PM एंडी बर्नहम ने पद संभालने के दूसरे दिन ब्रिटेन के घरेलू बिजली बिलों पर 5% VAT खत्म करने का ऐलान किया। सरकार के मुताबिक, परिवारों को सालाना करीब £45 की राहत मिलेगी।
लंदन: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने पद संभालने के दूसरे ही दिन घरेलू बिजली बिलों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। बर्नहम सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से घरेलू बिजली बिलों पर लगने वाले 5% VAT को एक साल के लिए हटाने की घोषणा की है।
सरकार का अनुमान है कि इस कदम से Ofgem के वार्षिक Price Cap में करीब £45 (करीब 5,800 रुपये) की कमी आएगी और इसका लाभ बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा। इस फैसले को बर्नहम के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला बड़ा Cost-of-Living Relief Measure माना जा रहा है।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब ब्रिटेन के परिवार लंबे समय से महंगाई, ऊंचे घरेलू खर्च, ऊर्जा कीमतों और कमजोर आर्थिक वृद्धि के दबाव से जूझ रहे हैं। बर्नहम ने सत्ता संभालते समय ब्रिटेन के लोगों को तत्काल राहत देने का वादा किया था और बिजली बिलों में कटौती उसी दिशा में उनका पहला ठोस कदम है।
हालांकि, यह फैसला ब्रिटेन के लोगों को कितनी वास्तविक राहत देगा, इसे समझने के लिए देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, ऊर्जा बाजार और बर्नहम के सत्ता में आने की पूरी कहानी को समझना जरूरी है।
कैसे बने एंडी बर्नहम ब्रिटेन के प्रधानमंत्री?
एंडी बर्नहम का प्रधानमंत्री बनना ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। वह इससे पहले Greater Manchester के Mayor के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और Labour Party के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं।
जुलाई 2026 में Labour Party के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। बर्नहम ने पार्टी नेतृत्व के लिए भारी समर्थन हासिल किया। 13 जुलाई 2026 तक उन्हें 349 Labour MPs का समर्थन मिल चुका था। यह संख्या इतनी बड़ी थी कि किसी अन्य उम्मीदवार के लिए नेतृत्व चुनाव में प्रवेश करने के लिए जरूरी नामांकन हासिल करना संभव नहीं रह गया था।
इसके बाद बर्नहम ने 20 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभाला। इससे पहले Keir Starmer ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और राजा Charles III से मुलाकात की। इसके बाद बर्नहम Buckingham Palace पहुंचे, जहां राजा ने उन्हें नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। बर्नहम ने प्रस्ताव स्वीकार किया और इसके साथ ही वह ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए।
प्रधानमंत्री बनने के बाद Downing Street के बाहर अपने पहले भाषण में बर्नहम ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य ब्रिटेन में उम्मीद वापस लाना और देश में बड़े बदलाव करना है। उन्होंने Cost of Living संकट को तत्काल प्राथमिकता देने का संकेत दिया था।
इसके ठीक अगले दिन, 21 जुलाई 2026 को उन्होंने बिजली बिलों पर VAT हटाने की घोषणा कर दी।
क्या है बिजली बिल पर VAT हटाने का फैसला?
ब्रिटेन में घरेलू बिजली बिलों पर वर्तमान में 5% VAT लागू होता है। बर्नहम सरकार ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर 2026 से इस VAT को एक साल के लिए समाप्त किया जाएगा।
सरकार के मुताबिक, इस बदलाव से घरेलू बिजली बिलों में सीधे राहत मिलेगी। अनुमान है कि Ofgem के Price Cap में लगभग £45 की सालाना कमी आएगी। हालांकि, वास्तविक बचत हर परिवार की बिजली खपत और बिल पर निर्भर करेगी।
इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी नई सरकार के आर्थिक नेतृत्व पर होगी। नए Chancellor John Healey ने कहा कि इस साल इस टैक्स कटौती की लागत को सरकार के Digital ID Programme को रद्द करने से मिलने वाली बचत से वित्तपोषित किया जाएगा। यानी सरकार का दावा है कि तत्काल राहत देने के लिए अतिरिक्त उधारी पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा सरकारी खर्च में बदलाव किया जाएगा।
यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बर्नहम ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ही Cost of Living को अपनी राजनीति के केंद्र में रखा था। उन्होंने ऊर्जा बिलों को कम करने के लिए व्यापक सुधारों की बात भी की थी, जिसमें ऊर्जा कीमतों की संरचना और सरकारी नीतिगत शुल्कों को लेकर बदलाव शामिल हैं।
ब्रिटेन को इस फैसले की जरूरत क्यों पड़ी?
Britain में Cost of Living संकट पिछले कई वर्षों से राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रहा है। ऊर्जा संकट, महंगाई, महंगे मकान और किराए, कमजोर वास्तविक आय वृद्धि और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव ने आम परिवारों के बजट को प्रभावित किया है।
ऊर्जा बिल इस समस्या का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं। बिजली और गैस केवल घरेलू खर्च नहीं हैं, बल्कि इनके दाम बढ़ने का असर पूरे अर्थव्यवस्था पर देखा जाता है। जब परिवारों को ऊर्जा पर अधिक खर्च करना पड़ता है, तो उनके पास भोजन, कपड़े, मनोरंजन और अन्य जरूरी चीजों पर खर्च करने के लिए कम पैसा बचता है।
इसके अलावा, ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी व्यवसायों को भी प्रभावित करती है। बिजली और गैस महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
यही कारण है कि बिजली बिलों में राहत को केवल घरेलू उपभोक्ताओं की मदद के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक दबाव को कम करने के उपाय के रूप में भी देखा जा रहा है।
क्या इससे बिजली की कीमतें वास्तव में कम होंगी?
यह समझना जरूरी है कि VAT हटने का मतलब यह नहीं है कि ब्रिटेन में बिजली उत्पादन या ऊर्जा की मूल लागत अचानक कम हो जाएगी।
VAT एक टैक्स है। इसे हटाने से उपभोक्ता के बिल में टैक्स का हिस्सा कम होगा। लेकिन बिजली की थोक कीमतें, नेटवर्क लागत, सप्लाई खर्च और अन्य शुल्क अपनी जगह बने रह सकते हैं।
इसलिए इस फैसले का असर सीमित दायरे में होगा। यदि भविष्य में ऊर्जा की मूल कीमतें बढ़ती हैं, तो VAT हटाने से मिलने वाली बचत उस बढ़ोतरी को पूरी तरह संतुलित नहीं कर पाएगी।
फिर भी, सरकार के लिए यह एक ऐसा उपाय है जिसे अपेक्षाकृत तेजी से लागू किया जा सकता है और जिसका सीधा असर घरेलू बिलों पर दिखाई दे सकता है।
ब्रिटेन में ऊर्जा संकट का असर
ब्रिटेन का ऊर्जा संकट केवल बिजली बिलों की समस्या नहीं है। यह देश की ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक गैस कीमतों और घरेलू ऊर्जा नीति से जुड़ा हुआ है।
यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता ने ब्रिटेन समेत कई देशों पर दबाव बढ़ाया था। इसके बाद भी वैश्विक ऊर्जा बाजार पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है।
जुलाई 2026 में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल और गैस बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऐसी स्थिति में ऊर्जा कीमतों पर भविष्य का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
बर्नहम का Energy Vision क्या है?
बिजली पर VAT हटाना बर्नहम की ऊर्जा नीति का केवल पहला हिस्सा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री बनने से पहले बर्नहम से जुड़े प्रस्तावों में ऊर्जा बिलों पर लगाए जाने वाले कुछ Policy Levies को सामान्य कर व्यवस्था के जरिए वित्तपोषित करने और ऊर्जा की कीमतों को कम करने के उपायों पर चर्चा हुई थी।
एक प्रस्तावित मॉडल के तहत बिजली बिलों से कुछ लागत हटाकर उन्हें व्यापक कर व्यवस्था में स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे बिजली का इस्तेमाल अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है और Heat Pumps जैसी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को अपनाने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐसी व्यापक नीति पर सरकार को वित्तीय लागत और उसके दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना होगा।
बर्नहम की सरकार ऊर्जा और जल क्षेत्र में सार्वजनिक नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में भी विचार कर रही है। हालांकि, ऐसी योजनाओं को लागू करने में लंबा समय लग सकता है और भारी वित्तीय लागत भी आ सकती है।
इस फैसले से आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
1. घरेलू बिजली बिल में सीधी राहत
सबसे पहला और स्पष्ट प्रभाव यह होगा कि बिजली बिल पर VAT हटने से उपभोक्ताओं का भुगतान कम होगा। हालांकि, वास्तविक बचत खपत और बिल की संरचना पर निर्भर करेगी।
2. कम आय वाले परिवारों को मदद
कम आय वाले परिवारों के लिए ऊर्जा बिल आय का बड़ा हिस्सा रखते हैं। ऐसे में छोटी बचत भी उपयोगी हो सकती है। लेकिन £45 की औसत अनुमानित सालाना राहत अकेले Fuel Poverty की समस्या को हल नहीं कर सकती।
3. उपभोक्ता खर्च में वृद्धि
यदि परिवारों को ऊर्जा बिल में कुछ बचत होती है, तो वह पैसा दूसरी आवश्यक चीजों पर खर्च किया जा सकता है। इससे स्थानीय बाजार में उपभोक्ता मांग को मामूली समर्थन मिल सकता है।
4. महंगाई पर सीमित असर
ऊर्जा लागत का असर कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ता है। इसलिए बिजली बिल कम होने से महंगाई पर कुछ अप्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव हो सकता है। हालांकि, केवल VAT हटाने से ब्रिटेन की व्यापक महंगाई समस्या खत्म नहीं होगी।
5. सरकार के राजस्व पर असर
VAT हटाने का दूसरा पहलू सरकारी राजस्व है। सरकार को बिजली बिलों से मिलने वाला VAT छोड़ना पड़ेगा। यही वजह है कि सरकार ने Digital ID Programme को रद्द करके इस साल की लागत को वित्तपोषित करने की बात कही है।
क्या यह फैसला राजनीतिक भी है?
बर्नहम सरकार के लिए इस फैसले को निश्चित रूप से राजनीतिक महत्तव के रूप में देखा जा रहा है।
वह ऐसे समय प्रधानमंत्री बने हैं जब ब्रिटेन में जनता का राजनीति और सरकारों पर भरोसा कमजोर होने की चर्चा लगातार होती रही है। बर्नहम ने अपने पहले भाषण में कहा कि उनकी सरकार लोगों को उम्मीद देने और राजनीति में बदलाव लाने का प्रयास करेगी।
ऐसे में प्रधानमंत्री बनने के दूसरे दिन ही बिजली बिलों पर टैक्स हटाने की घोषणा एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश मानी जा रही है।
हालांकि, आलोचक यह सवाल उठा सकते हैं कि क्या £45 की औसत बचत वास्तव में उस आर्थिक दबाव के मुकाबले पर्याप्त है जिसका सामना ब्रिटिश परिवार कर रहे हैं।
यानी सरकार को अब यह साबित करना होगा कि यह केवल शुरुआती राहत नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है।
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