करीब दो दशक तक चले निठारी मामलों में सुरेंद्र कोली को कभी 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। बाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद उसकी सभी संबंधित दोषसिद्धियां खत्म हो गईं।
हरिद्वार: उत्तर प्रदेश के नोएडा के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार, 18 सितंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, कोली का शव भूपतवाला क्षेत्र में उसकी चाय की दुकान के भीतर मिला। शुरुआती जानकारी में इसे आत्महत्या माना जा रहा है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। मौके से फिलहाल कोई सुसाइड नोट मिलने की जानकारी नहीं है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
करीब दो दशक तक देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहे निठारी कांड में सुरेंद्र कोली कभी मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया था और उसे कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे 12 मामलों में बरी कर दिया था और जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों में बरी किए जाने को बरकरार रखा। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 13वें और आखिरी लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी कर दिया।
हरिद्वार में मिला शव
पुलिस के अनुसार, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में रह रहा था और हाल के दिनों में उसने चाय की दुकान शुरू की थी। शुक्रवार को वह दुकान के अंदर मृत मिला। शुरुआती पुलिस जांच में फांसी लगाए जाने की बात सामने आई है।
अधिकारियों ने घटनास्थल की जांच की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि मौत से पहले की उसकी गतिविधियां क्या थीं और क्या किसी तरह का व्यक्तिगत या अन्य विवाद सामने आया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने प्रारंभिक स्तर पर पारिवारिक विवाद की आशंका का जिक्र किया है, लेकिन इसे अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। अभी तक किसी सुसाइड नोट के मिलने की जानकारी नहीं है। इसलिए मौत के कारण और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम तथा पुलिस जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
आखिर क्या था निठारी कांड?
निठारी कांड वर्ष 2005 और 2006 के दौरान नोएडा के निठारी इलाके में महिलाओं और बच्चों के लापता होने से जुड़ा था। यह मामला दिसंबर 2006 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया, जब सेक्टर-31 स्थित मकान डी-5 के पीछे और आसपास के इलाके में मानव अवशेष बरामद हुए। यह मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था।
सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में दर्ज पृष्ठभूमि के अनुसार, निठारी इलाके में 2005 से ही महिलाओं और बच्चों के लापता होने की शिकायतें सामने आने लगी थीं।
दिसंबर 2006 में नाले की सफाई और आसपास की जगहों की जांच के दौरान मानव अवशेष मिलने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज की और सुरेंद्र कोली तथा मोनिंदर सिंह पंढेर को हिरासत में लिया गया।
शुरुआती जांच में कई गुमशुदगियों को एक-दूसरे से जोड़कर देखा गया। बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ली। सीबीआई ने अलग-अलग घटनाओं को लेकर कई प्राथमिकी दर्ज कीं और सुरेंद्र कोली के खिलाफ हत्या, अपहरण, बलात्कार तथा सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमे चलाए गए।
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सुरेंद्र कोली कैसे बना मामले का मुख्य आरोपी
जांच के दौरान पुलिस और बाद में सीबीआई ने उसके बयान तथा कथित बरामदगी को अभियोजन के मामले का महत्वपूर्ण आधार बनाया।
2007 में CBI ने जांच संभालने के बाद कोली से पूछताछ की। उसके कथित बयान के आधार पर कुछ वस्तुओं और मानव अवशेषों की बरामदगी का दावा किया गया। अभियोजन पक्ष ने बाद के मुकदमों में इसी तरह के बयानों और बरामदगी को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया।
हालांकि, यही साक्ष्य बाद की न्यायिक प्रक्रिया में सबसे बड़े सवालों में से एक बन गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में कहा कि कोली की धारा 164 के तहत दर्ज स्वीकारोक्ति को स्वैच्छिक और विश्वसनीय मानने में गंभीर दिक्कतें थीं। अदालत ने उसकी लंबी पुलिस हिरासत, कानूनी सहायता और बयान दर्ज किए जाने की परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना।
13 मामलों में मौत की सजा
निठारी से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली के खिलाफ कुल 13 मामलों में मुकदमे चले जिनमें उसे अलग-अलग समय पर दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि इन मामलों का कानूनी सफर एक जैसा नहीं रहा।
एक मामले में 15 वर्षीय लड़की की हत्या से संबंधित मुकदमे में उसकी दोषसिद्धि को 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। उस समय अदालत के सामने उसकी स्वीकारोक्ति और कथित बरामदगी सहित कई साक्ष्य रखे गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय उसकी मौत की सजा को बरकरार रखा।
लेकिन बाद में इस मामले की कानूनी स्थिति भी बदल गई। जनवरी 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। अदालत के सामने दया याचिका के निपटारे में हुई लंबी देरी का मुद्दा भी था। इसके बाद भी वह जेल में रहा और निठारी से जुड़े अन्य मामलों में कानूनी लड़ाई जारी रही।
2023 में आया बड़ा मोड़
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उस स्वीकारोक्ति की परिस्थितियों पर विचार किया जिसे अभियोजन मामले का महत्वपूर्ण आधार मान रहा था। अदालत के मुताबिक, कोली करीब 60 दिनों तक लगातार पुलिस हिरासत में रहा था। बयान दर्ज किए जाने के दौरान कानूनी सहायता और उसकी स्वेच्छा को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाए।
हाईकोर्ट के फैसले में फोरेंसिक साक्ष्यों पर भी चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि डी-5 मकान की व्यापक तलाशी के बावजूद वहां ऐसे मानव रक्त, अवशेष या अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिले जो अभियोजन की पूरी कहानी को पुष्ट कर सकें। डीएनए जांच से कुछ मानव अवशेषों की पहचान में मदद मिली, लेकिन अदालत के अनुसार इससे यह साबित नहीं हो सका कि उन हत्याओं को कोली ने ही अंजाम दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रहा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीबीआई और कुछ पीड़ित परिवारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल की गईं। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में कोली और सह-आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही 12 मामलों में कोली की बरी होने की स्थिति बरकरार रही।
करीब दो दशक बाद मिली थी कोली को रिहाई
नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुरेंद्र कोली निठारी से जुड़े सभी 13 मामलों में बरी हो गया। अदालत ने उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले या कार्यवाही में वांछित न हो।
यह निठारी मामले के इतिहास में बड़ा कानूनी मोड़ था। जिस व्यक्ति को कभी 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, वही व्यक्ति आखिरकार सभी संबंधित मामलों में दोषमुक्त हो गया।
मोनिंदर सिंह पंढेर का क्या हुआ
निठारी मामले में सुरेंद्र कोली के साथ मोनिंदर सिंह पंढेर भी आरोपी बनाया गया था। पंढेर निठारी के डी-5 मकान का मालिक था, जहां कोली घरेलू सहायक के रूप में काम करता था।
पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में अदालतों ने उसे बरी कर दिया। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ बचे दो मामलों में भी उसे बरी कर दिया था। इसके बाद वह जेल से बाहर आ गया।

इस तरह निठारी मामले में कोली और पंढेर दोनों के खिलाफ चली लंबी कानूनी प्रक्रिया आखिरकार दोषसिद्धि कायम रहने के बजाय बरी होने पर समाप्त हुई।
सुरेंद्र कोली की मौत ने फिर बढ़ाई मामले की चर्चा
निठारी कांड सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में जांच, फोरेंसिक साक्ष्य, स्वीकारोक्ति, पुलिस हिरासत और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों का उदाहरण भी बना।
इस मामले की शुरुआत गुमशुदा बच्चों और महिलाओं की शिकायतों से हुई थी। बाद में मानव अवशेषों की बरामदगी ने पूरे देश को झकझोर दिया। लेकिन लगभग दो दशक तक चली जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद भी कोली के खिलाफ अभियोजन का मामला टिक नहीं सका।
सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि अदालत का काम केवल गंभीर अपराध के लिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि दोषसिद्धि विश्वसनीय, स्वीकार्य और कानून के मुताबिक साक्ष्यों पर आधारित है या नहीं।
फिलहाल पुलिस उसकी मौत को आत्महत्या मानकर जांच कर रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और फोरेंसिक जांच भी जारी है। किसी सुसाइड नोट की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए आत्महत्या के पीछे किसी निश्चित कारण के बारे में अभी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।


