FY25 खत्म होने के करीब 16 महीने बाद PM CARES Fund का ऑडिट स्टेटमेंट सामने आया। इसमें ₹8,452 करोड़ का कॉर्पस और सिर्फ ₹87.85 लाख का खर्च दर्ज है।
नई दिल्ली: कोरोना महामारी के दौरान आपात स्थितियों में राहत और सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए PM CARES Fund को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जारी ऑडिट स्टेटमेंट में सामने आया है कि 31 मार्च 2025 तक फंड का कुल कॉर्पस बढ़कर ₹8,452.06 करोड़ हो गया था। इसमें से करीब ₹7,846.65 करोड़ यानी लगभग 93 फीसदी रकम फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखी गई थी, जबकि करीब ₹605.41 करोड़ सेविंग बैंक खातों में थे।
सबसे ज्यादा चर्चा जिस आंकड़े ने खींची है, वह फंड का खर्च है। ऑडिट स्टेटमेंट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में PM CARES से कुल ₹87.85 लाख का भुगतान हुआ। इसमें करीब ₹87.84 लाख PM CARES for Children Scheme के तहत खर्च किए गए, जबकि बाकी रकम बैंक और SMS चार्ज के रूप में दर्ज है। यानी ₹8,452 करोड़ के कुल क्लोजिंग बैलेंस की तुलना में सालभर का खर्च लगभग 0.01 फीसदी रहा।
इन्हीं आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश के अलग-अलग हिस्से प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं और लोगों को राहत व पुनर्वास की जरूरत है, तब फंड की इतनी बड़ी रकम इस्तेमाल नहीं की जा रही है।
31 मार्च 2025 तक का रिकॉर्ड
ऑडिट स्टेटमेंट के मुताबिक, PM CARES Fund ने वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत करीब ₹7,173 करोड़ के बैलेंस के साथ की थी। 31 मार्च 2024 तक इसमें लगभग ₹6,641.56 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में और ₹531.46 करोड़ सेविंग बैंक खातों में थे।
एक साल के भीतर फंड का कुल कॉर्पस बढ़कर ₹8,452.06 करोड़ हो गया। इसमें ₹7,846.65 करोड़ FD में और ₹605.41 करोड़ सेविंग बैंक खातों में थे। इस तरह कुल रकम का लगभग 93 फीसदी हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया था।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि FD में रखा पैसा पूरी तरह निष्क्रिय नहीं था। इससे फंड को ब्याज के रूप में बड़ी आय हुई। FY25 में फिक्स्ड डिपॉजिट से करीब ₹469.37 करोड़ ब्याज मिला, जबकि सेविंग बैंक खातों से लगभग ₹5.77 करोड़ ब्याज आया। यानी कुल ब्याज आय करीब ₹475 करोड़ रही।
दूसरे शब्दों में, वित्त वर्ष के दौरान फंड को जितना नया घरेलू दान मिला, उसके लगभग बराबर रकम सिर्फ जमा पर मिले ब्याज से आई।
दान में भी आई बड़ी गिरावट
ऑडिट आंकड़े केवल खर्च ही नहीं, बल्कि PM CARES को मिलने वाले नए दान में आई गिरावट की तस्वीर भी दिखाते हैं।
FY 2024-25 में फंड को करीब ₹479.04 करोड़ का घरेलू दान मिला। इसके अलावा करीब ₹92.83 लाख विदेशी योगदान प्राप्त हुआ। यानी घरेलू और विदेशी योगदान मिलाकर नई donations लगभग ₹480 करोड़ के आसपास रहीं।
इससे पिछले वित्त वर्ष यानी 2023-24 में घरेलू दान करीब ₹681.8 करोड़ थीं। इस तरह एक साल में घरेलू योगदान में लगभग 30 फीसदी की गिरावट आई। विदेशी योगदान भी करीब ₹1.13 करोड़ से घटकर ₹92.8 लाख रह गया।
अगर फंड के शुरुआती वर्षों को देखें तो यह गिरावट और स्पष्ट नजर आती है। FY 2020-21 में घरेलू योगदान लगभग ₹7,184 करोड़ तक पहुंच गया था। इसके बाद FY 2021-22 में यह करीब ₹1,896 करोड़ और FY 2022-23 में करीब ₹909 करोड़ रह गया। यानी कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में जिस तेजी से फंड में पैसा आया था, बाद के वर्षों में दान लगातार कम हुए।
₹8,452 करोड़ का कॉर्पस कैसे बना?
इसका एक बड़ा कारण फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज है। FY25 में फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग अकाउंट से कुल करीब ₹475 करोड़ की ब्याज आय हुई। इसके अलावा फंड को Implementing Agencies से वापस मिली रकम भी मिली।
ऑडिट स्टेटमेंट में ₹324.66 करोड़ “रिफंड फ्रॉम इंप्लीमेंटिंग एजेंसीज” के रूप में दर्ज हैं। यह राशि भी विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, क्योंकि उपलब्ध एक-पेज स्टेटमेंट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन एजेंसियों ने पैसा वापस किया, मूल रूप से पैसा किस काम के लिए जारी किया गया था और रकम वापस करने की वजह क्या थी।
₹324 करोड़ के रिफंड पर उठते सवाल
ट्रांसपेरेंसी एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने ऑडिट स्टेटमेंट सामने आने के बाद सवाल उठाया कि implementing agencies से वापस आए ₹324 करोड़ किस काम के लिए जारी किए गए थे और उन्हें वापस क्यों किया गया।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इन रिफंड का संबंध किसी उपकरण या परियोजना से जुड़ी समस्या से था। साथ ही उन्होंने पूछा कि ऑडिट रिपोर्ट के साथ जुड़े संलग्न टिप्पणियाँ (Accompanying Notes) सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए।
ऑडिट स्टेटमेंट में नोट्स 1 से 16 तक के Accompanying Notes का संदर्भ दिया गया है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वेबसाइट पर ये विस्तृत नोट्स अपलोड नहीं किए गए थे। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि केवल प्राप्ति एवं भुगतान खाता (Receipts and Payments Statement) से फंड के वास्तविक इस्तेमाल की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
FY25 में आखिर पैसा कहां खर्च हुआ?
ऑडिट के अनुसार, FY 2024-25 में PM CARES Fund से कुल ₹87.85 लाख का भुगतान हुआ। इसमें लगभग पूरी रकम PM CARES for Children Scheme के लिए गई।
इस योजना का उद्देश्य कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता या अभिभावकों को खोने वाले बच्चों को सहायता प्रदान करना था। इसके अलावा ऑडिट में केवल ₹451 के बैंक और SMS charges दर्ज हैं।
पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह खर्च काफी कम था। FY 2023-24 में फंड से करीब ₹15.6 करोड़ का भुगतान हुआ था, जिसमें PM CARES for Children Scheme पर लगभग ₹15.37 करोड़ खर्च हुए थे। FY25 में यह रकम घटकर ₹87.84 लाख रह गई। यही गिरावट विपक्ष के सवालों की एक बड़ी वजह बनी है।
पवन खेड़ा ने सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसी आंकड़े को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ₹8,452 करोड़ में से सिर्फ 0.01 फीसदी रकम का इस्तेमाल हुआ है, जबकि देश के कई हिस्से प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं और लोगों को राहत तथा पुनर्वास की जरूरत है।
खेड़ा का सवाल मूल रूप से यह है कि अगर PM CARES Fund का उद्देश्य संकट और आपात परिस्थितियों में लोगों की मदद करना है, तो इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि “₹8,452 करोड़ बेकार पड़े हैं जबकि लोग परेशान हैं। पीएम केयर्स? शायद ही।”
यह बयान अब फंड को लेकर जारी राजनीतिक बहस का प्रमुख हिस्सा बन गया है।
सरकार का जवाब
दूसरी तरफ, सरकार का पक्ष यह है कि PM CARES Fund को सामान्य सरकारी बजट या नियमित राहत योजना की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। फंड का उद्देश्य किसी भी बड़ी आपात स्थिति, आपदा या राष्ट्रीय संकट के समय सहायता उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार, बड़ी रकम को सुरक्षित रखना इसलिए जरूरी है ताकि अचानक आने वाली किसी बड़ी आपदा के दौरान पर्याप्त पैसा तुरंत उपलब्ध हो सके। फिक्स्ड डिपॉजिट में रकम रखने से उस पर ब्याज भी मिलता है, जिससे फंड का कॉर्पस समय के साथ बढ़ता रहता है।
कब और क्यों बना PM CARES Fund?
PM CARES का पूरा नाम Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund है। इसे मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान बनाया गया था।
आधिकारिक उद्देश्य किसी भी तरह की आपात या संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों को राहत देना है। इसके दायरे में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति, प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा, स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना, रिसर्च और प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता जैसे उद्देश्य शामिल हैं।
कोविड के शुरुआती महीनों में इस फंड में बड़े पैमाने पर दान आई थीं। लोगों, कंपनियों और संस्थानों ने इसमें योगदान दिया। कई सरकारी कर्मचारियों के वेतन से भी योगदान किया गया था और कंपनियों को CSR के माध्यम से PM CARES में योगदान की अनुमति दी गई थी।
CAG और RTI को लेकर पुराना विवाद
PM CARES Fund की पारदर्शिता का मुद्दा नया नहीं है। फंड की स्थापना के बाद से ही यह सवाल उठता रहा है कि क्या इसे Right to Information Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाना चाहिए और क्या इसकी जांच Comptroller and Auditor General (CAG) को करनी चाहिए।
केंद्र सरकार का कहना रहा है कि PM CARES एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट (Public Charitable Trust) है और इसे सरकारी बजट से वित्तपोषित नहीं किया जाता। इसलिए सरकार इसे RTI Act के तहत Public Authority नहीं मानती।
2020 में सुप्रीम कोर्ट ने PM CARES Fund की राशि को National Disaster Response Fund (NDRF) में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने दोनों फंडों को अलग-अलग उद्देश्यों वाला बताया था। अदालत ने यह भी माना था कि PM CARES की संरचना को देखते हुए CAG ऑडिट अनिवार्य नहीं है।
यही वजह है कि आज भी फंड की पारदर्शिता को लेकर बहस केवल खर्च की रकम तक सीमित नहीं है। इसमें RTI, ऑडिट की प्रकृति और विस्तृत वित्तीय जानकारी सार्वजनिक किए जाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में हुई देरी ने भी बढ़ाए सवाल
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा ऑडिट स्टेटमेंट के सार्वजनिक होने में देरी का है। वित्त वर्ष 2024-25 31 मार्च 2025 को समाप्त हुआ था, लेकिन संबंधित ऑडिट स्टेटमेंट पर ऑडिटरों के हस्ताक्षर अगस्त 2026 में हुए। दस्तावेज के अनुसार ऑडिट 6 अगस्त 2026 को किया गया और 7 अगस्त को ऑडिटरों ने उस पर हस्ताक्षर किए। इसे लेकर भी पारदर्शिता के सवाल उठे हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और पारदर्शिता कार्यकर्ताओं ने ऑडिट प्रक्रिया और दस्तावेजों के सार्वजनिक होने में इस अंतर पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, केवल देरी के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जरूरत होगी।
अब असली सवाल यह है कि सरकार और PM CARES ट्रस्ट इन आंकड़ों के पीछे की पूरी जानकारी, खासकर ₹324 करोड़ से ज्यादा के रिफंड, Accompanying Notes, खर्च के विस्तृत विवरण और आपातकालीन परिस्थितियों में फंड के इस्तेमाल के मानदंड कितनी स्पष्टता से सार्वजनिक करते हैं।
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