आर्चर 1969 में महज 29 साल की उम्र में ब्रिटिश संसद के लिए चुने गए थे। बाद में वह मार्गरेट थैचर के दौर में कंजरवेटिव पार्टी के डिप्टी चेयरमैन भी बने, लेकिन विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा।
लंदन: मशहूर ब्रिटिश लेखक और पूर्व कंजरवेटिव सांसद जेफ्री आर्चर का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके प्रकाशक हार्परकॉलीन्स के मुताबिक, आर्चर की सोमवार को उनके घर पर अचानक और शांतिपूर्वक मौत हुई। खास बात यह है कि उनका निधन उनकी आखिरी किताब के वैश्विक प्रकाशन से ठीक एक दिन पहले हुआ। वह अपनी अंतिम किताब पर काम करते हुए आखिरी समय तक सक्रिय थे।
आर्चर का जीवन किसी उपन्यास की कहानी से कम नहीं रहा। उन्होंने एक तरफ ‘केन एंड एबेल’, ‘नॉट अ पेनी मोर, नॉट अ पेनी लेस’, ‘द प्रॉडिगल डॉटर’, ‘ए मैटर ऑफ ऑनर’ और ‘द क्लिफ्टन क्रॉनिकल्स’ जैसी लोकप्रिय किताबों के जरिए दुनिया भर में करोड़ों पाठक बनाए, तो दूसरी तरफ ब्रिटिश राजनीति में सांसद और कंजरवेटिव पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में पहचान हासिल की।
उनकी राजनीतिक यात्रा बाद में एक बड़े कानूनी विवाद और जेल की सजा के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बावजूद उन्होंने लेखन में वापसी की और कई दशकों तक लगातार लिखते रहे।
आखिरी किताब के रिलीज से ठीक पहले हुआ निधन
जेफ्री आर्चर की अंतिम किताब ‘Adam & Eve’ 6 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होनी थी। उन्होंने जनवरी 2026 में घोषणा की थी कि यह उनका आखिरी उपन्यास होगा। उस समय उन्होंने कहा था कि 85 वर्ष की उम्र में उन्हें लगा कि वह इस उपन्यास के बाद अपने लेखन को इससे आगे नहीं ले जा पाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि वह भविष्य में छोटी कहानियां या अन्य लेखन जारी रख सकते हैं।
उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ‘Adam & Eve’ की शुरुआत 1940 में एडॉल्फ हिटलर के एक भाषण और उस पर विंस्टन चर्चिल की प्रतिक्रिया के बाद हुई थी। आर्चर ने दोनों नेताओं के भाषणों का अध्ययन किया और इतिहासकारों से सलाह लेने के बाद उपन्यास की कहानी विकसित की। किताब का एक अहम सवाल यह है कि अगर हिटलर ने 15 सितंबर 1940 को ‘ऑपरेशन सी लॉयन’ को लेकर अपने फैसले तीन बार नहीं बदले होते तो द्वितीय विश्व युद्ध का परिणाम क्या अलग हो सकता था।

आर्चर ने अपने अंतिम उपन्यास को लेकर काफी उत्साह दिखाया था। उन्होंने इसे अपने पिछले चर्चित उपन्यास ‘Kane and Abel’ से भी बेहतर कहानी बताया था। हालांकि यह दावा उनकी व्यक्तिगत राय थी, लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि वह अपनी अंतिम रचना को लेकर कितने आश्वस्त थे।
क्या है ‘एडम एंड ईव’ की कहानी?
‘एडम एंड ईव’ की कहानी प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के समय शुरू होती है। किताब के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, 11 नवंबर 1918 को दो बच्चों का जन्म होता है। दोनों का जन्म एक ही दिन होता है, लेकिन उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग होती है।
एक बच्चा एक चरवाहे का बेटा है, जबकि दूसरी एक अर्ल की बेटी है। दोनों को अलग-अलग सामाजिक दुनिया में पाला जाता है, लेकिन आगे चलकर उनके बीच प्रेम का रिश्ता बनता है। कहानी का केंद्र वर्ग, प्रेम और युद्ध के बीच बदलती दुनिया है। आधिकारिक विवरण के मुताबिक, इन दोनों का रिश्ता आगे होने वाले दूसरे युद्ध की दिशा को प्रभावित करता है।
इस उपन्यास के जरिए आर्चर ने एक बार फिर इतिहास और निजी रिश्तों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की। युद्ध की पृष्ठभूमि, सामाजिक वर्गों का अंतर, प्रेम और सत्ता जैसे विषय उनके लेखन में पहले भी दिखाई देते रहे हैं।
‘Kane and Abel’ ने बनाया विश्व प्रसिद्ध लेखक
जेफ्री आर्चर का साहित्यिक करियर 1976 में प्रकाशित उपन्यास ‘Not a Penny More, Not a Penny Less’ से शुरू हुआ। हालांकि उनकी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता ‘Kane and Abel’ से मिली, जो 1979 में प्रकाशित हुआ था।
यह किताब दो ऐसे पुरुषों की कहानी है, जिनका जन्म अलग सामाजिक परिस्थितियों में होता है और जिनकी जिंदगी आगे चलकर महत्वाकांक्षा, धन, कारोबार और प्रतिस्पर्धा से जुड़ जाती है। किताब की कहानी कई दशकों और पीढ़ियों तक फैली हुई है।

‘Kane and Abel’ आर्चर की सबसे सफल किताबों में शामिल रही। द गार्जियन के मुताबिक, इसकी 3.4 करोड़ से अधिक प्रतियां बिकीं और यह 119 देशों में 47 भाषाओं में प्रकाशित हुई।
यही वह किताब थी जिसने आर्चर को ब्रिटेन से बाहर भी एक बड़े पाठक वर्ग तक पहुंचाया। बाद में उन्होंने लगातार ऐसे उपन्यास लिखे जिनमें तेज गति वाली कहानी, महत्वाकांक्षा, पारिवारिक संघर्ष, राजनीति, पैसा और अप्रत्याशित मोड़ प्रमुख तत्व रहे।
ये भी पढ़ें :- Arijit Singh India Tour 2027: रिटायरमेंट के बाद फिर लाइव आएंगे अरिजीत सिंह, 9 शहरों में होगा भव्य कॉन्सर्ट
300 मिलियन से ज्यादा किताबें बिकीं
आर्चर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके प्रकाशक और अन्य प्रमुख स्रोतों के मुताबिक उनकी किताबों की 30 करोड़ से अधिक प्रतियां दुनिया भर में बिक चुकी हैं। उनका लेखन 100 से अधिक देशों के पाठकों तक पहुंचा।
उनकी लोकप्रिय किताबों में ‘शैल वी टेल द प्रेसिडेंट?’, ‘द प्रॉडिगल डॉटर’, ‘फर्स्ट अमंग इक्वल्स’, ‘ए मैटर ऑफ ऑनर’, ‘एज द क्रो फ्लाइज’, ‘द फोर्थ एस्टेट’, ‘द इलेवनथ कमांडमेंट’ और ‘संस ऑफ फॉर्च्यून’ शामिल हैं।
बाद के वर्षों में उन्होंने ‘द क्लिफ्टन क्रॉनिकल्स’ जैसी लंबी श्रृंखला भी लिखी। विलियम वारविक पर आधारित उनकी किताबों ने भी पाठकों के बीच लोकप्रियता हासिल की।
उनके लेखन की सबसे बड़ी ताकत जटिल कहानी को तेजी से आगे बढ़ाना और पाठक को अगले घटनाक्रम के बारे में उत्सुक बनाए रखना मानी जाती थी। आलोचकों ने कई बार उनके लेखन की शैली पर सवाल उठाए, लेकिन पाठकों के बीच उनकी लोकप्रियता लंबे समय तक कायम रही।
राजनीति से शुरू हुई सार्वजनिक पहचान
लेखन से पहले जेफ्री आर्चर ब्रिटिश राजनीति में सक्रिय थे। 1969 में महज 29 साल की उम्र में वह कंजरवेटिव पार्टी के सांसद चुने गए और लिंकनशायर के लाउथ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वह 1974 तक हाउस ऑफ कॉमन्स में रहे।
हालांकि आर्थिक मुश्किलों के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और लेखन की तरफ ज्यादा ध्यान दिया। उनकी शुरुआती किताबों की सफलता ने उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूत किया।

लेकिन कुछ वर्षों बाद वह फिर ब्रिटिश राजनीति में लौटे। 1985 में उन्हें कंजरवेटिव पार्टी का डिप्टी चेयरमैन बनाया गया। उस समय वह प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर के नेतृत्व वाली पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए थे। हालांकि 1986 में एक विवाद के बाद उन्हें इस पद से इस्तीफा देना पड़ा।
मानहानि के मामले ने बदली जिंदगी
आर्चर के जीवन का सबसे विवादित अध्याय 1987 से जुड़ा था। ब्रिटिश अखबार डेली स्टार ने उन पर एक सेक्स वर्कर को पैसे देने का आरोप लगाया था। आर्चर ने अखबार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया और मुकदमा जीतने के बाद उन्हें भारी हर्जाना मिला।
लेकिन कई साल बाद यही मामला उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की वजह बना। जांच में सामने आया कि 1987 के मुकदमे के दौरान आर्चर ने अदालत को गलत जानकारी दी थी और झूठे सबूत पेश करने की कोशिश की थी।
1999 में वह लंदन के मेयर पद के लिए कंजरवेटिव पार्टी के उम्मीदवार चुने गए थे, लेकिन इसी मामले से जुड़े आरोप सामने आने के बाद उन्हें उम्मीदवारी छोड़नी पड़ी। 2001 में अदालत ने उन्हें झूठी गवाही देने और न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप में चार साल की जेल की सजा सुनाई। उन्होंने करीब दो साल जेल में बिताए और जुलाई 2003 में रिहा हुए।
जेल में भी नहीं रुका लेखन
जेफ्री आर्चर की साहित्यिक यात्रा का एक अनोखा हिस्सा उनकी जेल की जिंदगी भी रही। जेल में रहते हुए उन्होंने अपने अनुभवों को तीन हिस्सों वाली ‘ए प्रिसन डायरी’ श्रृंखला में दर्ज किया।
इसके तीन हिस्से ‘Hell’, ‘Purgatory’ और ‘Heaven’ नाम से प्रकाशित हुए। इनमें उन्होंने जेल में बिताए समय, कैदियों, जेल प्रशासन और अपने व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन किया।
इस दौरान उन्होंने अपने लेखन को पूरी तरह नहीं छोड़ा। जेल के अनुभवों ने भी उनके काम को एक नया विषय दिया। उनकी यह क्षमता कि बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच भी वह लिखते रहे, उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।
हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भी रहे
राजनीतिक विवाद के बावजूद आर्चर को 1992 में लाइफ पीयर बनाया गया और वह हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य बने। वह 2024 तक ऊपरी सदन के सदस्य रहे, जिसके बाद उन्होंने अपनी सदस्यता से सेवानिवृत्ति ले ली।
इस तरह उनका सार्वजनिक जीवन ब्रिटिश राजनीति और साहित्य, दोनों से लंबे समय तक जुड़ा रहा। वह उन लोगों में रहे जिनके बारे में ब्रिटेन में साहित्यिक उपलब्धियों के साथ-साथ राजनीतिक विवादों की भी चर्चा होती रही।
पत्नी मैरी और परिवार का साथ
जेफ्री आर्चर के निजी जीवन में उनकी पत्नी डेम मैरी आर्चर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। दोनों की शादी 1966 में हुई थी और 2026 में उन्होंने अपनी शादी की 60वीं वर्षगांठ पूरी की। मैरी आर्चर वैज्ञानिक होने के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने अपने करियर और सार्वजनिक जिम्मेदारियों के साथ आर्चर के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में भी उनका साथ दिया।
आर्चर के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में कानूनी विवाद और जेल की सजा ने उनके जीवन को और मुश्किल दौर में पहुंचा दिया। इन परिस्थितियों के बावजूद मैरी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं।
दंपति के दो बेटे हैं, विलियम और जेम्स। आर्चर के सार्वजनिक जीवन और साहित्यिक करियर के दौरान परिवार उनके लिए महत्वपूर्ण सहारा बना रहा। राजनीति से लेकर लेखन तक के लंबे सफर में परिवार की मौजूदगी ने उनके निजी जीवन को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

