विद्युत जामवाल की फिटनेस सीक्रेट्स: 3 साल की उम्र से कलारीपयट्टू, संघर्षों से मजबूती तक! मेंटल-पावर, फिजिकल बैलेंस, सहज योग प्रैक्टिस – जानें कैसे बने वो रियल लाइफ वारियर।
विद्युत जामवाल सिर्फ एक एक्शन स्टार नहीं हैं। वो तीन साल की उम्र से Kalaripayattu की ट्रेनिंग ले रहे हैं। उनके लिए ये सिर्फ बॉडी को फिट रखने का तरीका नहीं, बल्कि माइंड और आत्मा को मजबूत करने की एक पूरी जर्नी है—एक ऐसा रास्ता जो फिजिकल, मेंटल और स्पिरिचुअल तीनों लेवल पर इंसान को बदल देता है।
विद्युत का बचपन आसान नहीं था। आर्मी फैमिली में जन्मे, पापा की ट्रांसफर की वजह से पूरे भारत घूमे। छोटी उम्र में ही पापा का देहांत हो गया, मम्मी स्पिरिचुअल हो गईं और केरल के आश्रम में ज्यादा समय बिताती थीं। विद्युत सिर्फ 3 साल के थे जब उन्होंने Kalaripayattu शुरू किया – वो भी आश्रम में गुरुओं से। 13 साल तक वोां रहे, जहां बॉडी के साथ-साथ माइंड को भी कंट्रोल करना सिखाया गया। ये संघर्ष था – घर-परिवार से दूर, सख्त ट्रेनिंग, इंजरीज़, उनकी प्रैक्टिस ने उन्हें इतना मजबूत बनाया। विद्युत जामवाल की फिटनेस जर्नी इंस्टा पर देखकर फैंस भी इंस्पायर हो रहे हैं!
फिटनेस का राज क्या है?
विद्युत कहते हैं कि फिटनेस सिर्फ मसल्स नहीं, बल्कि मेंटल स्ट्रेंथ और फिजिकल बैलेंस का खेल है। Kalaripayattu उनकी लाइफलाइन है – ये एंशिएंट इंडियन मार्शल आर्ट है जो फ्लेक्सिबिलिटी, रिफ्लेक्स, बैलेंस, एंड्यूरेंस सब कुछ देता है। वो दिन में दो बार ट्रेनिंग करते हैं: सुबह 5 घंटे (6 से 11 बजे) मार्शल आर्ट्स और Kalaripayattu पर फोकस, शाम को 4 घंटे और। 5 दिन मार्शल आर्ट्स, 2 दिन वेट ट्रेनिंग। बॉडीवेट एक्सरसाइज जैसे पुल-अप्स, स्क्वॉट्स, हैंडस्टैंड वॉक, एनिमल फ्लो, योगा, ब्रिदिंग – सब कुछ।
वो प्रोटीन को मिथ मानते हैं! वेजिटेरियन (व Egan) हैं, प्लांट-बेस्ड फूड से एनर्जी लेते हैं। कहते हैं कि बॉडी को नेचुरल तरीके से यूज करो, मशीनों पर नहीं। इंजरी से रिकवर करने के लिए भी Kalaripayattu के Marma टेक्नीक्स यूज करते हैं। मेंटली? वो कहते हैं – “बैलेंस तभी मिलता है जब इम्बैलेंस को जानो”। Kalaripayattu ने उन्हें सिखाया कि फाइटिंग के साथ-साथ कब रुकना है, कब शांत रहना है। योगा और मेडिटेशन से माइंड को ग्राउंडेड रखते हैं।
सहज जैसी प्रैक्टिस उनके लिए सालाना रूटीन है – जहां वो नेचर से कनेक्ट होकर, न्यूरोरेसेप्टर्स और प्रोप्रियोसेप्टर्स को एक्टिवेट करते हैं। इससे सेंसरी फीडबैक बेहतर होता है, बैलेंस-कोऑर्डिनेशन बढ़ता है, बॉडी अवेयरनेस आती है, फोकस शार्प होता है और ग्राउंडिंग का गहरा अहसास।
आज 45 साल के हो चुके (10 दिसंबर 1980 को जन्मे), 5’11” हाइट, 75 kg वजन – लेकिन वो बहुत ज़्यादा फिट और मस्कुलर पावरफुल लगते हैं क्योंकि फिटनेस उनकी लाइफस्टाइल है, नहीं तो कोई ट्रेंड। संघर्ष ने उन्हें ताकत दी, Kalaripayattu ने उन्हें वारियर बनाया।
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