RPMC परीक्षा में पेपर लीक की आशंका के बीच जयपुर से बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने कथित नकल रैकेट का भंडाफोड़ कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
जयपुर: देश में लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों के बीच एक बार फिर राजस्थान सुर्खियों में है। सोमवार (29 जून) से जयपुर में आयोजित RPMC (राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल) परीक्षा विवादों में घिर गई।
पहले परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र वितरण में कथित गड़बड़ियों और छात्रों के हंगामे की खबर सामने आई, फिर पुलिस जांच में एक कथित नकल रैकेट का खुलासा हुआ। मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब देश पहले से ही विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक तथा नकल सिंडिकेट के आरोपों को लेकर चिंतित है। जयपुर की इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) और राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल से जुड़े पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं 29 जून से शुरू होनी थीं। जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इसी केंद्र पर परीक्षा के दौरान अव्यवस्था और कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और छात्रों के आरोपों के अनुसार कुछ परीक्षार्थियों को समय पर प्रश्नपत्र मिल गए, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल पर बैठे कई छात्र लंबे समय तक प्रश्नपत्र का इंतजार करते रहे। इससे परीक्षा केंद्र पर तनाव बढ़ गया और विरोध शुरू हो गया।
परीक्षा केंद्र में मची अफरा-तफरी
छात्रों के हंगामे का मुख्य कारण परीक्षा प्रबंधन की भारी लापरवाही और प्रश्नपत्र वितरण में हुई देरी थी। प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर व्यवस्था पूरी तरह असंगठित थी। सभी कमरों में एक साथ प्रश्नपत्र नहीं पहुंचाए गए, जिसके कारण कई छात्र समय पर अपनी परीक्षा शुरू ही नहीं कर पाए।
इस अव्यवस्था से छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने परीक्षा केंद्र के भीतर ही उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। आक्रोशित छात्रों ने परीक्षा केंद्र के अंदर कुर्सियां फेंक दीं, जरूरी कागजात हवा में बिखेर दिए और केंद्र की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में परीक्षा केंद्र के भीतर मची इस भारी अफरा-तफरी और अशांति के माहौल को साफ देखा जा सकता है।
पुलिस को कैसे मिली जानकारी?
जयपुर पुलिस को इस पूरे मामले की सबसे पहली भनक 27 जून को मिली, जब उन्हें एक बेहद पुख्ता खुफिया सूचना (इंटेलिजेंस इनपुट) प्राप्त हुई। इस गुप्त सूचना में यह साफ तौर पर बताया गया था कि कुछ संदिग्ध लोग पैरामेडिकल परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को अवैध रूप से नकल कराने और उन्हें पास कराने के बदले में मोटी रकम वसूल रहे हैं।
गिरोह का मुख्य निशाना ऐसे कमजोर छात्र और बैकलॉग वाले परीक्षार्थी थे, जिन्हें अनुचित तरीकों से परीक्षा पास कराने का विशेष आश्वासन दिया जा रहा था।
इस गंभीर इनपुट के मिलते ही खोराबीसल थाना क्षेत्र की पुलिस तुरंत हरकत में आई और उन्होंने मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया।
पुलिस की इस स्पेशल टीम ने बिना देरी किए संदिग्ध व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की और उनकी हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखना शुरू कर दिया। इस सुनियोजित ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने संदिग्धों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी जब्त किए।
इन पुख्ता सबूतों ने नकल रैकेट के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में पुलिस की सबसे बड़ी मदद की।
चार लोगों की गिरफ्तारी
जांच के बाद पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें झुंझुनूं स्थित एस करन कॉलेज के पैरामेडिकल विभागाध्यक्ष कृष्ण कुमार सैनी, रेडियोलॉजी विभाग के व्याख्याता शंकरलाल जाट, तथा प्रभा मेमोरियल पीजी कॉलेज से जुड़े रामकृष्ण मंडीवाल और देवकृष्ण मंडीवाल शामिल हैं।
पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने कुछ छात्रों को परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बनाई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि परीक्षा केंद्र पर ऐसे पर्यवेक्षक (invigilators) तैनात कराने की कोशिश की गई जो छात्रों को नकल करने में मदद कर सकें।
कितने छात्रों को फायदा पहुंचाने की योजना थी?
पुलिस जांच के अनुसार, इस कथित नकल योजना के जरिए लगभग 40 से 45 छात्रों को नाजायज फायदा पहुंचाने की पूरी तैयारी थी। इस रैकेट के जाल में फंसे अधिकांश छात्र वे थे, जो प्रथम वर्ष में बैकलॉग (अनुत्तीर्ण विषयों) का सामना कर रहे थे और किसी भी तरह परीक्षा पास करने के लिए इस नेटवर्क के सीधे संपर्क में आए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि इन मजबूर और कमजोर छात्रों से परीक्षा पास कराने के बदले में एक बहुत बड़ी रकम वसूली गई थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रति छात्र करीब 5.5 लाख रुपये तक लिए गए थे।
हालांकि, पुलिस द्वारा लगाए गए इन सभी गंभीर आरोपों की अंतिम और कानूनी पुष्टि अदालत के फैसले और आगे की गहन जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी।
पुलिस को मिले सबूत
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के ठिकानों से कई महत्वपूर्ण और पुख्ता सबूत मिले हैं। जांचकर्ताओं ने मौके से कुछ संदिग्ध डायरियां, मोबाइल फोन और भारी मात्रा में परीक्षा से जुड़े दस्तावेज बरामद किए। इन जब्त की गई डायरियों में कथित तौर पर परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के नाम, उनके रोल नंबर और पैसों के लेन-देन का पूरा कच्चा चिट्ठा दर्ज था।
इसके अलावा, पुलिस को कुछ उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) की डिजिटल पीडीएफ प्रतियां भी मिली हैं, जो संदिग्धों के पास पहले से मौजूद थीं। पुलिस का दावा है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन और दस्तावेजों की शुरुआती जांच में लाखों रुपये के आर्थिक लेन-देन के पुख्ता रिकॉर्ड और परीक्षा से जुड़े जरूरी नोट्स भी मिले हैं, जो इस पूरे नकल गिरोह के अपराध को साबित करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे।
परीक्षा केंद्र को रद्द किया गया
पूरा घटनाक्रम और गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने सख्त कदम उठाया। काउंसिल ने तत्काल प्रभाव से प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज के परीक्षा केंद्र को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
इस केंद्र पर परीक्षा प्रबंधन पूरी तरह विफल रहा था और नकल रैकेट का खुलासा होने से सुचिता प्रभावित हुई थी।
इसके साथ ही, काउंसिल ने कानून व्यवस्था और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए DCLT, DDT और DECGT सहित कई महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं को भी स्थगित करने का निर्णय लिया।
परिषद ने अपने आधिकारिक बयान में साफ कहा है कि आगे की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करने के बाद ही नई परीक्षा तिथियों की घोषणा की जाएगी।
छात्रों की अतिरिक्त शिकायतें
कुछ छात्रों ने परीक्षा की बदहाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। परीक्षार्थियों का कहना है कि उन्हें कॉलेज के मुख्य कमरों के बजाय बाहर अस्थायी टेंटों के नीचे बैठाकर परीक्षा दिलाई गई, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा, कई छात्रों ने यह शिकायत भी की कि अलग-अलग कमरों और मंजिलों पर सुविधाएं एक समान नहीं थीं, और कुछ जगहों पर बुनियादी व्यवस्थाओं की भारी कमी थी।
हालांकि, छात्रों द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद, परीक्षा केंद्र के भीतर से आई इन शिकायतों ने परीक्षा संचालन की गुणवत्ता, प्रबंधन की तैयारी और काउंसिल की जिम्मेदारी पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या यह वास्तव में Paper Leak था?
30 जून तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों ने अभी तक इस घटना को पूरी तरह “पेपर लीक” घोषित नहीं किया है। पुलिस ने मुख्य रूप से एक कथित नकल और परीक्षा हेरफेर रैकेट का पर्दाफाश किया है।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ विशिष्ट छात्रों को परीक्षा में अनुचित सहायता और पास कराने की अवैध तैयारी की जा रही थी।
हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कुछ नाराज छात्रों ने शुरुआत में पेपर लीक की आशंका जरूर जताई थी, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया है कि पूरा प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही बाहर आ चुका था।
शिक्षा विभाग की बड़ी विफलता
देशभर में परीक्षाओं की गोपनीयता और सुचिता भंग होने का एक अंतहीन सिलसिला चल पड़ा है। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर NEET-UG परीक्षा की धांधली ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिससे करोड़ों होनहार छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया।
इस बड़े झटके से छात्र अभी उबर भी नहीं पाए थे कि महाराष्ट्र में TET (Teacher Eligibility Test) का पेपर लीक होने की खबर सामने आ गई, जिसके चलते परीक्षा को अचानक स्थगित करना पड़ा।
इन राष्ट्रीय और प्रांतीय घटनाओं की कड़ियों को जोड़कर देखें, तो राजस्थान में आरपीएमसी (RPMC) पैरामेडिकल परीक्षा के दौरान सामने आया सुनियोजित नकल और हेरफेर रैकेट कोई अकेली घटना नहीं लगती। यह सीधे तौर पर शिक्षा विभाग के सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर राज्य स्तरीय टेक्निकल मेडिकल कोर्स तक, हर जगह शिक्षा माफिया का जाल बिछा हुआ है। RPMC की यह ताजा लापरवाही यह साबित करती है कि परीक्षा नियामक संस्थाएं एक सुरक्षित और पारदर्शी ढांचा तैयार करने में पूरी तरह नाकाम रही हैं। यह बदहाली ईमानदार छात्रों के मनोबल और पूरे शिक्षा तंत्र की साख को गहरी चोट पहुंचा रही है।
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