Saturday, 31 October 2026
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अंतरिक्ष में सुपर पॉवर बनेगा भारत, 2030 तक स्पेस स्टेशन लॉन्च करने का इसरो का लक्ष्य

नई दिल्ली।

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद से ही इसरो (ISRO)ने अपने नए मिशन पर काम करना शुरू कर दिया है। इसरो जल्द ही अंतरिक्ष में नया कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसरो खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा देश होगा जो स्पेस स्टेशन बनाएगा। भारत का स्पेस स्टेशन अमेरिका और चीन के स्पेस स्टेशन के मुकाबले बहुत खास होगा।

स्पेस स्टेशन क्या होता है?

स्पेस स्टेशन एक उपकरण होता है जिसको अंतरिक्ष में स्थापित किया जाता है। स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी लगातार करता है। अंतरिक्ष में जाने वाले यात्री स्पेस स्टेशन पर रहकर तरह-तरह के रिसर्च करते हैं। स्पेस स्टेशन धरती के ऑर्बिट में चक्कर लगता रहता है। एक एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में आमतौर पर 6 माह के लिए रहते हैं। स्पेस स्टेशन पर एक समय में 6 से 7 एस्ट्रोनॉट्स रहते हैं। उनके वापस आने के बाद एस्ट्रोनॉट्स के दूसरे दल को भेजा जाता है। बता दें कि इंटरनेशनल स्पेस सेंटर को 15 देशों ने साथ मिलकर बनाया था।

कैसा होगा भारत का स्पेस स्टेशन?

इसरो ने बताया है कि भारत का स्पेस स्टेशन 20 टन का होगा। वहीं इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का वजन 450 टन से अधिक है। वहीं चीनी स्पेस स्टेशन का वजन 80 टन है। इसरो ने बताया कि भारतीय स्पेस सेंटर में एक साथ 4 से 5 एस्ट्रोनॉट्स रह सकेंगे। भारतीय स्पेस स्टेशन को पृथ्वी के सबसे निचली ऑर्बिट में रखा जाएगा। इस ऑर्बिट को LEO कहते हैं जो तकरीबन 400 किमी दूर स्थित है।

साल 2019 में इसरो के तत्कालीन प्रमुख के. सिवन ने मीडिया को बताया था कि इसरो गगनयान मिशन के बाद 2030 तक अपना स्पेस सेंटर लॉन्च करेगा। बता दें कि गगनयान मिशन को इसके पहले चरण के रूप में देख रहा है। बता दें कि इसरो अगले साल अपना पहला मानव रहित गगनयान मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है। गगनयान को पृथ्वी के लोअर ऑर्बिट में भेजा जाएगा। जहां पर गगनयान मिशन को भेजा जाएगा वहीं पर इसरो अपना स्पेस सेंटर स्थापित करेगा। हाल ही में भारत सरकार ने इसरो की इस परियोजना के लिए फंड जारी किया है।

जी-20 समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका अंतरिक्ष में भी साझेदारी करेंगे और स्पेस मिशन में एक दूसरे का परस्पर मदद करते रहेंगे। इसरो ने बताया कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को प्रशिक्षण देगा। इसके लिए नासा और इसरो के बीच में समझौता भी हो चुका है। गगनयान मिशन में अंतरिक्ष में जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को भी ह्यूस्टन में स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर में ट्रेनिंग दी जाएगी।

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Aniket

लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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