Friday, 02 October 2026
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दिल्ली में एंट्री महंगी: कॉमर्शियल वाहनों पर बढ़ा पर्यावरण शुल्क, हर साल 5% की तय बढ़ोतरी

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

राजधानी की हवा को साफ करने की कोशिशों के बीच अब दिल्ली में प्रवेश करने वाले कॉमर्शियल वाहनों पर जेब का बोझ और बढ़ने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मुआवज़ा शुल्क (ECC) में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि यह शुल्क हर साल अपने आप 5% बढ़ेगा, जिससे प्रदूषण पर लगाम लगाने का दबाव लगातार बना रहे।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 12/03/2026 को पारित किया था। जिसका विस्तृत आदेश हाल ही में सार्वजनिक हुआ। कोर्ट ने Commission for Air Quality Management (CAQM) की सिफारिशों को “उचित और संतुलित” मानते हुए 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू करने की मंजूरी दे दी।

क्यों बढ़ाया गया ECC?

दिल्ली लंबे समय से प्रदूषण की मार झेल रही है, खासकर सर्दियों में हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं। ऐसे में बाहरी राज्यों से आने वाले भारी और डीज़ल चालित वाहनों को प्रमुख कारणों में गिना जाता है। इसी को देखते हुए कोर्ट ने यह साफ संकेत दिया है कि गैर-जरूरी कॉमर्शियल वाहनों को दिल्ली में प्रवेश से बचना चाहिए।

कोर्ट की मंशा साफ है—या तो आप वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें या ज्यादा शुल्क चुकाने के लिए तैयार रहें। खास तौर पर National Highways Authority of India द्वारा विकसित पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया गया है, ताकि राजधानी के भीतर ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों कम हो सकें।

हर साल बढ़ेगा शुल्क

इस फैसले का सबसे अहम हिस्सा है ECC में हर साल 5% की अनिवार्य बढ़ोतरी। यानी जो दरें अभी तय हुई हैं, वे स्थायी नहीं हैं—हर 1 अप्रैल को इनमें बढ़ोतरी हो जाएगी। इसे महंगाई, ईंधन की लागत और टोल दरों में वृद्धि से जोड़कर देखा जा रहा है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह बढ़ोतरी केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक “निवारक उपाय” के तौर पर जरूरी है। बढ़ती लागत अपने आप वाहनों के प्रवेश को सीमित करेगी।

पुराने केस से जुड़ा है मामला

दिल्ली में प्रदूषण को लेकर यह पूरा मामला नया नहीं है। इसकी जड़ें 1985 में दाखिल हुए M.C. Mehta vs Union of India केस तक जाती हैं। इस ऐतिहासिक मामले के जरिए सुप्रीम कोर्ट लगातार राजधानी में प्रदूषण से निपटने के उपायों की निगरानी करता रहा है।

इसी कड़ी में ECC लागू किया गया, भारी वाहनों को शहर के बाहर से डायवर्ट करने की योजना बनी और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश की गई।

एजेंसियों को सख्त निर्देश

कोर्ट ने साफ किया है कि केवल शुल्क बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। Municipal Corporation of Delhi, CAQM और NHAI जैसी एजेंसियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमों का सख्ती से पालन हो।

इसका मतलब है कि दिल्ली की सीमाओं पर निगरानी बढ़ेगी, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

आम लोगों पर क्या असर?

सीधे तौर पर यह फैसला ट्रांसपोर्ट सेक्टर को प्रभावित करेगा, लेकिन इसका असर आम लोगों तक भी पहुंचेगा। ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने से सामान की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार और कोर्ट का मानना है कि साफ हवा की कीमत इससे कहीं ज्यादा अहम है। दिल्ली में रहने वालों के लिए यह फैसला राहत की उम्मीद लेकर आया है, लेकिन ट्रांसपोर्टर्स के लिए यह एक नई चुनौती बन सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कदम वाकई राजधानी की हवा को कितना साफ कर पाता है।

Cause Title: M.C. MEHTA VERSUS UNION OF INDIA & ORS., Writ Petition(s)(Civil) No(s).13029/1985

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IK

Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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