Monday, 03 August 2026
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दिलचस्प हुई पश्चिम विधानसभा की जंग: कमल या पंजे के निशान पर नहीं, व्यक्तिगत छवि पे पड़ सकता है वोट

तरुण भनोत को मिल सकता है इसका लाभ

जबलपुर।

पश्चिम विधानसभा जबलपुर क्षेत्र के चुनावी समीकरण बाकी सभी मध्य प्रदेश की विधानसभाओ से अलग देखे जा रहे है वजह है तरुण भनोत और उनकी टीम की लगातार पिछले 5 वर्षों की क्षेत्र में सक्रियता । मगर पिछले 5 साल के रिकॉर्ड में तरुण भनोत हर स्तर पर अपने विधानसभा क्षेत्र के हर वर्ग के लोगों के बीच में काम करते दिखे हैं। वही अगर बात राकेश सिंह की करे तो उन्हें जनता की नाराज़गी झेलनी पड़ रही है क्यूंकि वह लगातार जबलपुर से नदारद ही दिखे है ओर उनके नाम एक अर्धचालत फ्लाईओवर को छोड़कर विकास ने नाम पर कुछ नहीं।

भाजपा के कट्टर समर्थक भी प्रभावित हैं तरुण भनोत की सक्रियता से

तरुण भनोत और उनकी टीम की लगातार पिछले 5 वर्षों की सक्रियता जिसने कट्टर भाजपाइयों के मन में भी उनकी सक्रियता को बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार कर लिया है। पश्चिम विधानसभा निवासी हिमांशु उपाध्याय का कहना है की वह शुरू से बीजेपी के साथ है लेकिन अगर बात पश्चिम विधानसभा की है तो वह वोट तरुण भनोत को देंगे। उनका कहना है की वह पार्टी निशान नहीं बल्कि तरुण भनोत द्वारा जनता के बीच रहकर उनके किये काम की वजह से उन्हें वोट देंगे। यही वजह है कि पूरे आत्मविश्वास से परिपूर्ण तरुण भनोत जनसंपर्क के दौरान अपने भाषणों में यह कहते हैं कि मैंने 5 साल निस्वार्थ रूप से जनता की सेवा की है, विधानसभा परिवार के जिस भी सदस्य ने मुझे जो काम बताया उसको हमने यथा संभव तरीके से पूरा करने का भरपूर प्रयास किया है। यहां तक कि शासकीय रूप से जो विकास के कार्य पूर्ण होने में दिक्कत आ रही थी वहां हमने अपने साधन संसाधनों का उपयोग कर नाली सड़क, सार्वजनिक रूप से सीसीटीवी कैमरे लगवा कर क्षेत्र के विकास में कदम आगे बढ़ाया।

भनोत की सहज उपलब्धता का मिलेगा चुनाव में लाभ

यह बात भी सच है कि जो वर्तमान सर्वे की रिपोर्ट सामने आ रही है उनमें स्पष्ट नजर आ रहा है कि तरुण भनोत भाजपा के प्रत्याशी से कहीं आगे चल रहे हैं। तरुण भनोत की सहज उपलब्धता और उनकी टीम की सक्रियता जबलपुर की आठों विधानसभा सीटों में से सबसे अधिक समझी जाती है। कोरोना की विविधता के समय जब अधिकांश नेताओं ने खुद को घरों में कैद कर लिया था, उस समय तरुण भनोत और उनकी टीम ने क्षेत्र की जनता को राहत देने के लिए बहुत कार्य किए थे। तरुण भनोत ने हर स्तर पर जाकर अपने क्षेत्र की गरीब और मध्यम वर्ग की जनता को अधिक से अधिक राहत पहुँचाने का भरसक प्रयास किया था। इसके बाद भी लगातार जरूरतमंदों की मदद करने के लिए तरुण भनोत ने न तो अपने इरादे छोड़े और न ही अपने हाथ पीछे खींचे।

कोरोना काल में भी रहे जनता के बीच

जबकि कोरोना के समय प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी सांसद राकेश सिंह ने कई कार्यकर्ताओं और नेताओं से यह बात कही कि यह मेरा विषय नहीं है। अब राकेश सिंह चुनाव में समर्थन मांगने निकल रहे हैं। पश्चिम क्षेत्र की आम जनता तो पहले से ही राकेश सिंह को नहीं पहचानती, न ही कोई जुड़ाव है। अब समस्या इस बात की है कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता दिखाने के लिए तो राकेश सिंह का पूरा साथ दे रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर वह यह बात समझ रहे हैं की जनता राकेश सिंह के साथ नहीं है।

राकेश सिंह के लिए अब तक का सबसे मुश्किल चुनाव

राकेश सिंह मोदी के नाम पर चुनाव में वोट माँग रहे हैं। तरुण भनोत अपने द्वारा किए गए कार्यों और अपनी सहज उपलब्धता सक्रियता के आधार पर वोट माँग रहे हैं। तरुण भनोत का पलड़ा इसलिए भी भारी है क्योंकि पश्चिम की जनता के बीच में उतरकर लगातार पश्चिम की जनता के बीच में पारिवारिक रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करते रहे हैं क्षेत्र की जनता उन्हें सीधे जानती पहचानती है। इस बात का फायदा उन्हें चुनाव में मिलेगा।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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