WhatsApp Parental Controls को सेटअप करने के लिए माता-पिता और किशोर दोनों की सहमति जरूरी होगी। जानिए QR Code, Parent PIN और अकाउंट लिंकिंग के जरिए यह सुविधा कैसे शुरू की जा सकती है।
नई दिल्ली: आज के दौर में बच्चों और किशोरों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से जुड़ गया है। पढ़ाई से लेकर दोस्तों से बातचीत और मनोरंजन तक, डिजिटल प्लेटफॉर्म उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
WhatsApp भी ऐसा ही एक प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल किशोर बड़ी संख्या में करते हैं। हालांकि, ऑनलाइन दुनिया में अनजान लोगों से संपर्क, संदिग्ध ग्रुप, अनुचित कंटेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने माता-पिता की चिंताएं भी बढ़ाई हैं। ऐसे में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उनकी निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
माता-पिता की इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए WhatsApp ने किशोरों के अकाउंट के लिए नए Parental Controls पेश किए हैं। कंपनी ने 30 सितंबर को इस फीचर की घोषणा की। इसके जरिए माता-पिता अपने किशोर बच्चों के WhatsApp अकाउंट की कुछ प्राइवेसी सेटिंग्स को मैनेज कर सकेंगे।
WhatsApp का नया Parental Control फीचर क्या है?
WhatsApp का नया पैरेंटल कंट्रोल फीचर माता-पिता और किशोरों को मिलकर अकाउंट की कुछ सेटिंग्स तय करने की सुविधा देता है। इसका उद्देश्य बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की आजादी देने के साथ उनकी सुरक्षा के लिए कुछ सीमाएं तय करना है।
यह सुविधा 13 से 17 साल की उम्र के किशोरों के लिए तैयार की गई है। इसमें माता-पिता अपने WhatsApp अकाउंट को बच्चे के अकाउंट से लिंक कर सकेंगे। इसके बाद वे एक छह अंकों का PIN सेट करेंगे। इस PIN के जरिए बच्चे के अकाउंट की कुछ महत्वपूर्ण प्राइवेसी सेटिंग्स को सुरक्षित रखा जाएगा।
अगर किशोर किसी ऐसी सेटिंग को बदलना चाहता है, जिससे अकाउंट की सुरक्षा या प्राइवेसी पहले से कम हो सकती है, तो उसे माता-पिता की अनुमति लेनी होगी। इसके लिए पैरेंट द्वारा बनाया गया PIN जरूरी होगा।
माता-पिता को मिलेंगी ये सुविधाएं
WhatsApp के नए अपडेट में कई ऐसे विकल्प शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर नजर रख सकेंगे।
1. कौन देख सकेगा बच्चे की प्रोफाइल फोटो?
WhatsApp के नए पैरेंटल कंट्रोल में माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि उनके बच्चे की प्रोफाइल फोटो कौन देख सकता है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रोफाइल फोटो व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा होती है। ऐसे में माता-पिता यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि बच्चे की फोटो अनजान लोगों तक न पहुंचे।
इसके अलावा, वे अकाउंट की अन्य प्राइवेसी सेटिंग्स को भी मैनेज कर सकेंगे। अगर बच्चा इन प्रतिबंधों को हटाकर अपनी प्रोफाइल ज्यादा लोगों के लिए सार्वजनिक करना चाहता है, तो उसे पैरेंट द्वारा सेट किए गए PIN के जरिए अनुमति लेनी होगी।
2. अनजान लोग नहीं जोड़ पाएंगे ग्रुप में
WhatsApp पर कई बार यूजर्स को ऐसे ग्रुप में जोड़ दिया जाता है, जिनके सदस्यों को वे व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते। किशोरों के मामले में यह स्थिति ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी चिंता पैदा कर सकती है।
नए फीचर के तहत माता-पिता यह नियंत्रित कर सकेंगे कि उनके बच्चे को कौन WhatsApp ग्रुप में जोड़ सकता है। वे ग्रुप से जुड़ने की अनुमति को सीमित कर सकेंगे, ताकि बच्चे अनजान लोगों के बनाए ग्रुप में बिना जानकारी या सहमति के शामिल न हों।
इससे माता-पिता को बच्चों के डिजिटल संपर्कों को लेकर कुछ अतिरिक्त नियंत्रण मिलेगा।
3. ग्रुप में शामिल होने और बाहर निकलने पर मिलेगा अलर्ट
नए पैरेंटल कंट्रोल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रुप एक्टिविटी नोटिफिकेशन है। इसके तहत माता-पिता को सूचना मिल सकेगी कि उनका बच्चा कब किसी WhatsApp ग्रुप में शामिल हुआ या कब उसने किसी ग्रुप को छोड़ा।
इसके अलावा, अगर बच्चा पहले से किसी ग्रुप का सदस्य है और उस ग्रुप में सदस्यों की संख्या काफी बढ़ जाती है, तो भी माता-पिता को अलर्ट मिल सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रुप के सदस्यों की संख्या 30, 100 या 250 तक पहुंचने जैसी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी पर भी नोटिफिकेशन मिलने की व्यवस्था शामिल है। इसका उद्देश्य माता-पिता को यह समझने में मदद करना है कि उनके बच्चे किन डिजिटल समुदायों से जुड़ रहे हैं और उनके ऑनलाइन संपर्कों में किस तरह बदलाव हो रहा है।
हालांकि, इन नोटिफिकेशन के जरिए माता-पिता ग्रुप में होने वाली बातचीत नहीं पढ़ सकेंगे। उन्हें केवल ग्रुप से जुड़ी चुनिंदा गतिविधियों की जानकारी मिलेगी।
4. WhatsApp Channels पर भी मिलेगा नियंत्रण
WhatsApp Channels एक ऐसा फीचर है, जिसके जरिए संस्थान, कंपनियां, क्रिएटर्स और सार्वजनिक हस्तियां बड़ी संख्या में फॉलोअर्स तक जानकारी पहुंचा सकती हैं। यह सामान्य चैट या ग्रुप से अलग होता है, क्योंकि इसमें मुख्य रूप से एकतरफा अपडेट साझा किए जाते हैं।
नए पैरेंटल कंट्रोल के जरिए माता-पिता तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किन Channels को देख सकता है। इसके लिए तीन तरह के विकल्प मिलेंगे।
- All: बच्चा सभी उपलब्ध WhatsApp Channels देख सकेगा।
- Parent-approved only: बच्चा केवल उन्हीं Channels को फॉलो कर सकेगा, जिन्हें माता-पिता ने मंजूरी दी है।
- None: बच्चे के लिए Channels देखने की सुविधा बंद की जा सकेगी।
इसके अलावा, माता-पिता यह भी तय कर सकेंगे कि बच्चा अपना खुद का Channel बना सकता है या नहीं। इस तरह परिवार बच्चों के लिए उपलब्ध सार्वजनिक कंटेंट और डिजिटल गतिविधियों को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकेंगे।
5. Status अपडेट की प्राइवेसी भी कर सकेंगे मैनेज
WhatsApp का Status फीचर यूजर्स को फोटो, वीडियो और टेक्स्ट अपडेट साझा करने की सुविधा देता है। ये अपडेट 24 घंटे बाद अपने आप हट जाते हैं। हालांकि, इन्हें कौन देख सकता है, यह प्राइवेसी सेटिंग्स पर निर्भर करता है।
नए पैरेंटल कंट्रोल में माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि उनके बच्चे किन लोगों के Status देख सकते हैं। इसके साथ ही वे यह भी नियंत्रित कर पाएंगे कि बच्चे के अपने Status अपडेट किन लोगों को दिखाई दें।
इसके लिए कॉन्टैक्ट्स, चुने हुए कॉन्टैक्ट्स और कुछ लोगों को बाहर रखने जैसे प्राइवेसी विकल्प उपलब्ध होंगे। जरूरत पड़ने पर Status की विजिबिलिटी पूरी तरह बंद भी की जा सकती है।
इस सुविधा का उद्देश्य बच्चों की निजी गतिविधियों को अनजान लोगों तक पहुंचने से रोकने और उनके डिजिटल अनुभव को सुरक्षित बनाने में मदद करना है।
6. Meta AI के इस्तेमाल पर भी लगा सकेंगे सीमा
WhatsApp में Meta AI के आने के बाद यूजर्स ऐप के भीतर ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सवाल पूछ सकते हैं और अलग-अलग विषयों पर जानकारी हासिल कर सकते हैं। किशोर भी इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में बच्चों को AI के जरिए मिलने वाली जानकारी और कंटेंट को लेकर माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
WhatsApp के नए पैरेंटल कंट्रोल में माता-पिता अपने बच्चों के Meta AI अनुभव को भी मैनेज कर सकेंगे। इसके लिए दो विकल्प दिए गए हैं।
- Standard: इसमें किशोरों को 13 साल और उससे अधिक उम्र के यूजर्स के लिए निर्धारित सामान्य Meta AI अनुभव मिलेगा।
- Limited Content: इस विकल्प के जरिए Meta AI के साथ बातचीत में आने वाले विषयों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।
Limited Content विकल्प का उद्देश्य किशोरों को कुछ संवेदनशील या उनकी उम्र के लिहाज से अनुपयुक्त विषयों से दूर रखना है। इस सेटिंग को सक्रिय करने पर Private Processing पर आधारित Meta AI की कुछ सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं रहेंगी। इनमें Incognito Chat और Message Summaries जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इस तरह माता-पिता बच्चों के AI इस्तेमाल को लेकर भी अपनी पसंद के अनुसार सीमाएं तय कर सकेंगे।
WhatsApp Parental Controls कैसे करें एक्टिवेट?
WhatsApp ने इस फीचर को इस तरह तैयार किया है कि माता-पिता और बच्चे मिलकर इसे सेटअप कर सकें। इसके लिए दोनों के पास WhatsApp का लेटेस्ट वर्जन होना जरूरी है। माता-पिता की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और किशोर की उम्र 13 से 17 साल के बीच होनी चाहिए।
इसे एक्टिवेट करने के लिए ये स्टेप्स फॉलो करने होंगे।
बच्चे के फोन से शुरुआत करें
- सबसे पहले बच्चे के फोन में WhatsApp खोलें।
- इसके बाद Settings में जाएं।
- यहां Parental Controls का विकल्प चुनें।
- Continue पर क्लिक करने के बाद बच्चे की जन्मतिथि दर्ज कर उसकी उम्र की पुष्टि करें।
- इसके बाद अपने पैरेंट अकाउंट को लिंक करने के लिए आगे बढ़ें।
माता-पिता के फोन से अकाउंट लिंक करें
- अब माता-पिता अपने फोन का कैमरा खोलकर बच्चे के फोन पर दिखाई देने वाले QR Code को स्कैन करें।
- QR Code स्कैन करने के बाद WhatsApp पर दिखाई देने वाले लिंक को खोलें।
- Continue पर क्लिक करें और अपनी वयस्क उम्र की पुष्टि करें।
- इसके बाद छह अंकों का Parent PIN बनाएं।
- PIN की पुष्टि करने के बाद Done पर क्लिक करें।
बच्चे के फोन पर सेटअप पूरा करें
- अब बच्चे के फोन पर वापस जाएं।
- यहां बनाए गए Parent PIN को दर्ज करें।
- इसके बाद प्राइवेसी सेटिंग्स और अन्य उपलब्ध कंट्रोल विकल्पों को अपनी जरूरत के अनुसार चुनें।
- Continue और Done पर क्लिक करके सेटअप पूरा करें।
- अंत में बच्चे को भी नए पैरेंटल कंट्रोल से जुड़ी जानकारी पढ़कर इसकी पुष्टि करनी होगी।
इस तरह माता-पिता और बच्चे के WhatsApp अकाउंट आपस में लिंक हो जाएंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों की सहमति के बिना यह सेटअप पूरा नहीं किया जा सकता।
क्या माता-पिता पढ़ पाएंगे बच्चों की WhatsApp चैट?
नए फीचर को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब माता-पिता अपने बच्चों की निजी WhatsApp चैट पढ़ सकेंगे? इसका जवाब है, नहीं।
WhatsApp ने स्पष्ट किया है कि नए पैरेंटल कंट्रोल से माता-पिता को बच्चों के निजी मैसेज पढ़ने या उनकी कॉल सुनने की सुविधा नहीं मिलेगी। बच्चों की व्यक्तिगत बातचीत पहले की तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेगी।
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का मतलब है कि मैसेज भेजने वाला और उसे प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही उसकी सामग्री पढ़ सकता है। इसी तरह कॉल की बातचीत भी संबंधित लोगों तक सीमित रहती है। WhatsApp के मुताबिक, खुद कंपनी भी इन व्यक्तिगत मैसेज और कॉल की सामग्री नहीं देख या सुन सकती।
