Saturday, 24 October 2026
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मार्शल आर्ट्स के एक रूप थांग-टा की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सिल्वर जीतने वाले शिवांग को बिहार सरकार ने किया सम्मानित

मरांची, पटना (बिहार)।

बिहार के छोटे से गांव मरांची (पटना) के शिवांग कृष्णम ने अपनी मेहनत और समर्पण से राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन किया है। उन्होंने 29वीं राष्ट्रीय थांग-टा चैंपियनशिप में रजत(सिल्वर) पदक जीतकर न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ाया है। उन्हें बिहार सरकार द्वारा ‘बिहार राज्य खेल सम्मान’ से पटना के ज्ञान भवन में सम्मानित किया गया। खेल विभाग द्वारा आयोजित इस समारोह में उन्हें स्मृति चिन्ह और ₹1.5 लाख का चेक प्रदान किया गया। यह सम्मान खेल डीजी रविंद्रन शंकरण, प्रो. श्रीजेश (पेरिस ओलंपिक हॉकी खिलाड़ी और कांस्य पदक विजेता) और बिहार के खेल मंत्री ने संयुक्त रूप से दिया।

शिवांग की यह सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत मेहनत की कहानी नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता और कोच की कड़ी मेहनत और त्याग का भी प्रतीक है। बिहार के एक छोटे गांव से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर उनकी दृढ़ता और अटूट समर्पण का साक्षी है।

थांग-टा एक पारंपरिक मार्शल आर्ट है जिसमें हथियारबंद और बिना हथियार के लड़ाई की तकनीकें सिखाई जाती हैं। यह खेल शक्ति, गति और अनुशासन का प्रतीक है, जो शिवांग के जीवन में हमेशा से मौजूद रहे हैं। इसी कला में निपुणता हासिल कर शिवांग राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल प्राप्त करने में सफल हुए।

शिवांग के खेल के प्रति इस जुनून को उनके परिवार ने हमेशा बढ़ावा दिया। उनके पिता, जो एक साधारण किसान हैं और उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की काबिलियत पर हमेशा विश्वास किया, ने अपनी सीमित साधनों के बावजूद उन्हें हरसंभव समर्थन दिया। इस बारे में शिवांग ने कहा, “मेरे माता-पिता का विश्वास ही मेरी सफलता का आधार है। उनके त्याग और मां की निरंतर प्रोत्साहना ने मुझे मेरा सपना पूरा करने की ताकत दी।”

शिवांग के लिए उनके नाना, जो पटना के बाढ़ से ताल्लुक रखते थे और राज्य स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी थे, एक बड़ा प्रेरणास्रोत रहे। उनके नाना ने कभी दिग्गज शटलर सैयद मोदी के खिलाफ भी खेला था। शिवांग ने अपने नाना और दादा से गहरा लगाव महसूस किया और उन दोनो की मृत्यु दो साल पहले हो गई। शिवांग ने कहा, “मेरे नाना और बाबा मेरे हीरो थे। खेल के प्रति नाना का जुनून ही मेरे जीवन में खेल की शुरुआत का कारण बना। मैंने उनके मैचों की कहानियां सुनते हुए खेल के प्रति अपने सपने को साकार किया। आज का यह सम्मान मैं उन्हें समर्पित करता हूं।”

शिवांग के कोच ने उनके जीवन में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “मेरे कोच मेरे मार्गदर्शक और मेरे लिए पिता समान हैं। उनके धैर्य, अनुशासन और अटूट समर्थन ने मुझे अपनी सीमाओं से परे जाने की प्रेरणा दी।”

शिवांग का सपना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का है। अपने परिवार के समर्थन, कोच के मार्गदर्शन और अपने नाना के आशीर्वाद से वह इस सफर को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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