पॉल बिया 7 जून 2026 को कैमरून से जिनेवा गए और 20 अगस्त को लौटे। 10 सप्ताह से अधिक समय तक देश से बाहर रहने के दौरान उनकी अनुपस्थिति चर्चा में रही। जानिए उनकी विदेश यात्राओं और शासन से जुड़े सवाल।
याउंडे: दुनिया में कुछ नेता ऐसे होते हैं, जो चुनाव जीतने के बाद अपने देश में विकास कार्यों के लिए चर्चा में रहते हैं। कुछ अपने भाषणों और राजनीतिक फैसलों को लेकर सुर्खियां बटोरते हैं। लेकिन कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया की चर्चा का एक अलग ही कारण है। वह अपने देश में कितने समय तक रहते हैं और विदेश में कितने दिन बिताते हैं, यह भी अंतरराष्ट्रीय खबरों का विषय बन जाता है।
93 साल के पॉल बिया 6 नवंबर 1982 से कैमरून के राष्ट्रपति हैं। यानी चार दशक से भी ज्यादा समय से देश की सर्वोच्च राजनीतिक कुर्सी उनके पास है। इस दौरान कई सरकारें आईं और गईं, दुनिया में कई बड़े राजनीतिक बदलाव हुए, लेकिन कैमरून की सत्ता में बिया का दबदबा कायम रहा।
उनकी विदेश यात्राओं को लेकर चर्चा तब और तेज हो जाती है, जब कोई छोटी बताई गई यात्रा कई सप्ताह तक खिंच जाती है। वे जून 2026 में जिनेवा के दौरे पर गए थे और अगस्त 2026 में कैमरून बापस लौटे।
अब सवाल यह है कि जब कोई राष्ट्रपति महीनों तक अपने देश से दूर रहता है, तो प्रशासन कैसे चलता है?
जून में गए जिनेवा, अगस्त में लौटे राष्ट्रपति
पॉल बिया 7 जून 2026 को कैमरून से रवाना हुए थे। राष्ट्रपति कार्यालय ने उनकी यात्रा को यूरोप में एक संक्षिप्त निजी प्रवास बताया था। बाद में उनकी मौजूदगी स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होने की पुष्टि हुई।
शुरुआत में इसे एक सामान्य विदेश यात्रा के रूप में देखा गया, लेकिन समय बीतने के साथ सवाल बढ़ने लगे। राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रहे थे और उनकी वापसी को लेकर भी स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं थी।
आखिरकार 20 अगस्त को वह जिनेवा से चार्टर्ड विमान के जरिए याउंडे के न्सिमालेन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे। वह 10 सप्ताह से अधिक समय तक देश से बाहर रहे थे। यह 1982 में सत्ता संभालने के बाद उनकी सबसे लंबी दर्ज विदेश अनुपस्थिति बताई गई।
उनकी वापसी पर सत्तारूढ़ कैमरून पीपुल्स डेमोक्रेटिक मूवमेंट (सीपीडीएम) के समर्थक राजधानी की सड़कों पर जुटे। राष्ट्रपति अपनी पत्नी चैंटल बिया के साथ मोटरकेड में दिखाई दिए और गाड़ी की आधी खुली खिड़की से समर्थकों की ओर हाथ हिलाया।
44 सालों से सत्ता पर काबिज
पॉल बिया की विदेश यात्राओं को लेकर विवाद केवल 2026 तक सीमित नहीं है। वर्षों से उनकी लंबी गैरमौजूदगी अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों में जगह बनाती रही है। इसी वजह से उन्हें कभी-कभी ‘रोमिंग प्रेसिडेंट’ यानी घूमते रहने वाले राष्ट्रपति के रूप में भी संदर्भित किया गया है।
जिनेवा उनके पसंदीदा ठिकानों में गिना जाता है। स्विट्जरलैंड के अलावा वह फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में भी समय बिताते रहे हैं। हालांकि, उनकी निजी यात्राओं के दौरान की गतिविधियों और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को लेकर कई तरह की अटकलें लगती रही हैं, लेकिन हर अटकल को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
अल जजीरा की अक्टूबर 2024 की एक रिपोर्ट में ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) की जांच का हवाला दिया गया था। उसके मुताबिक, 2018 तक बिया ने आधिकारिक यात्राओं को छोड़कर यूरोप के निजी प्रवासों में कुल मिलाकर लगभग साढ़े चार साल के बराबर समय बिताया था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि 2006 और 2009 में वह साल के लगभग एक-तिहाई हिस्से तक देश से बाहर रहे थे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि विदेश में लंबे समय तक रहना उनके राष्ट्रपति कार्यकाल का पुराना पहलू रहा है।
राष्ट्रपति की सेहत पर उठते सवाल
पॉल बिया की उम्र और सार्वजनिक जीवन में उनकी सीमित मौजूदगी के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर भी लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं। 2024 में भी उनकी कई सप्ताह की अनुपस्थिति के बाद यह सवाल उठा था कि वह कहां हैं और कब लौटेंगे।
हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी अफवाहों और प्रमाणित जानकारी में अंतर करना जरूरी है। सरकार ने अतीत में उनकी सेहत को लेकर उठने वाले सवालों को खारिज किया था और कहा था कि राष्ट्रपति ठीक हैं। लेकिन सार्वजनिक उपस्थिति में उनकी लगातार कमी के कारण ये अटकलें पूरी तरह थमी नहीं।
2024 में कैमरून के गृह मंत्री ने राष्ट्रपति के स्वास्थ्य पर मीडिया में चर्चा करने पर रोक लगाने का आदेश भी दिया था। उस समय सरकार ने इस विषय को सुरक्षा और सार्वजनिक शांति से जोड़कर देखा। इस कदम की आलोचना भी हुई, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की उपलब्धता और स्वास्थ्य से जुड़ी पारदर्शिता सार्वजनिक हित का विषय हो सकती है।
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देश लौट आए, लेकिन नई सरकार का इंतजार जारी
पॉल बिया की 20 अगस्त की वापसी के बाद उम्मीद थी कि वह प्रशासन में बड़े बदलाव कर सकते हैं। लेकिन 17 अक्टूबर 2026 को अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी वापसी के बाद भी नई सरकार की नियुक्ति का इंतजार बना हुआ था।
याउंडे में लोग और राजनीतिक पर्यवेक्षक राज्य प्रसारक की खबरों पर नजर रख रहे थे। रिपोर्ट में एक नागरिक का उदाहरण दिया गया, जो हर कार्यदिवस शाम पांच बजे रेडियो समाचार सुनता था, इस उम्मीद में कि राष्ट्रपति की ओर से कोई ऐसा ऐलान होगा जो राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव का संकेत दे।
अक्टूबर के मध्य तक नई सरकार की घोषणा नहीं हुई थी। उपराष्ट्रपति का पद भी खाली था। ऐसे में राष्ट्रपति की विदेश यात्रा से शुरू हुई चर्चा उनकी वापसी के बाद भी खत्म नहीं हुई, बल्कि शासन की अगली दिशा पर केंद्रित हो गई।
उपराष्ट्रपति का पद क्यों अहम?
कैमरून में राष्ट्रपति की लंबी गैरमौजूदगी और सत्ता के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उपराष्ट्रपति के पद पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। अप्रैल 2026 में संसद ने संवैधानिक संशोधन को मंजूरी देकर इस पद को दोबारा बहाल करने का रास्ता साफ किया। यह पद 1972 में समाप्त कर दिया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, नए प्रावधान के तहत उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति नियुक्त और पद से हटा सकते हैं। राष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या स्थायी रूप से पद संभालने में असमर्थ होने की स्थिति में उपराष्ट्रपति अंतरिम जिम्मेदारी संभाल सकता है।
लेकिन अक्टूबर 2026 के मध्य तक बिया ने इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की थी। इससे सत्ता के भविष्य को लेकर सवाल बने रहे।
कैमरून के संविधान में राष्ट्रपति पद रिक्त घोषित होने की स्थिति में सीनेट के अध्यक्ष की भूमिका का भी प्रावधान है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि स्पष्ट और व्यावहारिक उत्तराधिकार व्यवस्था का अभाव राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ा सकता है।
उपराष्ट्रपति की नियुक्ति का सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि राष्ट्रपति की उम्र 93 वर्ष है और वह चार दशक से अधिक समय से सत्ता में हैं। ऐसे में देश के प्रशासनिक तंत्र को यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसी असाधारण परिस्थिति में जिम्मेदारी किसके पास जाएगी।
2025 का चुनाव और बिया की सत्ता पर बहस
पॉल बिया का लंबा कार्यकाल चुनावी राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने अक्टूबर 2025 के राष्ट्रपति चुनाव में फिर जीत हासिल की और नवंबर में अपना आठवां कार्यकाल शुरू किया। हालांकि, चुनाव के नतीजों पर विवाद हुआ और विपक्ष ने धांधली के आरोप लगाए।
विपक्षी नेता इस्सा चिरोमा बकारी ने चुनाव परिणामों को चुनौती दी और दावा किया कि वास्तविक नतीजे आधिकारिक घोषणा से अलग थे। बिया की पार्टी ने इन दावों को खारिज किया। इसलिए चुनाव को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच मतभेद बने रहे।
बिया के लंबे शासन को समझने के लिए 2008 का संवैधानिक संशोधन भी महत्वपूर्ण है। इस बदलाव के जरिए राष्ट्रपति के कार्यकाल की सीमा समाप्त कर दी गई, जिससे उनके दोबारा चुनाव लड़ने का रास्ता खुला रहा।
आज कैमरून की आबादी करीब तीन करोड़ है और उसका बड़ा हिस्सा युवा है। देश की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। इसका मतलब है कि बहुत से नागरिकों ने अपने पूरे जीवन में बिया को ही राष्ट्रपति के रूप में देखा है।
ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन, रोजगार, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक भागीदारी जैसे सवाल युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय तक एक ही नेता के सत्ता में बने रहने से स्थिरता का तर्क दिया जा सकता है, लेकिन इसके साथ सत्ता में बदलाव और जवाबदेही को लेकर बहस भी स्वाभाविक है।
देश के सामने चुनौतियां और नेतृत्व की जवाबदेही
कैमरून को सुरक्षा और आर्थिक मोर्चों पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। देश के उत्तर में बोको हराम से जुड़ी हिंसा और पश्चिमी अंग्रेजीभाषी क्षेत्रों में अलगाववादी संघर्ष लंबे समय से चिंता का विषय हैं। अर्थव्यवस्था की धीमी प्रगति और युवाओं में असंतोष भी राजनीतिक बहस को प्रभावित करते हैं।
2016 में अंग्रेजीभाषी क्षेत्रों में वकीलों और शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन क्षेत्रों में भेदभाव के आरोपों को लेकर असंतोष बढ़ा और 2017 में सरकार तथा अलगाववादी समूहों के बीच संघर्ष तेज हो गया। इस संकट का समाधान अब भी देश की बड़ी चुनौतियों में शामिल है।
ऐसे हालात में राष्ट्रपति की उपलब्धता और प्रशासन की निरंतरता का सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी देश के सामने सुरक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास जैसी चुनौतियां हों, तो नागरिक यह जानना चाहते हैं कि फैसले कौन ले रहा है और सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं।
कुल मिलाकर, पॉल बिया की कहानी सिर्फ एक ऐसे राष्ट्रपति की कहानी नहीं है जो लंबे समय तक विदेश में रहने को लेकर चर्चा में रहता है। यह उस देश की राजनीति की कहानी भी है, जहां सत्ता चार दशक से अधिक समय से एक ही व्यक्ति के पास है और अब उसकी वापसी के बाद भी जनता सरकार के अगले कदमों का इंतजार कर रही है।

