होमक्राइमओवर स्पीडिंग के चालान से पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा शराब तस्कर

ओवर स्पीडिंग के चालान से पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा शराब तस्कर

नई दिल्ली।

दक्षिण जिले का वाहन चोरी निरोधक दस्ता (एएटीएस) मात्र ओवर स्पीडिंग चालान से शराब तस्कर तक पहुंच गया और आरोपी अभिमन्यु को शराब की तस्करी करते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। इससे पहले पुलिस ने स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (एएनपीआर) से आरोपी के शराब तस्करी में इस्तेमाल किए जाने वाले टैंपो की पहचान की और उसकी सारी डिटेल निकाली।

आरोपी कई राज्यों में शराब की तस्करी कर रहा था। आरोपी यूपी के जिला अंबेडकर नगर के डाकघर बंधन के ग्राम खड़गपुर स्थित अकबरपुरा मथुरा रोड का निवासी है। दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अंकित चौधरी ने बताया कि एएटीएस प्रभारी उमेश यादव की टीम को सीमावर्ती क्षेत्रों से शराब की आपूर्ति पर अंकुश लगाने और दक्षिण जिला क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का जिम्मा सौंपा गया था।

इंस्पेक्टर उमेश यादव के नेतृत्व में एसआई दीपक महला व अन्य की टीम ने एएनपीआर सिस्टम से ऐसे वाहनों की पहचान करना शुरू किया, जिनमें पड़ोसी राज्यों से अवैध शराब दिल्ली में लाई जा रही है। इसमें अभिमन्यु के टैंपो की देर रात व सुबह के समय बांध रोड, संगम विहार समेत दिल्ली की अन्य सीमाओं से आवाजाही मिली। इस सिस्टम से पुलिस को टैंपो का नंबर मिल गया। पुलिस का कहना है कि रजिस्ट्रेशन नंबर से इसके मालिक तक पहुंचती, लेकिन पुलिस को अवैध शराब का सबूत नहीं मिलता। ऐसे में पुलिस ने इसके हुए ट्रैफिक चालान की डिटेल खंगालना शुरू किया। पुलिस को पता लगा कि इस टैंपो का फरवरी में वसंत कुंज में ओवर स्पीडिंग का चालान हुआ था।

इसके बाद पुलिस को इसी टैंपो के जनवरी में भी जमा किए हुए चालान मिल गए। चालान से पुलिस को टैंपो के वर्तमान चालक व अवैध शराब तस्कर अभिमन्यु का मोबाइल नंबर मिल गया। इसके बाद पुलिस टीम ने मोबाइल सर्विलांस के आधार पर आरोपी अभिमन्यु को रिंग रोड से 27 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया। टैंपो की जांच करने पर 135 कार्टन में 6750 क्वार्टर और 15 कार्टन में शराब की 180 बोतलें बरामद की गईं।

क्या है एएनपीआर सिस्टम

दिल्ली पुलिस ने सभी जिलों में स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (एएनपीआर) कैमरे लगाए हैं। पूरे दक्षिण जिले में कुल 35 कैमरे लगे हुए हैं। ये कैमरे हर गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेते हैं। इसके बाद ये एक डाटा बेस बनाते हैं। इस डाटा बेस से पुलिस को पता चल जाता है कि कौनसी गाड़ी कितनी बार कहां से गई है। इसके अलावा इन कैमरों में जिपनेट के जरिये चोरी के वाहनों का डाटा फीड होता है। जैसे ही चोरी का वाहन इन कैमरों की जद से निकलता है तो ये पुलिस को उस वाहन की लोकेशन के बारे में अलर्ट भेज देता हैं।

दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ट्रैफिक चालान जमा होता है तो उसमें जमा कराने वाले का मोबाइल नंबर लिखा जाता है। जब पुलिस ने हाल ही में जमा चालान की डिटेल खंगाली तो आरोपी अभिमन्यु का मोबाइल नंबर मिल गया। अभिमन्यु के खिलाफ पहले से एक्साइज एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। ये दोनों ही मामले दिल्ली में दर्ज हैं। पुलिस आरोपी के यूपी रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। ये कई वर्षों से अवैध शराब की तस्करी कर रहा था।

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