अमेरिका-ईरान संघर्ष एक बार फिर बढ़ रहा है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी में मिसाइल और ड्रोन दागे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है।
तेहरान/ वाशिंगटन, डीसी: अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने की सैन्य खामोशी के बाद संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में नए हवाई हमले किए हैं। अमेरिका के मुताबिक, इन हमलों का निशाना ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, संचार केंद्र, समुद्री सैन्य परिसंपत्तियां और होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकाने थे।
इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और इराक में अमेरिकी ठिकानों तथा अमेरिकी हितों से जुड़े स्थानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट किए जाने की जानकारी दी है। इस तरह पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष फिर सीधे सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य है। दुनिया के महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल यह समुद्री रास्ता अगर लंबे समय तक बाधित रहता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग, महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
आखिर अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला क्यों किया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ताजा अमेरिकी कार्रवाई ईरान के IRGC की उन कथित गतिविधियों के जवाब में की गई, जिनसे वाणिज्यिक जहाजों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को खतरा पैदा हुआ था।
अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों को बाधित करने के लिए बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रहा था। इससे पहले रविवार, 30 अगस्त को अमेरिका ने लारक द्वीप के आसपास उन ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाने की बात कही थी, जिनका इस्तेमाल समुद्री सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था।
इसके बाद मंगलवार, 2 सितंबर को अमेरिका ने हमलों का एक और दौर चलाया। CENTCOM के अनुसार, इसमें ईरानी एयर डिफेंस साइट, रडार सिस्टम, समुद्री सैन्य संसाधन, माइन-लेइंग क्षमता और कम्युनिकेशन साइट शामिल थीं।
अमेरिकी पक्ष इन हमलों को सीमित और लक्षित कार्रवाई बता रहा है। उसका कहना है कि उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना नहीं, बल्कि वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ तत्काल खतरे को खत्म करना है।
ईरान का जवाबी पलटवार
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा इराक में अमेरिकी मौजूदगी से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया। जॉर्डन की वायु रक्षा ने कई मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी। अमेरिकी अधिकारियों ने भी किसी बड़े अमेरिकी हताहत की पुष्टि नहीं की है।
ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि जो देश अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में सहयोग करेंगे, वे उसके जवाब से अछूते नहीं रहेंगे। इससे संघर्ष के ईरान-अमेरिका तक सीमित रहने के बजाय पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैलने का खतरा बढ़ गया है।
बहरीन, कुवैत और दूसरे खाड़ी देश भी दबाव में
अमेरिका और ईरान की सीधी लड़ाई का असर अब आसपास के देशों पर भी पड़ रहा है। बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण ये देश विशेष रूप से संवेदनशील स्थिति में हैं।
ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के बाद खाड़ी देशों ने अपनी वायु रक्षा व्यवस्था सक्रिय कर दी है। इससे पहले भी ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों और अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।
इन देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अमेरिका के सुरक्षा साझेदार हैं, लेकिन साथ ही वे ईरान के पड़ोसी भी हैं। इसलिए किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में उनके सैन्य ठिकाने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सीधे खतरे में आ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना युद्ध का सबसे बड़ा केंद्र?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए इसका महत्व बेहद बड़ा है।
हालिया घटनाक्रम में ईरान की ओर से इस समुद्री रास्ते को बाधित करने की धमकियों और जहाजों पर हमलों ने चिंता बढ़ाई है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, सोमवार को करीब 1.7 करोड़ बैरल तेल होर्मुज से होकर गुजरा। यह आंकड़ा बताता है कि सैन्य तनाव के बावजूद यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

यही कारण है कि होर्मुज में किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर तुरंत तेल बाजार पर दिखाई देता है। 2 सितंबर को ताजा अमेरिकी-ईरानी हमलों के बीच तेल कीमतों में फिर तेजी दर्ज की गई और बाजार में यह चिंता बढ़ी कि अगर जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित हुई तो आपूर्ति संकट गहरा सकता है।
ईरान में नागरिकों के मारे जाने की खबर
ताजा अमेरिकी हमलों के बीच दक्षिणी ईरान के सिरिक काउंटी के कुहस्तक इलाके से नागरिकों के मारे जाने की खबर भी सामने आई है।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी हमला एक ऐसे घर पर हुआ जहां शादी समारोह चल रहा था। ईरानी पक्ष ने कम से कम पांच लोगों के मारे जाने और दर्जनों लोगों के घायल होने का दावा किया है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक घायलों की संख्या 63 तक पहुंच चुकी है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल बताए गए हैं।
अमेरिकी सेना ने इन दावों का उल्लेख करते हुए कहा है कि वह नागरिकों को निशाना नहीं बनाती। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि नागरिक हताहतों की शुरुआती जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया से आई है। इसलिए इस घटना के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
संघर्ष में फिर क्यों आई तेजी?
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से संघर्ष चल रहा है। हालांकि, हाल के करीब एक महीने तक दोनों पक्षों के बीच बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई नहीं हुई थी।
इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति में सैन्य दबाव के साथ आर्थिक दबाव पर भी जोर दिखाई दिया। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था से अलग करने के लिए नए प्रतिबंधों की तैयारी की। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर आर्थिक दबाव को और बढ़ाने के संकेत दिए हैं और नए बैंक प्रतिबंधों की संभावना भी जताई है।
लेकिन होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा और ईरानी सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बढ़ने के बाद सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो गई।
ट्रंप ने भी दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह अमेरिकी हमलों का जवाब देता है तो उसे और कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई होने पर अमेरिका दोबारा हमला करेगा और वह कार्रवाई ज्यादा कड़े स्तर की हो सकती है।
ट्रंप का यह रुख बताता है कि अमेरिका फिलहाल पीछे हटने के बजाय सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर दबाव बनाए रखना चाहता है।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के सामने अपनी चुनौतियां भी हैं। लंबे संघर्ष के कारण अमेरिकी हथियार भंडार पर दबाव, क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती और घरेलू राजनीतिक प्रतिक्रिया ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ईरान की स्थिति भी आसान नहीं
दूसरी ओर ईरान लंबे संघर्ष के आर्थिक और सैन्य दबाव से जूझ रहा है। अमेरिकी और इजरायली हमलों ने उसकी सैन्य क्षमता और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। लेकिन तेहरान ने अब तक अमेरिकी दबाव के सामने पूरी तरह झुकने के संकेत नहीं दिए हैं।
ईरानी नेतृत्व का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके पास एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दबाव का साधन है। इस मार्ग से गुजरने वाली ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता ईरान को वैश्विक बाजार पर असर डालने का विकल्प देती है।
लेकिन यही रणनीति ईरान के लिए जोखिम भी पैदा करती है। होर्मुज को लंबे समय तक बंद करने या जहाजों पर लगातार हमले करने से खाड़ी के पड़ोसी देश उसके खिलाफ जा सकते हैं और अमेरिका को व्यापक सैन्य कार्रवाई का आधार मिल सकता है।
तेल बाजार पर सीधा असर
अमेरिका-ईरान संघर्ष का सबसे तत्काल वैश्विक प्रभाव तेल बाजार पर साफ देखा जा सकता है।
होर्मुज से तेल और गैस की बड़ी मात्रा गुजरती है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव के साथ व्यापारी भविष्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका को कीमतों में शामिल करना शुरू कर देते हैं।
2 सितंबर को ताजा हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड करीब 4 प्रतिशत तक चढ़कर लगभग 93.93 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI करीब 89.48 डॉलर तक पहुंचा।
अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
पूर्ण युद्ध के बढ़ते आसार
अमेरिका और ईरान के बीच पहले भी सैन्य कार्रवाई हुई है, लेकिन दोनों पक्षों ने कई बार संघर्ष को व्यापक युद्ध में बदलने से रोकने की कोशिश की है।
इस बार खतरा इसलिए ज्यादा है क्योंकि सैन्य कार्रवाई अब केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। जॉर्डन, बहरीन, इराक, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों की सुरक्षा भी इससे जुड़ चुकी है।
इसके अलावा होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगों और वाणिज्यिक जहाजों का मुद्दा किसी भी छोटी घटना को बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल सकता है।
फिलहाल तस्वीर यही है कि करीब एक महीने की सैन्य खामोशी खत्म हो चुकी है। अमेरिका ने ईरान में नए हमले किए हैं, ईरान ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई की है और राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे और कड़े हमलों की चेतावनी दी है।
ऐसे में अगले कुछ दिन यह तय करने में अहम होंगे कि यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या फिर अमेरिका-ईरान संघर्ष एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में प्रवेश करता है।
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