Sunday, 25 October 2026
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विश्व शांति के लिए भारत की भूमिका अहम: वैश्विक शांति शिखर सम्मेलन में दुनिया में हो रहे युद्धों को समाप्त करने का आह्वान, प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों और नेताओं को डॉ. के. ए. पॉल ने किया आमंत्रित

वैश्विक शांति पहलों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया

सभी दलों के राजनीतिक नेताओं ने वैश्विक संघर्षों के बीच शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर डाला प्रकाश

नई दिल्ली।

दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित एक ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में भारत के प्रमुख दलों के राजनीतिक नेताओं ने वैश्विक शांति के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। इस सम्मेलन का आयोजन वैश्विक शांति राजदूत डॉ. के. ए. पॉल द्वारा किया गया था, जिसमें उन्होंने युद्धों को समाप्त करने और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने का आह्वान किया। डॉ. पॉल ने वैश्विक शांति पहलों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और कहा कि भारत इन प्रयासों में अग्रणी रहा है।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में भाजपा के वरिष्ठ नेता सांसद पुरुषोत्तम रूपाला, राज्यसभा सांसद संतोष (सीपीआई), डॉ. पीपी सुनीर (सीपीआई), गायत्री रवि चंद्रा (बीआरएस), डॉ. वी. शिवदास (सीपीएम) और डॉ. फौबिया खान (एनसीपी) के साथ-साथ शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एंड्रयू जे. सिंगकोन, डीएमके फ्लोर लीडर डॉ. शिवा, कांग्रेस सांसद बलराम नाइक और डॉ. मल्लू रवि और भाजपा सांसद रमेश अवस्थी की उपस्थिति रही। सभी ने वैश्विक संघर्षों के बीच शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।

डॉ. के.ए. पॉल ने शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए इस बात पर जोर दिया, “युद्ध इसका जवाब नहीं है। अब समय आ गया है कि भारत उदाहरण पेश करे और वैश्विक मंच पर शांति के लिए काम करे। हमारे देश के पास युद्धरत गुटों को बातचीत की मेज पर लाने और समझ के एक नए युग को बढ़ावा देने का नैतिक अधिकार और जिम्मेदारी है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “अनेक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, भारत लोकतंत्र और शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहा है। यह शिखर सम्मेलन हमारे सामूहिक विश्वास को रेखांकित करता है कि शांति का मतलब केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण है।”

शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एंड्रयू जे. सिंगकोन ने आधुनिक युद्ध के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा, “16वीं शताब्दी में 59 से अधिक युद्ध हुए, लेकिन आज के संघर्ष अधिक घातक हैं, जो अक्सर सबसे असहाय लोगों – हमारे बच्चों को निशाना बनाते हैं। यह जरूरी है कि हम उन्हें युद्ध की भयावहता से बचाने के लिए मिलकर काम करें।”

बीआरएस से राज्यसभा सांसद गायत्री रविचंद्र ने सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “भारत को इस तरह की पहल में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, शांति के लिए वैश्विक राजदूत बनना चाहिए। हमारी आवाज सीमाओं के पार गूंजनी चाहिए, एक ऐसी दुनिया की वकालत करनी चाहिए जहां संघर्ष पर कूटनीति और संवाद हावी हो।”

शिखर सम्मेलन में विभिन्न राजनीतिक पृष्ठभूमियों से 12 सांसदों ने भाग लिया, सभी एक ही लक्ष्य से एकजुट थे – शांति को बढ़ावा देना और संघर्ष से त्रस्त दुनिया में भारत को आशा की किरण के रूप में स्थापित करना। सम्मेलन में चर्चाएँ यूक्रेन-रूस युद्ध, इज़राइल-फिलिस्तीनी संघर्ष, ईरान-इराक संघर्ष और बांग्लादेश और श्रीलंका में क्षेत्रीय तनाव सहित चल रहे वैश्विक मुद्दों पर केंद्रित थीं।

इस कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. पॉल ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक शांति के लिए भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया को एकजुट करने की शक्ति है और यह शांति के प्रयासों में अग्रणी बन सकता है। उन्होंने इस दिशा में सभी राजनीतिक दलों से सहयोग और समर्थन की अपील की। इस शिखर सम्मेलन ने न केवल शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि कैसे एकजुट होकर हम एक शांतिपूर्ण और स्थिर दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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