Monday, 17 August 2026
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AWHO की जमीन के उपयोग न होने और नई हाउसिंग योजनाओं की कमी से सैन्य समुदाय में बढ़ी चिंता

Army Welfare Housing Organisation (AWHO), जो “नो प्रॉफिट नो लॉस” के सिद्धांत पर स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्था है, लंबे समय से सेवारत एवं सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के आवासीय सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। इस संस्था द्वारा देशभर में सैन्य परिवारों को किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना एक सराहनीय उपलब्धि रही है।

हालांकि, हाल के घटनाक्रमों ने सैन्य समुदाय के बीच गंभीर चिंता और असंतोष को जन्म दिया है। यह देखा जा रहा है कि वर्तमान समय में AWHO द्वारा कोई नई आवासीय योजनाएँ प्रारंभ नहीं की जा रही हैं। ऐसे समय में, जब महानगरों में रियल एस्टेट की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और प्रतिस्पर्धा तीव्र होती जा रही है, सैन्य कर्मियों के लिए स्वयं का घर खरीदना अत्यंत कठिन होता जा रहा है।

स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब यह जानकारी सामने आती है कि जयपुर में AWHO द्वारा पूर्व में खरीदी गई एक बड़ी भूमि का उपयोग आवास निर्माण के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसे पुनः उसी पक्ष को बेचने पर विचार किया जा रहा है। इसी प्रकार, कोलकाता में भी ऐसी ही प्रक्रिया अपनाए जाने की सूचना है, जहां जमीन को उसी विक्रेता को वापस बेचा जा रहा है जिससे उसे खरीदा गया था। इस प्रकार की संभावित कार्यवाही सैन्य समुदाय में निराशा एवं अविश्वास की भावना को बढ़ा रही है।

डिफेंस फोर्सेज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के प्रवक्ता श्री मोहन सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि यदि इन जमीनों का उपयोग प्लॉटिंग और आवास निर्माण के लिए किया जाता, तो हजारों पूर्व सैनिक आवेदन करते। उन्होंने इसे सैन्य कल्याण की भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि इस प्रकार की बिक्री से AWHO अपने मूल उद्देश्य से भटकती हुई प्रतीत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों में कोई भी नई परियोजना धरातल पर नहीं आई है, जबकि इसी अवधि में लगभग तीन लाख सैनिक सेवानिवृत्त हुए हैं, जिनमें से लगभग एक लाख को शहरी क्षेत्रों में आवास की आवश्यकता है।

प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित भूमि पर किया गया डिमांड सर्वे वास्तविकता से परे प्रतीत होता है और इसकी पुनः समीक्षा अत्यंत आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष एवं पारदर्शी सर्वे कराया जाए, तो संभावित आवेदनों की संख्या वर्तमान अनुमान से कई गुना अधिक हो सकती है।

सैन्य परिवारों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए यह मांग की जाती है कि संबंधित भूमि की पुनर्विक्रय प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही, जयपुर में आवास प्राप्त करने के इच्छुक सैन्य कर्मियों की वास्तविक मांग का आकलन करने हेतु एक व्यापक एवं पारदर्शी डिमांड सर्वे कराया जाए। इस सर्वे के आधार पर ही भविष्य की योजनाओं एवं निर्णयों को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

सैन्य समुदाय को विश्वास है कि संबंधित प्राधिकरण इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए आवश्यक कदम उठाएंगे और AWHO के मूल उद्देश्य—देश की सेवा में समर्पित सैनिकों को सुलभ एवं किफायती आवास उपलब्ध कराना—को पुनः सुदृढ़ करेंगे।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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