Friday, 31 July 2026
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Gaokao Exam 2026 : भारत के परीक्षा विवादों के बीच चीन में हुई गाओकाओ परीक्षा, जानिए क्यों इसे दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा माना जाता है

भारत में पेपर लीक के बीच चीन ने एक बार फिर मिसाल कायम करते हुए दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा आयोजित की है। 7 जून से शुरू हुई इस परीक्षा में ऐसा क्या है खास, आइए जानते हैं।

नई दिल्ली/ बीजिंग: भारत में हाल ही में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे विवादों ने एक बार फिर परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इन घटनाओं के बीच, दुनिया का ध्यान एक बार फिर चीन की उस परीक्षा प्रणाली की ओर गया है जिसे “गाओकाओ (Gaokao)” कहा जाता है। इसे दुनिया की सबसे कठिन विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा माना जाता है।

चीन में करीब 1.3 करोड़ छात्र हर साल इस परीक्षा में बैठते हैं। यह परीक्षा तय करती है कि किस छात्र को देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलेगा और किसका शैक्षणिक भविष्य किस दिशा में जाएगा।

आखिर क्या है Gaokao Exam?

गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय स्तर की विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा है, जिसमें माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वाले छात्र बैठते हैं। यह परीक्षा सिर्फ एक टेस्ट नहीं बल्कि लाखों छात्रों के करियर का एक निर्णायक मोड़ माना जाता है।

इस परीक्षा की कठिनाई का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन की लगभग पूरी शिक्षा व्यवस्था इसी एक परीक्षा के इर्द-गिर्द घूमती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही छात्र को देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है।

कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या इतनी अधिक होती है कि इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्रवेश परीक्षा सिस्टम माना जाता है।

1.3 करोड़ छात्र हर साल देते हैं परीक्षा

2026 के गाओकाओ में लगभग 12.9 मिलियन (लगभग 1.3 करोड़) छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। हालांकि यह संख्या पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम है, फिर भी यह दुनिया के किसी भी परीक्षा सिस्टम से कहीं ज्यादा अधिक है।

यह गिरावट चीन की बदलती जनसंख्या संरचना और रोजगार बाजार की चुनौतियों से जुड़ी हुई है। युवा बेरोजगारी दर बढ़ने और नौकरी के अवसरों में अनिश्चितता के कारण कई छात्र अब पारंपरिक विश्वविद्यालय शिक्षा के बजाय व्यावसायिक प्रशिक्षण की ओर भी रुख कर रहे हैं।

फिर भी गाओकाओ का दबाव कम नहीं हुआ है। यह परीक्षा आज भी चीन में सामाजिक और आर्थिक सफलता का सबसे बड़ा रास्ता मानी जाती है।

परीक्षा के समय रुक जाता है पूरा चीन

Gaokao की सबसे बड़ी खासियत इसकी तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था है। परीक्षा के दौरान माहौल को पूरी तरह शांत और सुरक्षित बनाने के लिए कई कड़े कदम उठाए जाते हैं।

इस समय शहरों में ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता है और परीक्षा केंद्रों के आसपास शोर मचाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इसके साथ ही हर तरह के निर्माण कार्य रोक दिए जाते हैं और पुलिस व प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, परीक्षा के दौरान कई जगह ऐसा प्रतीत होता है मानो जैसे “पूरे देश की रफ्तार थम-सी गई हो”। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि छात्रों को बिना किसी बाधा के परीक्षा देने का माहौल मिल सके।

कड़ी सुरक्षा के बीच होती है परीक्षा

गाओकाओ को चीन में अत्यंत संवेदनशील राष्ट्रीय प्रक्रिया माना जाता है, इसलिए इसकी सुरक्षा व्यवस्था किसी सैन्य ऑपरेशन से कम नहीं होती। इसके तहत प्रश्न पत्र अत्यंत सुरक्षित स्थानों पर तैयार किए जाते हैं और कई मामलों में पेपर प्रिंटिंग को उच्च सुरक्षा क्षेत्रों या नियंत्रित सुविधाओं में किया जाता है।

परिवहन के दौरान प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रहती है और परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी के साथ CCTV का इस्तेमाल होता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि प्रश्न पत्रों को अत्यधिक सुरक्षित वातावरण में तैयार किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की लीक की संभावना न रहे।

पेपर लीक रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग

चीन ने गाओकाओ में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है, जिसमें फेस रिकग्निशन सिस्टम, ड्रोन निगरानी, मेटल डिटेक्टर, स्मार्ट डिवाइस ब्लॉकेज और AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं।

इसके अलावा हाल के वर्षों में स्मार्ट ग्लास और अन्य हाई-टेक डिवाइसेज़ से होने वाली नकल को रोकने के लिए भी विशेष जांच अभियान चलाए गए हैं।

नकल करने पर जेल तक की सजा

गाओकाओ में नकल करना केवल परीक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी अपराध माना जाता है। अगर कोई छात्र या व्यक्ति परीक्षा में धोखाधड़ी करता है तो उसका परीक्षा परिणाम रद्द हो सकता है और उसकी भविष्य की परीक्षाओं पर रोक लग सकती है।

इसके अलावा गंभीर मामलों में दोषी को 3 से 7 साल तक की जेल और जुर्माना भी हो सकता है। यह सख्ती ही है जिसकी वजह से चीन अपनी परीक्षा प्रणाली को दुनिया की सबसे सुरक्षित प्रणाली बताता है।

परीक्षा के दबाव में छात्रों की जिंदगी

गाओकाओ की तैयारी चीन में छात्रों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा मानी जाती है। कई रिपोर्ट्स और सोशल विश्लेषण बताते हैं कि छात्र लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं और उनकी दिनचर्या अत्यंत अनुशासित होती है। इस परीक्षा में प्रतिस्पर्धा का स्तर बहुत ऊंचा होता है और इसे पास करना कई बार छात्रों के लिए “जीवन बदलने वाला क्षण” माना जाता है।

भारत की NEET परीक्षा से हो रही Gaokao की तुलना

भारत में हाल ही में NEET और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर विवाद देखने को मिले हैं, इसी संदर्भ में चीन की गाओकाओ प्रणाली की तुलना की जा रही है।

दोनों देशों की परीक्षाओं में समानता यह है कि दोनों ही लाखों छात्रों के भविष्य तय करती हैं, दोनों ही अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हैं और दोनों ही शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का आधार हैं। लेकिन अंतर यह है कि चीन में गाओकाओ की सुरक्षा व्यवस्था अत्यधिक केंद्रीकृत और सख्त मानी जाती है, जबकि भारत में हाल के वर्षों में पेपर लीक और प्रशासनिक चुनौतियाँ चर्चा में रही हैं।

ये भी पढ़ें :- Education System : भारत और जापान की शिक्षा व्यवस्था में कितना फर्क है? जानिए कुछ चौंकाने वाले तथ्य

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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