Tuesday, 23 June 2026
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आंध्र प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री पवन कल्याण पर गंभीर आरोप, डॉ. के. ए. पॉल ने दर्ज कराई पुलिस में शिकायत

हैदराबाद, (न्यूज ऑफ द डे)

विश्व शांति राजदूत और मानवतावादी डॉ. के. ए. पॉल ने आंध्र प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री पवन कल्याण के खिलाफ पंजीगुट्टा पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में पवन कल्याण पर साम्प्रदायिक वैमनस्य, गलत सूचनाएं फैलाने और धार्मिक भावनाओं का अपमान करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

डॉ. पॉल, जिन्होंने अपने जीवन को शांति और सद्भावना के प्रसार के लिए समर्पित किया है, का कहना है कि पवन कल्याण की विभाजनकारी बयानबाजी और झूठी सूचनाएं देश की सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष एकता के लिए खतरा बन रही हैं। उनकी शिकायत में भारतीय कानून की कई धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है, जिनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS),भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम शामिल हैं।

शिकायत के प्रमुख बिंदु

  1. तिरुपति लड्डू पर झूठे आरोप: पवन कल्याण ने आरोप लगाया था कि तिरुपति के एक लाख लड्डुओं में गोमांस और मछली के तेल का प्रयोग हुआ है, जिसे अयोध्या के राम जन्मभूमि भेजा गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को गलत साबित किया था। इन झूठे दावों का उद्देश्य धार्मिक असंतोष फैलाना और लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना था।
  2. सनातन धर्म का अपमान: अपने एक बयान में पवन कल्याण ने कहा था कि उनके पिता भगवान के दिए से सिगरेट जलाते थे। यह टिप्पणी हिंदू धर्म और सनातन परंपरा का अपमान है और इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
  3. स्वामी विवेकानंद पर गलत बयानी: पवन कल्याण ने झूठा दावा किया कि स्वामी विवेकानंद ने गोमांस खाने का समर्थन किया था। जबकि वास्तविकता यह है कि स्वामी विवेकानंद ने केवल शारीरिक मजबूती के लिए मांसाहार की बात की थी, न कि विशेष रूप से गोमांस की।

4.धार्मिक परंपराओं का अनादर: पवन कल्याण को एक मुस्लिम टोपी पहनते, एक मुस्लिम महिला के चरणों में बैठते और बिरयानी खाते हुए देखा गया। इसके साथ ही उन्होंने गोमांस खाने का समर्थन भी किया। उनके ये कृत्य सांप्रदायिक असंतोष पैदा करने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं।

  1. हिंदू नेताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी: पवन कल्याण ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि केवल हिंदू नेता साम्प्रदायिक दंगे भड़काते हैं। उनका यह बयान समाज में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने और हिंदू समुदाय में वैमनस्य पैदा करने के लिए था।

कानूनी आरोप

शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे कि BNS 192, 353, 240, 298, 299, 352, 351 (2), 351 (3), 302, 356, 356 (1), 61(2), 45 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। डॉ. पॉल का कहना है कि पवन कल्याण के सार्वजनिक बयान और कृत्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए थे और समाज में सांप्रदायिक असंतोष को बढ़ावा देने के लिए किए गए थे।

कार्रवाई की मांग

डॉ. पॉल ने अपनी शिकायत में पवन कल्याण के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि पवन कल्याण को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत उनके पद से हटा दिया जाए, जो सांप्रदायिकता और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नेताओं के लिए निष्कासन का प्रावधान करता है।

डॉ. पॉल ने कहा, “पवन कल्याण की विभाजनकारी बयानबाजी और झूठी सूचनाएं समाज में शांति और एकता के लिए गंभीर खतरा हैं। यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई तो मैं सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रपति से न्याय की मांग करने के लिए मजबूर हो जाऊंगा।” डॉ. पॉल ने इस मुद्दे पर सरकार, न्यायपालिका और पुलिस से तेजी से और निर्णायक कदम उठाने की अपील की है ताकि देश की अखंडता और सामाजिक शांति बनाए रखी जा सके।

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Aniket

लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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