उत्तर त्रिपुरा में पुलिस ने 1.5 लाख याबा टैबलेट बरामद किए हैं, जिनकी कीमत 7.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामले में असम निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया गया है।
अगरतला/उत्तर त्रिपुरा: पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच त्रिपुरा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। रविवार (28 जून) को उत्तर त्रिपुरा जिले में पुलिस ने लगभग 1.5 लाख Yaba Tablet बरामद किए, जिनकी अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत 7.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस कार्रवाई में असम के सिलचर निवासी अनूप नुनिया (23 वर्ष)को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि यह खेप अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।
यह बरामदगी केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े नेटवर्क की ओर संकेत करती है जो भारत-बांग्लादेश और म्यांमार क्षेत्र में सक्रिय ड्रग तस्करी के मार्गों का इस्तेमाल कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में याबा टैबलेट आखिर कहां से आए और उनका अंतिम गंतव्य क्या था।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोमवार को उत्तर त्रिपुरा जिले के दमछड़ा (Damchhara) क्षेत्र में नियमित निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर एक विशेष अभियान चलाया गया। यह इलाका मिजोरम और असम से जुड़े संपर्क मार्गों के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 28 जून की शाम करीब 6:30 बजे दमचारा थाना क्षेत्र के पूर्वी आरके पुर में नाकेबंदी की गई थी। इस जांच के दौरान, असम की तरफ से त्रिपुरा में दाखिल हो रही एक संदिग्ध गाड़ी को सुरक्षाबलों ने रोका, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर ML05AA0644 था।
सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीले पदार्थ लेकर क्षेत्र से गुजरने वाला है। इसके बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध वाहन तथा व्यक्ति की तलाशी ली। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में याबा टैबलेट बरामद हुए।
पुलिस के अनुसार कुल 1,50,000 याबा टैबलेट जब्त किए गए। शुरुआती जांच के बाद इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य के आधार पर लगभग 7.5 करोड़ रुपये का बताया गया।
अधिकारियों का मानना है कि आरोपी केवल एक कूरियर या परिवहनकर्ता नहीं हो सकता। इतनी बड़ी खेप के पीछे संगठित नेटवर्क की भूमिका होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसका संपर्क किन लोगों और संगठनों से था।
आखिर क्या होता है Yaba?
याबा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में तेजी से फैलने वाला एक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग है। इसका नाम थाई भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ लगभग “पागलपन की दवा” माना जाता है।
याबा टैबलेट आमतौर पर मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) और कैफीन (Caffeine) के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं। मेथामफेटामाइन एक शक्तिशाली उत्तेजक पदार्थ है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
इसके सेवन से व्यक्ति को अस्थायी रूप से ऊर्जा, सतर्कता और उत्साह महसूस हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक उपयोग गंभीर मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार याबा का लगातार सेवन चिंता, अनिद्रा, आक्रामक व्यवहार, भ्रम, अवसाद, हृदय संबंधी समस्याएं और गंभीर मानसिक विकार पैदा कर सकता है।
क्यों बढ़ रही है याबा की तस्करी?
पिछले एक दशक में याबा की तस्करी दक्षिण एशिया में तेजी से बढ़ी है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार म्यांमार के कुछ क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध उत्पादन होता है। इसके बाद तस्करी नेटवर्क इन्हें बांग्लादेश, भारत और अन्य देशों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
पूर्वोत्तर भारत का भौगोलिक स्थान इसे तस्करों के लिए संवेदनशील क्षेत्र बनाता है। त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर और असम जैसे राज्य कई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित हैं। इसी वजह से ड्रग तस्कर इन मार्गों का उपयोग करने की कोशिश करते हैं।
त्रिपुरा कैसे बना अहम ट्रांजिट रूट?
त्रिपुरा की लगभग 850 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है। सीमा के कई हिस्से संवेदनशील माने जाते हैं। हालांकि सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राज्य पुलिस लगातार निगरानी रखती है, फिर भी तस्कर नए रास्ते तलाशने की कोशिश करते रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्रिपुरा का उपयोग केवल गंतव्य के रूप में नहीं बल्कि ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में भी किया जाता है। यहां से नशीले पदार्थों को असम, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
पुलिस की कार्रवाई
उत्तर त्रिपुरा पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की आवाजाही होने वाली है। इसके बाद दमछड़ा क्षेत्र में विशेष नाकाबंदी की गई। पुलिस टीमों ने कई घंटों तक निगरानी रखी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए रखी।
जब संदिग्ध व्यक्ति पुलिस के संपर्क में आया तो उसकी तलाशी ली गई। इसी दौरान बड़ी मात्रा में Yaba Tablet बरामद हुए। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह खेप अपने गंतव्य तक पहुंच जाती तो हजारों लोगों तक यह नशीला पदार्थ पहुंच सकता था।
1.5 लाख टैबलेट की मात्रा इतनी बड़ी है कि इसे किसी व्यक्तिगत स्तर की गतिविधि नहीं माना जा रहा।
पुलिस का मानना है कि इसके पीछे संगठित तस्करी गिरोह सक्रिय हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ड्रग्स की खेप कहां से आई, किन रास्तों से लाई गई और इसे किसे सौंपा जाना था। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
NDPS Act के तहत कार्रवाई
भारत में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों पर Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS Act) लागू होता है। यह कानून देश में ड्रग्स के उत्पादन, परिवहन, भंडारण, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करता है।
यदि किसी व्यक्ति के पास व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) में नशीले पदार्थ पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में लंबी कारावास की सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है।
त्रिपुरा में हाल के अन्य ड्रग मामले
दिलचस्प बात यह है कि याबा बरामदगी की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब त्रिपुरा पुलिस लगातार नशा विरोधी अभियानों को तेज कर रही है।
राज्य में पुलिस ने एक अलग अभियान में लगभग 271 किलोग्राम गांजा भी बरामद किया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इन लगातार बरामदगियों ने यह संकेत दिया है कि राज्य में ड्रग तस्करी के खिलाफ निगरानी और अभियान पहले की तुलना में अधिक आक्रामक हुए हैं।
युवाओं पर सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार Yaba Tablet जैसे सिंथेटिक ड्रग्स का सबसे बड़ा खतरा युवाओं के लिए होता है। तस्कर अक्सर इन्हें आकर्षक रंगों और छोटे टैबलेट के रूप में बेचते हैं। कई मामलों में पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोगों को इसके गंभीर दुष्प्रभावों की जानकारी नहीं होती।
नशे की लत लगने के बाद व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन पर गहरा असर पड़ सकता है। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां केवल बरामदगी पर ही नहीं बल्कि जागरूकता अभियानों पर भी जोर देती हैं।
पूर्वोत्तर भारत में बढ़ती ड्रग चुनौती
पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क की चुनौती का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की निकटता तस्करों के लिए अवसर पैदा करती है।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राज्य पुलिस, सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर कई बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। त्रिपुरा में हुई यह नई बरामदगी भी उसी व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
आगे की योजना
अब जांच का फोकस केवल गिरफ्तार आरोपी तक सीमित नहीं है। फॉरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड और अंतरराज्यीय संपर्कों की जांच के जरिए पुलिस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
यदि जांच में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आते हैं तो केंद्रीय एजेंसियां भी मामले में शामिल हो सकती हैं।
उत्तर त्रिपुरा के दमछड़ा क्षेत्र में 1.5 लाख Yaba Tablet की बरामदगी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के सामने ड्रग तस्करी कितनी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हालांकि पुलिस की कार्रवाई ने करोड़ों रुपये मूल्य की खेप को बाजार तक पहुंचने से रोक दिया, लेकिन यह मामला इस बात का भी संकेत है कि तस्करी नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं और लगातार नए रास्ते तलाश रहे हैं।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां उसके संपर्कों, सप्लाई चेन और संभावित सहयोगियों की पहचान करने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े नए खुलासे सामने आ सकते हैं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि त्रिपुरा में हुई यह बरामदगी वर्ष 2026 की सबसे बड़ी ड्रग जब्तियों में से एक के रूप में दर्ज की जाएगी।
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