Tuesday, 28 July 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
E20 Controversy: नितिन गडकरी ने Deepfake के खिलाफ उठाया कानूनी कदम, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी मुकदमे की इजाजत अंबाला कैंट में 27वां कारगिल विजय दिवस श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के साथ आयोजित, शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि Bank of Baroda Data Leak: 1TB डेटा लीक की खबर से मचा हड़कंप, बैंक ने बताया कितना सुरक्षित है सिस्टम 105 साल पहले शुरू हुई इंसुलिन की ऐतिहासिक कहानी, जिसने करोड़ों डायबिटीज मरीजों को दी नई जिंदगी NEET की परीक्षा में 11 अंक से चूकी 19 वर्षीय छात्रा ने की आत्महत्या, परीक्षा के बढ़ते दबाव पर फिर उठे सवाल ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ फिल्म विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, रिलीज को लेकर क्या फिर बढ़ेगा कानूनी पेंच? Commonwealth Games 2026 में मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का दायित्व संभालने पर दी शुभकामनाएं E20 Controversy: नितिन गडकरी ने Deepfake के खिलाफ उठाया कानूनी कदम, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी मुकदमे की इजाजत अंबाला कैंट में 27वां कारगिल विजय दिवस श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के साथ आयोजित, शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि Bank of Baroda Data Leak: 1TB डेटा लीक की खबर से मचा हड़कंप, बैंक ने बताया कितना सुरक्षित है सिस्टम 105 साल पहले शुरू हुई इंसुलिन की ऐतिहासिक कहानी, जिसने करोड़ों डायबिटीज मरीजों को दी नई जिंदगी NEET की परीक्षा में 11 अंक से चूकी 19 वर्षीय छात्रा ने की आत्महत्या, परीक्षा के बढ़ते दबाव पर फिर उठे सवाल ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ फिल्म विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, रिलीज को लेकर क्या फिर बढ़ेगा कानूनी पेंच? Commonwealth Games 2026 में मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का दायित्व संभालने पर दी शुभकामनाएं

“हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं”: देशभर के आदिवासी प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष अलग धर्म कोड सहित 21 मांगों पर कार्रवाई की अपील की

नई दिल्ली: आदिवासी समुदायों की पहचान, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण की मांग को लेकर राष्ट्रीय महासंघ डेमोक्रेटिक असेंबली ऑफ रिप्रेजेंटेटिव बॉडी फॉर आदिवासी राइट्स (DARBAR) ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की अपील की। संगठन ने प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रपति के नाम संबोधित 21 सूत्रीय मांगपत्र सार्वजनिक करते हुए आदिवासी विरासत और अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक संवैधानिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की।

प्रेस वार्ता का नेतृत्व वरिष्ठ आदिवासी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) के संस्थापक महासचिव एवं झारखंड पीपुल्स पार्टी (JPP) के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा ने किया। राजस्थान, झारखंड, असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 10 राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों ने देशभर के आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर अपनी बात रखी।

मीडिया को संबोधित करते हुए सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि लगभग 20 करोड़ आदिवासियों की ओर से राष्ट्रपति के नाम संबोधित यह 21 सूत्रीय मांगपत्र लोकतांत्रिक और संवैधानिक माध्यमों से आदिवासी पहचान को मान्यता दिलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, जो स्वयं देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति हैं, से आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों, सांस्कृतिक विरासत और अस्मिता की रक्षा के लिए आवश्यक पहल करने की अपील की गई है।

21 सूत्रीय मांगपत्र में आगामी जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड, भारत के मूल निवासियों के रूप में आदिवासी पहचान की मान्यता, आदिवासी भाषाओं एवं संस्कृति का संरक्षण, वनाधिकार अधिनियम तथा पेसा (PESA) कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी वीरों के योगदान को उचित स्थान, असम के चाय जनजाति समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी पालन तथा नीति निर्माण में आदिवासी समुदायों की अधिक भागीदारी जैसी मांगें शामिल हैं।

बेसरा ने कहा कि यदि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों से निर्वाचित सांसद और विधायक आदिवासियों के संवैधानिक मुद्दों को संसद और विधानसभाओं में नहीं उठाते हैं तो DARBAR देशव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन आरक्षित सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों की भूमिका की समीक्षा करेगा और यदि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की लगातार उपेक्षा होती रही तो जनमत तैयार किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी आदिवासी समुदाय विस्थापन, शोषण और कई बार उग्रवाद के नाम पर गलत तरीके से निशाना बनाए जाने जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। उन्होंने अनुसूचित जनजातियों को प्राप्त संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की।

राजस्थान की डॉ. हीरा मीणा ने कहा कि अलग आदिवासी धर्म कोड की मांग आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान को संरक्षित करने से जुड़ी है।

उन्होंने कहा, “देश के प्रत्येक मान्यता प्राप्त धर्म की अपनी अलग पहचान है। आदिवासी समाज की भी अपनी स्वतंत्र आस्था, परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत है। हम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह करते हैं कि जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कॉलम सुनिश्चित कराने हेतु आवश्यक हस्तक्षेप करें, ताकि प्रत्येक आदिवासी समुदाय अपनी धार्मिक पहचान दर्ज करा सके। यह लगभग 20 करोड़ आदिवासियों की पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए आवश्यक है।”

डॉ. मीणा ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यकाल में आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और पहचान की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक पहल की उम्मीद है।

प्रतिनिधियों ने स्वतंत्रता संग्राम में 1857 से पहले हुए आदिवासी विद्रोहों और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भारत के इतिहास में उचित स्थान दिए जाने की भी मांग की।

मांगपत्र में यूनेस्को द्वारा घोषित ‘स्वदेशी भाषाओं का अंतरराष्ट्रीय दशक (2022–2032)’ के प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी भाषाओं के संरक्षण तथा संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि सहित विभिन्न आदिवासी लिपियों के संरक्षण और संवर्धन की भी मांग की गई है।

झारखंड के प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि DARBAR देशभर में जनजागरूकता अभियान चला रहा है और जंतर-मंतर (नई दिल्ली), नासिक, आसनसोल, रायपुर सहित विभिन्न स्थानों पर जनसभाओं के माध्यम से आदिवासी मुद्दों को उठाता रहा है।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों को “वनवासी” नहीं कहा जाना चाहिए क्योंकि वे भारत के मूल निवासी हैं और उनकी अपनी स्वतंत्र आस्था, संस्कृति और परंपराएं हैं।

उन्होंने कहा, “हम आदिवासी हैं और प्रकृति आधारित जीवन दर्शन के अनुयायी हैं। हमें वनवासी नहीं कहा जाना चाहिए। हमारी अपनी अलग पहचान, संस्कृति, विरासत और आस्था है, जिसे संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए।”

प्रेस वार्ता को महाराष्ट्र के विश्वनाथ वाकड़े, बिहार की श्रीमती रेखा सोरेन, मध्य प्रदेश के भुवन सिंह कोरम, झारखंड के मनोरंजन महाली, गुजरात के प्रवीण परगी तथा ओडिशा के रामचंद्र हांसदा ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने राज्यों में आदिवासी समुदायों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति से इन मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करने तथा संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करने की अपील की।

कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार सिंह (जमशेदपुर) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने देशभर से आए प्रतिनिधियों और मीडिया के सदस्यों का आदिवासी समाज के मुद्दों पर संवाद में भाग लेने के लिए आभार व्यक्त किया।

DARBAR ने कहा कि राष्ट्रपति के नाम संबोधित 21 सूत्रीय मांगपत्र का उद्देश्य आदिवासी पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाना, संवैधानिक सुरक्षा को मजबूत करना तथा आदिवासी समुदायों के अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित करना है। संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इन मांगों पर सकारात्मक हस्तक्षेप करने तथा केंद्र और राज्य सरकारों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित करने की अपील की।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।