रिया देखनी पड़ती है। सामान कब आया, कैसे रखा गया, किस तापमान पर स्टोर हुआ और कब तक इस्तेमाल किया जाना था।
होटल उद्योग के लिए बड़ा सवाल
बेंगलुरु में सामने आए ये मामले सिर्फ खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए कार्रवाई का विषय नहीं हैं, बल्कि होटल इंडस्ट्री की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करते हैं।
पांच सितारा होटल अपने ग्राहकों से प्रीमियम कीमत लेते हैं और उनसे साफ-सफाई तथा गुणवत्ता के उच्च मानकों की उम्मीद की जाती है। ऐसे में अगर निरीक्षण के दौरान एक्सपायर्ड दूध, खराब या संदिग्ध मांस, फंगस लगी सब्जियां या गलत लेबलिंग जैसी कमियां सामने आती हैं, तो इससे ग्राहक के भरोसे पर सीधा असर पड़ता है।
खाद्य सुरक्षा का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि खाना स्वादिष्ट है या उसे अच्छी तरह से सजाकर परोसा गया है। असली सवाल यह है कि प्लेट तक पहुंचने से पहले उस खाने की पूरी यात्रा कितनी सुरक्षित रही।
स्वास्थ्य मंत्री ने उठाए खाने की गुणवत्ता पर सवाल
स्वास्थ्य मंत्री यू. टी. खादर ने खाद्य सामग्री की ताजगी और स्रोत को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने यह जानने की जरूरत बताई कि बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले बन्स, चिकन और अन्य सामग्री कहां से आती है, कितने समय तक स्टोर की जाती है और किस तापमान पर रखी जाती है।
उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने खाने को लेकर सही फैसला ले सकें।
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि ग्राहक आमतौर पर किसी महंगे होटल की रसोई में जाकर यह नहीं देख सकता कि उसके भोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री कितनी पुरानी है। उसे होटल की व्यवस्था और नियामकीय निगरानी पर भरोसा करना पड़ता है।
सैंपल जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर
अधिकारियों ने जिन खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं, उनकी प्रयोगशाला जांच की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
जिन होटल संचालकों के यहां उल्लंघन पाए गए हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जा चुके हैं और संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। विभाग ने सभी खाद्य कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
इस कार्रवाई का असर केवल उन होटलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए जहां निरीक्षण हुआ। यह पूरे होटल और रेस्तरां उद्योग के लिए एक चेतावनी है कि खाद्य सुरक्षा में छोटी-सी लापरवाही भी ग्राहकों के स्वास्थ्य और संस्थान की विश्वसनीयता दोनों को प्रभावित कर सकती है।
महंगे होटल, लेकिन खाना असुरक्षित?
बेंगलुरु की यह कार्रवाई एक असहज लेकिन जरूरी सवाल सामने रखती है। क्या महंगे होटल का मतलब हमेशा सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाला खाना भी है?
जांच में सामने आई कमियां बताती हैं कि होटल की चमक-दमक और किचन के भीतर की व्यवस्था दो अलग चीजें हो सकती हैं। ग्राहक को जो प्लेट दिखाई देती है, उसके पीछे एक लंबी प्रक्रिया होती है और उस प्रक्रिया के हर चरण में खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है।
फिलहाल 35 खाद्य नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार है। उसी के बाद यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि जब्त किए गए खाद्य पदार्थों में से कौन-से वास्तव में खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते थे और संबंधित होटलों पर कितनी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन शुरुआती निरीक्षण ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि फाइव-स्टार होटल का टैग अपने आप खाद्य सुरक्षा की गारंटी नहीं है। असली भरोसा साफ-सुथरी रसोई, ताजा सामग्री, सही स्टोरेज, पारदर्शी लेबलिंग और नियमों के सख्त पालन से ही बनता है।
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