23 अक्टूबर 4004 ईसा पूर्व को धरती की रचना की तारीख मानने वाली अशर क्रोनोलॉजी क्या है? जानिए बिशप जेम्स अशर की गणना, बाइबिल से इसका संबंध और विज्ञान इस बारे में क्या कहता है।
डबलिन: कल्पना कीजिए कि कोई आपसे कहे कि धरती का जन्मदिन 23 अक्टूबर है और इसकी शुरुआत ठीक आज से 6,029 साल पहले हुई थी। सुनने में यह दावा हैरान करने वाला लग सकता है, क्योंकि वैज्ञानिक शोध के अनुसार पृथ्वी की उम्र अरबों साल है। लेकिन इतिहास में एक ऐसा दौर भी रहा है, जब एक ईसाई धर्मगुरु ने बाइबिल में दिए गए विवरणों और ऐतिहासिक गणनाओं के आधार पर दुनिया की शुरुआत की एक निश्चित तारीख तय करने की कोशिश की थी।
यह तारीख थी 23 अक्टूबर 4004 ईसा पूर्व। आयरलैंड के आर्कबिशप जेम्स अशर से जुड़ी इस गणना को अशर क्रोनोलॉजी (Ussher Chronology) कहा जाता है। इस कालक्रम के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को दुनिया की रचना के 6,029 साल पूरे होने का हिसाब बनता है।
इस तारीख की खासियत सिर्फ इतनी नहीं है कि इसमें दुनिया की शुरुआत का दिन और साल बताया गया। इसके पीछे 17वीं सदी के एक विद्वान का लंबा अध्ययन, बाइबिल की वंशावलियों की गणना और उस समय उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी को जोड़ने का प्रयास भी शामिल है। आइए जानते हैं कि अशर कौन थे, उन्होंने यह तारीख कैसे निकाली और आज इस विचार को किस नजरिए से देखा जाता है।
क्या है अशर क्रोनोलॉजी?
अशर क्रोनोलॉजी दुनिया के इतिहास का एक कालक्रम है, जिसे आयरलैंड के धर्मगुरु और विद्वान जेम्स अशर ने तैयार किया था। इसमें बाइबिल में दर्ज घटनाओं और पीढ़ियों के आधार पर सृष्टि की शुरुआत से लेकर बाद के ऐतिहासिक घटनाक्रमों तक का समय निर्धारित करने का प्रयास किया गया।
अशर का पूरा नाम जेम्स अशर था। उनका जन्म 1581 में हुआ था और वह 17वीं सदी में आयरलैंड के चर्च के प्रमुख धर्मगुरुओं में गिने जाते थे। उन्होंने धर्मशास्त्र के साथ इतिहास और कालक्रम के अध्ययन में भी काफी समय लगाया। उनका उद्देश्य बाइबिल में वर्णित घटनाओं को एक व्यवस्थित ऐतिहासिक समयरेखा में रखना था।
साल 1650 में अशर ने लैटिन भाषा में अपनी महत्वपूर्ण कृति Annales veteris testamenti, a prima mundi origine deducti प्रकाशित की। इसका आशय पुराने नियम में दर्ज घटनाओं के आधार पर दुनिया की शुरुआत से इतिहास का क्रम तैयार करना था। उनकी मृत्यु के बाद 1658 में इस कृति का अंग्रेजी अनुवाद The Annals of the World शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
इस काम में अशर ने बाइबिल की वंशावलियों, व्यक्तियों की उम्र, पीढ़ियों के बीच के अंतराल और कुछ ऐतिहासिक घटनाओं की तारीखों को जोड़कर पीछे की ओर गणना की। इसी प्रक्रिया से वह दुनिया की शुरुआत के लिए 4004 ईसा पूर्व तक पहुंचे।
बाइबिल की वंशावलियों से कैसे निकाली गई दुनिया की उम्र?
अशर की गणना का मुख्य आधार बाइबिल का पुराना नियम था। इसमें आदम से लेकर आगे की पीढ़ियों, प्रमुख व्यक्तियों की उम्र और उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख मिलता है। अशर ने इन विवरणों को कालक्रम में रखकर यह अनुमान लगाया कि सृष्टि की शुरुआत से लेकर बाइबिल में दर्ज बाद की घटनाओं तक कितना समय बीता होगा।
उन्होंने केवल व्यक्तियों की उम्र जोड़कर निष्कर्ष नहीं निकाला, बल्कि प्राचीन इतिहास और उपलब्ध कालक्रम संबंधी जानकारियों को भी अपने अध्ययन में शामिल किया। उन्होंने बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर के शासनकाल और उससे जुड़ी ऐतिहासिक तारीखों को आधार बनाकर पीछे की ओर गणना की। इस तरह बाइबिल में वर्णित घटनाओं और ऐतिहासिक समयरेखा के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया गया।
सृष्टि की शुरुआत के लिए सटीक तारीख चुनने में अशर ने खगोलीय गणनाओं और ऋतुओं के बदलाव को भी ध्यान में रखा। उन्होंने माना कि सृष्टि की शुरुआत शरद विषुव यानी उस समय के आसपास हुई होगी, जब दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है। बाइबिल में अदन के बगीचे और फलों से संबंधित वर्णन को देखते हुए उन्होंने शरद ऋतु को भी अपनी गणना के लिए महत्वपूर्ण माना।
इन मान्यताओं और गणनाओं के आधार पर अशर ने 4004 ईसा पूर्व में अक्टूबर की 23 तारीख को सृष्टि के पहले दिन के रूप में चुना। हालांकि, यह तारीख बाइबिल में सीधे नहीं लिखी गई है।
क्या अशर ने दुनिया के जन्म का समय भी बताया था?
अशर क्रोनोलॉजी से जुड़ी एक आम धारणा यह है कि दुनिया की रचना 23 अक्टूबर 4004 ईसा पूर्व को सुबह 9 बजे हुई थी। लेकिन इस दावे में अक्सर अलग-अलग विद्वानों की गणनाओं को एक साथ मिला दिया जाता है।
ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, अशर ने सृष्टि की शुरुआत को 23 अक्टूबर से जोड़ा था, लेकिन उनकी गणना में समय की शुरुआत 22 अक्टूबर की शाम या रात ढलने के समय से मानी जाती है। यानी तारीख को समझते समय उस समय की समय-गणना और दिन शुरू होने की परंपरा का ध्यान रखना जरूरी है।
सुबह 9 बजे का समय अक्सर इंग्लैंड के विद्वान जॉन लाइटफुट से जुड़ी गणनाओं के साथ मिलाकर बताया जाता है। लाइटफुट ने भी बाइबिल के आधार पर सृष्टि की शुरुआत की तारीख तय करने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी गणना अशर से अलग थी। इसलिए 23 अक्टूबर 4004 ईसा पूर्व को सुबह 9 बजे का निश्चित समय बताना अशर के मूल निष्कर्ष का सटीक वर्णन नहीं माना जाता।
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अशर की तारीख इतनी प्रसिद्ध कैसे हुई?
अशर की गणना उनके जीवनकाल में और उसके बाद भी काफी चर्चित रही। इसकी एक बड़ी वजह उनका विद्वान के रूप में सम्मान और उनके कालक्रम का बाइबिल के कुछ प्रकाशित संस्करणों में शामिल होना था।
साल 1701 में इंग्लैंड के चर्च द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किंग जेम्स बाइबिल के एक संस्करण में अशर के कालक्रम को शामिल किया गया। इसके बाद बाइबिल के कई संस्करणों में सृष्टि और दूसरी घटनाओं की अनुमानित तारीखें हाशिये पर दी जाने लगीं। इससे उनकी गणना को व्यापक पहचान मिली और लंबे समय तक बहुत से पाठकों ने इसे दुनिया के इतिहास की एक महत्वपूर्ण समयरेखा के रूप में देखा।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं था कि दुनिया की उम्र को लेकर सभी विद्वान एकमत थे। अलग-अलग धार्मिक विद्वानों ने बाइबिल के विवरणों की अलग व्याख्याएं कीं और सृष्टि की शुरुआत के लिए दूसरी तारीखें भी प्रस्तावित कीं। अशर की गणना प्रसिद्ध जरूर हुई, लेकिन वह प्राचीन दुनिया की उम्र तय करने का एकमात्र विचार नहीं था।
विज्ञान के अनुसार कितनी पुरानी है धरती?
अशर क्रोनोलॉजी में पृथ्वी की उम्र लगभग 6,000 साल मानी गई है, लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक शोध इस अनुमान का समर्थन नहीं करते। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, पृथ्वी की उम्र लगभग 4.54 अरब साल है। यह अनुमान चट्टानों, उल्कापिंडों और उनमें मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन पर आधारित है।
वैज्ञानिक पृथ्वी की उम्र का अनुमान लगाने के लिए रेडियोमेट्रिक डेटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें कुछ रेडियोधर्मी तत्वों के समय के साथ दूसरे तत्वों में बदलने की दर का अध्ययन किया जाता है। इस प्रक्रिया से वैज्ञानिक चट्टानों और खनिजों की उम्र का आकलन करते हैं। पृथ्वी की सबसे पुरानी चट्टानों और खनिजों के अध्ययन के साथ उल्कापिंडों से मिले प्रमाण भी पृथ्वी के निर्माण का समय समझने में मदद करते हैं।
इस वैज्ञानिक अनुमान और अशर की गणना के बीच बहुत बड़ा अंतर है। जहां अशर ने बाइबिल की वंशावलियों और ऐतिहासिक विवरणों के आधार पर सृष्टि की शुरुआत का समय निर्धारित किया था, वहीं आधुनिक भूविज्ञान भौतिक प्रमाणों और वैज्ञानिक परीक्षणों पर निर्भर करता है।
आज भी क्यों चर्चा में रहती है अशर क्रोनोलॉजी?
अशर की गणना आज भी इतिहास, धर्म और विज्ञान के संबंधों पर होने वाली चर्चाओं में सामने आती है। इसकी वजह यह है कि यह उस दौर की विद्वतापूर्ण कोशिश का उदाहरण है, जब बाइबिल में वर्णित घटनाओं को उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी और कालगणना के साथ जोड़कर दुनिया का पूरा इतिहास तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था।
यह विषय इस बात को भी समझने का अवसर देता है कि किसी प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए इस्तेमाल की गई पद्धति कितनी महत्वपूर्ण होती है। धार्मिक कालक्रम में पवित्र ग्रंथों की व्याख्या और उनमें दर्ज पीढ़ियों का विवरण आधार बन सकता है, जबकि विज्ञान में निष्कर्षों को भौतिक प्रमाणों, परीक्षणों और नए शोध के आधार पर परखा जाता है।
इसलिए 23 अक्टूबर की तारीख का महत्व केवल एक कथित जन्मदिन तक सीमित नहीं है। यह जेम्स अशर के ऐतिहासिक अध्ययन और दुनिया की उम्र को समझने के अलग-अलग तरीकों की कहानी भी बताती है।

