मुर्शिदाबाद का 16 वर्षीय इकबाल कई दिनों से तालाब में रह रहा है। बाहर निकलते ही जलन के उसके दावे ने लोगों को हैरान कर दिया। जानिए ‘जिन्न’ की कहानी और मेडिकल वजह।
मुर्शिदाबाद: आमतौर पर तालाब या नदी किसी के लिए नहाने, तैरने या कुछ देर सुकून पाने की जगह होती है। लेकिन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में 16 साल के एक किशोर की जिंदगी पिछले कुछ समय से पानी के इर्द-गिर्द सिमट गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इकबाल शेख कई-कई दिनों तक तालाब में ही रहता है और कभी-कभी लगातार चार-पांच दिन तो कभी करीब सात दिन तक पानी से बाहर नहीं आता। उसका दावा है कि जैसे ही वह पानी से बाहर निकलता है, उसके पूरे शरीर में तेज जलन शुरू हो जाती है और पानी में वापस जाने पर उसे राहत मिलती है।
इस असामान्य स्थिति ने बेलडांगा इलाके में कौतूहल पैदा कर दिया है। लोग उसे देखने के लिए तालाब के किनारे जमा हो रहे हैं, कुछ लोग उसके लिए चिउड़ा और बिस्कुट लेकर पहुंच रहे हैं। लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे अहम पहलू कौतूहल नहीं, बल्कि 16 साल के किशोर की बिगड़ती सेहत और उसका इलाज है। इकबाल अपनी इस तकलीफ को एक अदृश्य शक्ति या ‘जिन्न’ से जोड़ता है, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों ने पानी के संपर्क से होने वाली एक दुर्लभ स्थिति एक्वाजेनिक प्रुरिटस (Aquagenic Pruritus) की संभावना का जिक्र किया है।
मुर्शिदाबाद के बेलडांगा का मामला
यह मामला पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके का बताया जा रहा है। 16 वर्षीय इकबाल शेख को लेकर स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है। हाल के दिनों में उसके तालाब में लगातार रहने के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला ज्यादा चर्चा में आया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इकबाल बेलडांगा के अलग-अलग तालाबों में दिन और रात बिताता है। कई बार वह चार-पांच दिनों तक लगातार पानी में रहता है और कुछ मौकों पर उसके सात दिनों तक पानी में रहने की भी बात सामने आई है। वह पानी में तैरता या डूबा रहता है और बाहर निकलने से बचता है।
इकबाल का कहना है कि यह उसकी पसंद या किसी तरह का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं है। उसके मुताबिक, पानी से बाहर निकलना उसके लिए बेहद मुश्किल हो जाता है क्योंकि इससे उसके शरीर में तेज जलन होने लगती है।
बाहर निकलते ही क्यों जलने लगता है शरीर?
इकबाल के अनुसार, जैसे ही वह तालाब से बाहर आता है और उसकी त्वचा हवा के संपर्क में आती है, उसे पूरे शरीर में तेज जलन और असहजता महसूस होने लगती है। इसके उलट, पानी में जाने पर उसे राहत मिलती है। इसी अनुभव के कारण वह लंबे समय तक पानी में रहने को मजबूर है।
यहीं से इस कहानी का सबसे रहस्यमय हिस्सा सामने आता है। इकबाल इस जलन को किसी सामान्य बीमारी के बजाय एक अदृश्य शक्ति से जोड़ता है। उसका मानना है कि उस पर जिन्न, परी या किसी अन्य अदृश्य शक्ति का साया है। स्थानीय रिपोर्टों में भी उसके इस दावे का उल्लेख किया गया है।
‘जिन्न’ की थ्योरी ने बढ़ाया रहस्य
इकबाल की कहानी में जिन्न वाली बात सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। ग्रामीण इलाकों में बीमारी या असामान्य व्यवहार को कई बार स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक-सांस्कृतिक धारणाओं से जोड़कर देखा जाता है। इकबाल के मामले में भी उसके पानी में रहने की आदत को उसने खुद एक अदृश्य शक्ति से जोड़ा है।
लेकिन विशेषज्ञों के नजरिए से किसी भी स्वास्थ्य समस्या को केवल अलौकिक कारण मान लेना उचित नहीं है। खासकर तब, जब व्यक्ति लगातार शारीरिक परेशानी की शिकायत कर रहा हो और उसके व्यवहार में इतना बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा हो।
क्या है Aquagenic Pruritus?
इकबाल के मामले ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान एक्वाजेनिक प्रुरिटस (Aquagenic Pruritus) नाम की दुर्लभ स्थिति की ओर भी खींचा है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पानी के संपर्क के बाद त्वचा पर तेज चुभन, खुजली, सुई जैसी सनसनाहट और जलन महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में बदन पर स्पष्ट दाने या लाल चकत्ते भी दिखाई देते हैं।
इस स्थिति में खुजली पानी के संपर्क के दौरान या उसके तुरंत बाद शुरू हो सकती है और अलग-अलग तापमान के पानी से भी लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। इसके पीछे का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

लेकिन इकबाल का मामला इस स्थिति के सामान्य पैटर्न से पूरी तरह मेल नहीं खाता। आम तौर पर Aquagenic Pruritus में पानी संपर्क में आने के बाद परेशानी बढ़ती है, जबकि इकबाल का कहना है कि पानी से बाहर आने पर जलन बढ़ती है और पानी में रहने पर राहत मिलती है। इसलिए विशेषज्ञों ने भी इसे सीधे उसकी बीमारी घोषित नहीं किया है।
जांच के बिना निष्कर्ष नहीं
विशेषज्ञों ने इस मामले को असामान्य बताया है। त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे लक्षणों के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं और केवल लक्षण सुनकर किसी एक बीमारी का नाम तय नहीं किया जा सकता।
डॉक्टरों के अनुसार मानसिक तनाव या चिंता भी किसी शारीरिक असहजता की अनुभूति को ज्यादा तीव्र बना सकती है। इसके अलावा एलर्जी, त्वचा से जुड़ी दूसरी समस्याएं, कुछ पोषक तत्वों की कमी या अन्य चिकित्सकीय कारणों की भी जांच करनी पड़ सकती है।
इसलिए इकबाल के मामले में मेडिकल जांच बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर इसलिए क्योंकि वह एक नाबालिग है और लंबे समय तक पानी में रहने से उसकी सेहत पहले ही प्रभावित होती दिखाई दे रही है।
लगातार पानी में रहने से शरीर पर असर
कई दिनों तक लगातार पानी में रहने का असर अब इकबाल के शरीर पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसके हाथ-पैर और शरीर के दूसरे हिस्सों की त्वचा लगातार पानी में रहने के कारण सफेद और सिकुड़ी हुई नजर आने लगी है।
लंबे समय तक पानी में रहने के साथ उसे सर्दी और खांसी की समस्या भी हो गई है। यानी जिस पानी को वह अपने लिए राहत का माध्यम मान रहा है, वही लंबे समय तक संपर्क में रहने पर उसके शरीर के लिए दूसरी समस्याएं पैदा कर सकता है।
लगातार गीली त्वचा रहने से त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और संक्रमण जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त भोजन और पोषण के बिना लंबे समय तक पानी में रहे तो कमजोरी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
इसी वजह से स्थानीय लोगों में अब सिर्फ हैरानी नहीं, बल्कि चिंता भी बढ़ रही है।
आर्थिक परेशानी से जूझ रहा परिवार
इकबाल का परिवार आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा है। इकबाल के मुताबिक, वह इलाज के लिए स्थानीय ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी गया था, लेकिन उसे अपेक्षित मदद नहीं मिली। परिवार के पास निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं।
यही वजह है कि मामला सिर्फ एक अजीबोगरीब घटना तक सीमित नहीं रह जाता। इसके साथ ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था, आर्थिक कमजोरी और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध होने का सवाल भी जुड़ जाता है।
अगर किसी किशोर को कई वर्षों से ऐसी समस्या है और वह सामान्य जीवन जीने के बजाय लगातार तालाब में रहने को मजबूर है, तो उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचाना बेहद जरूरी हो जाता है।
तालाब के किनारे लग रही लोगों की भीड़
इकबाल की कहानी अब स्थानीय स्तर पर किसी सामान्य स्वास्थ्य समस्या से कहीं आगे निकल चुकी है। हर दिन बड़ी संख्या में लोग और स्कूली बच्चे तालाब के किनारे पहुंच रहे हैं। कुछ लोग उसे देखने आते हैं, जबकि कुछ लोग उसकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।
लोग उसे पानी से बाहर आने के लिए समझाते भी हैं, लेकिन वह उनकी बात मानने को तैयार नहीं होता। उसके परिवार ने भी उसे घर पर रखने की कोशिश की, लेकिन वह वापस पानी में चला जाता है।
तालाब के किनारे से कुछ लोग उसे खाने के लिए चिउड़ा, बिस्कुट और दूसरी चीजें देते हैं। इस तरह धीरे-धीरे तालाब ही उसके रहने की जगह बन गया है।
सोशल मीडिया ने भी बढ़ाई चर्चा
इकबाल के तालाब में रहने से जुड़े कई वीडियो इंटरनेट पर सामने आए हैं। इन वीडियो में उसे पानी में रहते और आसपास मौजूद लोगों से बातचीत करते देखा जा सकता है। यह घटना स्थानीय दायरे से निकलकर सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच गई है।
हालांकि ऐसी घटनाओं में सोशल मीडिया की दिलचस्पी कभी-कभी वास्तविक समस्या को पीछे छोड़ देती है। लोग इसे रहस्यमय या ‘अलौकिक’ घटना के रूप में देखना शुरू कर देते हैं, जबकि व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत हो सकती है।
क्या ‘पानी में रहना’ ही एकमात्र इलाज है?
इकबाल को पानी में रहने से राहत महसूस होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि लंबे समय तक पानी में रहना उसके लिए इलाज है। विशेषज्ञों ने इस मामले में सही मेडिकल मूल्यांकन की जरूरत बताई है। अगर उसकी शिकायत किसी त्वचा, रक्त, पोषण संबंधी, न्यूरोलॉजिकल या मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जुड़ी है, तो उसका पता जांच के बाद ही चलेगा।
Aquagenic Pruritus की स्थिति में भी डॉक्टर पहले लक्षणों और संभावित कारणों का मूल्यांकन करते हैं। यह स्थिति कभी-कभी कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है, इसलिए लगातार या गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।




