Monday, 17 August 2026
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एयर इंडिया के 2 अन्य पायलट ड्रग टेस्ट में ‘पॉजिटिव’, फुकेत-दिल्ली फ्लाइट घटना के बाद बढ़ी सख्ती

फुकेत-दिल्ली फ्लाइट घटना के बाद एयर इंडिया ने करीब 5,000 पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग शुरू की। इसके बाद दो और पायलटों के शुरुआती टेस्ट में ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम आए। जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: एयर इंडिया की उड़ानों की सुरक्षा को लेकर चल रही जांच और सख्ती के बीच सोमवार, 17 अगस्त को एक और अहम घटनाक्रम सामने आया। एयर इंडिया के दो और पायलट अनिवार्य प्रारंभिक ड्रग स्क्रीनिंग में ‘नॉन-नेगेटिव’ पाए गए हैं। दोनों के सैंपल अब कन्फर्मेटरी यानी अंतिम जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने तक उन्हें उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है।

यह मामला 4 अगस्त को हुई फुकेत-दिल्ली उड़ान की गंभीर घटना के बाद शुरू हुई व्यापक ड्रग स्क्रीनिंग से जुड़ा है। उस फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी टेस्ट बाद में मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आया था। इसके बाद एयर इंडिया ने अपने करीब 5,000 पायलटों के लिए एक बार की अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू करने का फैसला किया।

हालांकि, दो नए मामलों को लेकर फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों पायलटों ने किसी प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन किया था। प्रारंभिक ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम अंतिम पुष्टि नहीं है। कन्फर्मेटरी टेस्ट ही यह स्पष्ट करेगा कि स्क्रीनिंग में मिला संकेत वास्तव में किसी प्रतिबंधित पदार्थ के कारण था या नहीं।

फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में आखिर हुआ क्या था?

पूरे मामले की शुरुआत 4 अगस्त 2026 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 से हुई थी। यह एयरबस A320neo विमान फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भर रहा था। उड़ान के दौरान विमान ने अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी। घटना के दौरान यात्रियों और चालक दल के सदस्यों समेत 24 लोग घायल हुए। विमान बाद में सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा।

शुरुआती तौर पर घटना को गंभीर टर्बुलेंस से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद की तकनीकी जांच ने मामले को और जटिल बना दिया। एयरबस के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में कुछ समय के लिए दबाव खत्म हो गया था। इससे लगभग चार सेकंड तक एलेवेटर और एयलरॉन जैसे महत्वपूर्ण फ्लाइट कंट्रोल प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाए।

यानी विमान के अचानक नीचे जाने के पीछे केवल मौसम या सामान्य टर्बुलेंस ही कारण था, ऐसा कहना सही नहीं होगा। Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। एयरबस और फ्रांस की BEA भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं।

फिर सामने आया पायलट का ड्रग टेस्ट

इस गंभीर घटना के बाद फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड की ड्रग स्क्रीनिंग की गई। बाद में उनके कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना की मौजूदगी की पुष्टि होने की खबर सामने आई। यह जानकारी सामने आने के बाद एयरलाइन और विमानन नियामकों के स्तर पर पायलटों की फिटनेस और ड्रग टेस्टिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।

इसके बाद एयर इंडिया ने अपने पूरे पायलट ग्रुप की एक बार व्यापक ड्रग स्क्रीनिंग कराने का फैसला किया। यह स्क्रीनिंग एयर इंडिया के साथ-साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलटों पर भी लागू की गई।

एयरलाइन का यह कदम मौजूदा नियामकीय जरूरतों से आगे जाकर किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार DGCA के नियमों के तहत उड़ान चालक दल के कम से कम 10 प्रतिशत सदस्यों की सालाना रैंडम साइकोएक्टिव-सब्सटेंस टेस्टिंग की व्यवस्था है। एयर इंडिया ने इस घटना के बाद अपने पूरे पायलट समूह की स्क्रीनिंग शुरू की।

करीब 5 हजार पायलटों की होगी स्क्रीनिंग

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के लगभग 5,000 पायलट इस एकमुश्त स्क्रीनिंग के दायरे में हैं। 13 अगस्त को एयरलाइन ने इस प्रक्रिया को शुरू करने की घोषणा की थी। स्क्रीनिंग के लिए पायलटों के ट्रेनिंग सेशन, उड़ान के बाद और अन्य निर्धारित स्थानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

17 अगस्त तक सामने आई जानकारी के अनुसार करीब 300 से 400 पायलटों की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी थी। इसी प्रक्रिया के दौरान दो अतिरिक्त पायलटों के शुरुआती परिणाम ‘नॉन-नेगेटिव’ आए।

यह संख्या अभी कुल पायलटों की तुलना में छोटी है, लेकिन विमानन क्षेत्र में इसका महत्व काफी बड़ा है क्योंकि कॉकपिट क्रू की फिटनेस सीधे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है।

नॉन-नेगेटिव’ का मतलब ‘ड्रग्स लेना’ नहीं

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ‘नॉन-नेगेटिव’ प्रारंभिक स्क्रीनिंग का परिणाम है, अंतिम मेडिकल या कानूनी निष्कर्ष नहीं।

ड्रग स्क्रीनिंग में शुरुआती टेस्ट किसी पदार्थ की संभावित मौजूदगी का संकेत दे सकता है। इसके बाद सैंपल को अधिक विशिष्ट कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजा जाता है। इसलिए फिलहाल ये कह पाना जल्दबाजी होगी कि दोनों पायलट ड्रग्स के सेवन के दोषी पाए गए हैं।

फिलहाल एयरलाइन ने दोनों पायलटों को डी-रोस्टर कर दिया है। इसका अर्थ है कि अंतिम जांच पूरी होने तक उन्हें उड़ान संचालन से हटा दिया गया है।

यह कदम एहतियाती तौर पर महत्वपूर्ण है। इससे जांच पूरी होने तक संबंधित पायलटों को विमान उड़ाने की जिम्मेदारी नहीं दी जाती।

क्या फुकेत-दिल्ली घटना और इन दो पायलटों का कोई संबंध है?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों नए पायलटों के प्रारंभिक ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणामों को 4 अगस्त की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट से जोड़ना उचित नहीं होगा। ये दोनों मामले उस घटना के बाद शुरू की गई व्यापक स्क्रीनिंग के दौरान सामने आए हैं।

यानी यह जरूरी नहीं कि दोनों पायलट उस फ्लाइट में ड्यूटी पर थे या उनके टेस्ट का उस तकनीकी घटना से सीधा संबंध हो। अभी उनके कन्फर्मेटरी टेस्ट के परिणाम आने बाकी हैं।

इसी वजह से इस पूरे घटनाक्रम को फुकेत-दिल्ली घटना के बाद एयर इंडिया द्वारा शुरू की गई व्यापक सुरक्षा जांच का परिणाम कहना ज्यादा सटीक है।

विमान की तकनीकी खराबी भी जांच का हिस्सा

फुकेत-दिल्ली मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू विमान की तकनीकी स्थिति है। एयरबस की प्रारंभिक जांच के अनुसार विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में अस्थायी रूप से दबाव खत्म हुआ था। इस वजह से उड़ान नियंत्रण कुछ सेकंड के लिए प्रभावित हुआ और विमान करीब 300 फीट नीचे चला गया।

इस घटना में 24 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। एयरबस ने विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम, सेंसर और वायरिंग की जांच की सिफारिश की है। विमान पर निर्धारित संरचनात्मक सीमाओं से अधिक बल पड़ने की बात भी शुरुआती विश्लेषण में सामने आई है।

इसलिए जांच केवल पायलटों के व्यवहार या ड्रग टेस्ट तक सीमित नहीं है। तकनीकी खराबी, रखरखाव रिकॉर्ड, फ्लाइट डेटा और कॉकपिट में उस समय की परिस्थितियों समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है।

पायलट फिटनेस पर उठते सवाल

विमान उड़ाने वाले पायलट की शारीरिक और मानसिक स्थिति विमानन सुरक्षा का बुनियादी हिस्सा है। कॉकपिट में अचानक आने वाली तकनीकी समस्या, खराब मौसम या किसी आपात स्थिति में पायलटों को कुछ ही सेकंड में निर्णय लेने पड़ सकते हैं।

इसी कारण विमानन नियम पायलटों को ऐसी स्थिति में उड़ान भरने से रोकते हैं जहां उनकी क्षमता किसी साइकोएक्टिव पदार्थ के प्रभाव से प्रभावित हो सकती है।

फुकेत-दिल्ली घटना के बाद सामने आए सकारात्मक ड्रग टेस्ट ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर इसलिए क्योंकि संबंधित पायलट घटना के समय उड़ान ड्यूटी पर थे।

हालांकि, किसी एक घटना के आधार पर पूरे पायलट समुदाय पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। लेकिन एयरलाइन के लिए यह जरूर जरूरी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल जमीन पर भी उतनी ही सख्ती से लागू हों जितने कागज पर निर्धारित हैं।

एयर इंडिया ने भी उठाये कड़े कदम

पूरे पायलट समूह की एकमुश्त ड्रग स्क्रीनिंग एयर इंडिया की ओर से बड़ा कदम माना जा रहा है। कंपनी ने यह प्रक्रिया केवल मौजूदा नियमों का पालन करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की है।

स्क्रीनिंग प्रक्रिया अलग-अलग स्थानों पर की जा रही है। इसमें एयरलाइन की गुरुग्राम अकादमी और पायलटों के होम बेस जैसे स्थान भी शामिल हैं।

एयरलाइन की यह नीति केवल एयर इंडिया के पायलटों तक सीमित नहीं है। एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट भी इसके दायरे में हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि समूह स्तर पर पायलट फिटनेस को लेकर एक समान सुरक्षा दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की जा रही है।

घटना ने एयर इंडिया के लिए बढ़ाई सुरक्षा चुनौती

टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया पिछले कुछ समय से विमान सुरक्षा और संचालन से जुड़े कई सवालों के बीच अपने परिचालन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में फुकेत-दिल्ली घटना और उसके बाद सामने आए ड्रग टेस्ट के मामले एयरलाइन के लिए अतिरिक्त चुनौती लेकर आए हैं।

एक तरफ एयरबस की तकनीकी जांच विमान में आई हाइड्रोलिक समस्या को समझने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ एयरलाइन और नियामक पायलट फिटनेस से जुड़े सवालों पर ध्यान दे रहे हैं।

इन दोनों पहलुओं को अलग-अलग देखना भी जरूरी है। अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि फुकेत-दिल्ली विमान के अचानक नीचे जाने की वजह पायलट का ड्रग टेस्ट था। तकनीकी जांच में हाइड्रोलिक सिस्टम की अस्थायी विफलता सामने आई है और घटना की विस्तृत जांच जारी है।

यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

एयरलाइन उद्योग में सुरक्षा का भरोसा केवल विमान की तकनीकी क्षमता से नहीं बनता। उसमें विमान का रखरखाव, एयर ट्रैफिक सिस्टम, केबिन क्रू, पायलटों की फिटनेस और आपातकालीन प्रक्रियाएं सभी शामिल होती हैं।

फुकेत-दिल्ली घटना के बाद एयर इंडिया द्वारा सभी पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग कराने का फैसला इसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। दो और पायलटों के शुरुआती टेस्ट में ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम सामने आने से अब इस स्क्रीनिंग के बाकी परिणामों पर भी नजर रहेगी।

फुकेत-दिल्ली उड़ान घटना की तकनीकी जांच भी जारी है और पायलट फिटनेस से जुड़े मामलों की पुष्टि भी आगे की जांच के बाद होगी। आने वाले दिनों में इन दोनों जांचों के निष्कर्ष यह स्पष्ट करने में मदद करेंगे कि एयर इंडिया को अपनी सुरक्षा और ड्रग-स्क्रीनिंग व्यवस्था में किन क्षेत्रों में और सुधार की जरूरत है।

फिलहाल दोनों ही पायलट उड़ान ड्यूटी से हटाए जा चुके हैं। उनके कन्फर्मेटरी टेस्ट के परिणाम का इंतजार है और एयर इंडिया के लगभग 5,000 पायलटों की व्यापक स्क्रीनिंग जारी है।

ये भी पढ़ें :- बिहार के अशोक धाम मंदिर में भगदड़ से 7 श्रद्धालुओं की मौत, 12 से अधिक घायल

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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