नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और उनसे बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों का असर भारत में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं, पेट्रोल-डीजल और सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही हैं।
इस पर चिंताएं ज़ाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई (रविवार) को एक रैली के दौरान देश से 7 अपील की थी, जिसमें उन्होंने लोगों से सार्वजनिक बस या मेट्रो से सफर करने का भी आह्वान किया था।
दिल्ली में जल्द दिखेंगे बदलाव
पीएम मोदी की इस अपील का असर बहुत जल्द राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में देखने को मिल सकता है। दरअसल, भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने मध्य पूर्व में बिगड़ते हालात और पीएम मोदी की अपील को सज्ञान में लेते हुए एक प्रेस रिलीज में इस बात का जिक्र किया है, कि आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने और सतत सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग के लिए सहायक उपाय अपनाए जाएंगे।
इन योजनाओं पर विशेष काम होगा
MoHUA की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में जिन योजनाओं का जिक्र है, उसमें –
- निजी वाहनों पर निर्भरता और सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में भीड़भाड़ को कम करना
- जीपीआरए (GPRA) कॉलोनियों, मेट्रो स्टेशनों और सेंट्रल विस्टा कार्यालयों के बीच निर्बाध फर्स्ट-माइल और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रदान करना
- परिवहन मांग प्रबंधन (TDM) उपायों के माध्यम से व्यस्त समय (peak-hour) के यात्री वितरण में सुधार करना।
- एनसीएमसी (NCMC) कार्डों के आसान उपयोग की सुविधा प्रदान करना शामिल हैं।
बसों और मेट्रो के बीच बढ़ेगा तालमेल
इन योजनाओं के तहत बसों और मेट्रो के बीच तालमेल को भी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। अब प्रत्येक जीपीआरए (GPRA) कॉलोनी से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
साथ ही येलो लाइन के निकटतम सभी मेट्रो स्टेशन के लिए सुबह के समय 10 मिनट की फ्रिक्वेंसी पर बस सेवाएं उपलब्ध होंगी ताकि सार्वजनिक वाहनों से यात्रा कर रहे लोगों की सुविधा में इजाफा किया जा सके और लोग व्यक्तिगत वाहनों की आदत से बचें।
क्या हैं पीएम मोदी की 7 अपील
आपको बता दें कि 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे संकट और उससे भारत पर पड़ने वाली मार पर चिंता जाहिर करते हुए देशवासियों से सात अपीलें की थी।
इसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, खाद्य तेल का सीमित उपयोग करने, प्राकृतिक खेती अपनाने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, विदेशी यात्राओं को टालने और वर्क फ्रॉम होम करने का आह्वान किया था।
