भाभीजी घर पर हैं! अपनी सादगी और मजबूत किरदारों के दम पर हाउसफुल 5 और सन ऑफ सरदार 2 जैसी बड़ी बजट कॉमेडी फिल्मों से बेहतर साबित हो रहा है, जानिए वजह
नई दिल्ली: आज के दौर में जहां बड़ी बजट की कॉमेडी फिल्में ज्यादा शोर और तामझाम पर टिकी नजर आती हैं, वहीं टीवी का लोकप्रिय सिटकॉम ‘भाभीजी घर पर हैं!’ अपनी सादगी और सटीक हास्य के दम पर दर्शकों का भरोसा जीत रहा है। मजबूत किरदार, साफ लेखन और संतुलित कॉमेडी के कारण यह शो और इसका फिल्म वर्ज़न हालिया कॉमेडी फिल्मों से अलग और ज्यादा प्रभावी साबित हो रहा है, जिस पर अब दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों की भी नजर है।
‘भाभीजी घर पर हैं!’ अपनी पहचान को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है। यह शो खुद को जरूरत से ज्यादा बड़ा या अलग साबित करने की कोशिश नहीं करता। यही सादगी इसे हाल ही में आई कॉमेडी फिल्मों ‘हाउसफुल 5’ और ‘सन ऑफ सरदार 2’ से ज्यादा संतुलित और देखने लायक बनाती है।
जहां कई बड़ी फिल्मों में जबरदस्ती के जोक्स, ऊंची आवाज़ और बिखरी हुई कहानी देखने को मिलती है, वहीं भाभीजी घर पर हैं! सीमित सेट, मजबूत स्क्रिप्ट और जाने-पहचाने किरदारों पर भरोसा करता है। विभूति नारायण मिश्रा, अंगूरी भाभी, तिवारी जी और अनीता भाभी जैसे किरदार सालों से दर्शकों से जुड़े हुए हैं और यही निरंतरता शो की सबसे बड़ी ताकत है।
खास बात यह है कि हाल ही में रिलीज़ हुआ ‘भाभीजी घर पर हैं! ‘फन ऑन द रन’ भी इसी वजह से चर्चा में रहा। मीडिया रिपोर्ट्स और रिव्यू में इसकी टाइमिंग, साफ-सुथरे हास्य और किरदारों की केमिस्ट्री की सराहना की गई है। यही कारण है कि यह प्रोजेक्ट बड़े बजट वाली फिल्मों के मुकाबले दर्शकों को ज्यादा सहज और भरोसेमंद मनोरंजन देता नजर आया।
कई फिल्म समीक्षकों का मानना है कि आज की कॉमेडी में असली जरूरत भारी बजट या बड़े स्टार्स की नहीं, बल्कि सही लेखन और सटीक कॉमिक टाइमिंग की है—और भाभीजी घर पर हैं! इसी कसौटी पर खरा उतरता है।
यह शो और इसका फिल्म वर्ज़न यह साबित करता है कि अच्छी कॉमेडी के लिए तामझाम नहीं, बल्कि साफ सोच, मजबूत किरदार और ईमानदार मनोरंजन ही सबसे अहम होता है।
