पीएम मोदी के जन्मदिन पर एक दीया उनकी लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए जलाने की अपील हुई है। इसके साथ ही एक दीया 2026 की प्रमुख दुर्घटनाओं, परीक्षा विवाद और प्रशासनिक मामलों के जरिए जवाबदेही के लिए भी आवश्यक हैं।
नई दिल्ली: आज (17 सितंबर) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन है। देशभर में बधाइयों, सेवा कार्यक्रमों और अलग-अलग आयोजनों के बीच बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने लोगों से शाम 6 से 7 बजे के बीच घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील की है। इस दीये के जरिए प्रधानमंत्री की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने को कहा गया है। बीजेपी का यह कार्यक्रम 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा है।
उधर, प्रधानमंत्री के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर पटना में भी एक अलग तरह का आयोजन हुआ। कालीघाट पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नरेंद्र मोदी के कटआउट का 76 किलो दूध से दुग्धाभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और आरती के साथ प्रधानमंत्री की दीर्घायु की कामना की गई और बाद में मिठाई बांटी गई। यानी जन्मदिन के जश्न में 76 साल की उम्र का हिसाब 76 किलो दूध से लगाया गया।
लेकिन इसी बीच एक दूसरा सवाल भी खड़ा होता है। अगर आज एक दीया प्रधानमंत्री की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए जलाया जा रहा है, तो क्या दूसरा दीया उन लोगों के लिए नहीं जलाना चाहिए जो केंद्र तथा देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारी तंत्र की विफलताओं का शिकार हुए हैं। बात चाहे पेपर लीक की हो, चाहे उन मजदूरों की जो निर्माणाधीन पुलों और सुरंगों में दब गए। उन परिवारों के लिए, जिन्होंने अपने लोगों को आग, इमारत गिरने या दूसरे हादसों में खो दिया।
1) जनवरी 2026: हैदराबाद की आग और सुरक्षा नियमों का सवाल
साल की शुरुआत ही हैदराबाद के नंपल्ली इलाके में एक दर्दनाक अग्निकांड से हुई। जनवरी में चार मंजिला इमारत में फर्नीचर प्रतिष्ठान में आग लगी। इस हादसे में छह लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे। प्रारंभिक जांच में ज्वलनशील सामान के भंडारण और बेसमेंट के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल सामने आए।

यह केवल आग लगने की कहानी नहीं थी। हादसे ने यह सवाल भी उठाया कि व्यावसायिक इमारतों में आग से बचाव के नियमों का पालन कितना प्रभावी ढंग से हो रहा है। अगर खतरनाक सामग्री ऐसी जगह रखी जा रही हो जहां लोगों का रहना या आना-जाना हो, तो कागज पर मौजूद सुरक्षा नियम जमीन पर कितने कारगर हैं?
जनवरी का पहला दीया इसलिए उन छह लोगों की याद में भी हो सकता है।
2) फरवरी 2026: गोपालगंज का पुल और 210 टन का सवाल
फरवरी में बिहार के गोपालगंज का डुमरिया घाट पुल चर्चा में आया। 11 फरवरी की रिपोर्टों के मुताबिक करीब 50 साल पुराने एनएच-27 के इस पुल को एक 210 टन के शिवलिंग के परिवहन के दौरान नुकसान पहुंचा। रिपोर्टों में पुल की क्षमता से जुड़े सवाल और उसके एक बेयरिंग के क्षतिग्रस्त होने का उल्लेख किया गया। इसके बाद यातायात पर निगरानी और भारी वाहनों को लेकर सावधानी बरती गई।
यह घटना सीधे किसी बड़े जनहानि हादसे में नहीं बदली, लेकिन इसने पुराने और महत्वपूर्ण पुलों की क्षमता, रखरखाव और निगरानी पर सवाल जरूर खड़े किए।
यानी फरवरी का सवाल मौतों की संख्या नहीं, बल्कि यह था कि क्या किसी पुल की क्षमता और उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन समय रहते किया जा रहा है?
3) मार्च 2026: गुरुग्राम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हादसा
9 मार्च 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम के बिलासपुर इलाके में एक निर्माणाधीन आवासीय परियोजना के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की विशाल दीवार ढह गई। हादसे में कम से कम 7 मजदूरों की मौत हुई, जबकि 3 अन्य घायल हुए। मलबे में मजदूरों के दबे होने की आशंका के बाद बचाव अभियान चलाया गया।
हादसे के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव और गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया और रिपोर्ट मांगी।
आयोग ने कहा कि यदि सामने आई मीडिया रिपोर्ट सही हैं, तो यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है। घटना ने निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा, सुरक्षा मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
4) अप्रैल 2026: मिर्जापुर में उद्घाटन के 15 दिन बाद टूटा पुल
साल के चौथे महीने अप्रैल में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में गंगा नदी पर बने एक प्लाटून पुल को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट के अनुसार पुल का उद्घाटन 21 मार्च 2026 को हुआ था और करीब 15 दिन बाद उसका एक हिस्सा टूट गया। यह पुल नेवढ़िया घाट और गेगराव घाट को जोड़ता था।

किसी सार्वजनिक परियोजना का उद्घाटन होना सामान्यतः उसके तैयार होने का प्रमाण माना जाता है। लेकिन जब उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद उसकी संरचना में समस्या सामने आती है, तो सवाल निर्माण गुणवत्ता, परीक्षण और निरीक्षण तक पहुंच जाते हैं।
5) मई 2026: NEET UG पेपर लीक मामला
NEET UG पेपर लीक का मामला इस साल मई के महीने में सामने आया था। 3 मई 2026 को NEET UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आई। राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित एक परीक्षा केंद्र से कथित तौर पर एक ऐसा ‘गैजेट’ या दस्तावेज मिलने की बात कही गई, जिसमें 120 से ज्यादा सवाल परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मिलते-जुलते थे।
इसके बाद 12 मई 2026 को सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया। इस मामले ने परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए। करीब 23 लाख छात्रों से जुड़ी इस परीक्षा में कथित लीक की खबर सामने आने के बाद अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई।

मामले को लेकर NTA और शिक्षा मंत्रालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे। विवाद बढ़ने के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पूरे मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता और परीक्षा संचालन व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी।
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6) जून 2026: पेंडिंग प्रोसिक्यूशन सेंक्शन्स मामला
केरल में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की मंजूरी लंबित रहने का मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जून 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के 74 मामले केवल इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रहे थे क्योंकि अभियोजन चलाने के लिए जरूरी अनुमति लंबित थी।
इन मामलों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो या विजिलेंस विभाग द्वारा पूरी की जा चुकी थी और कई मामलों में कानूनी राय भी ली जा चुकी थी। इसके बावजूद संबंधित विभागों के प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर फाइलों पर फैसला नहीं हो सका। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन की मंजूरी के अनुरोध पर निर्धारित समयसीमा में निर्णय लेने का प्रावधान है।
ऐसे मामलों में लंबे समय तक फैसला नहीं होने से जांच एजेंसियों की कार्रवाई प्रभावित होती है और न्यायिक प्रक्रिया में देरी होती है। अभियोजन की मंजूरी का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को अनावश्यक कार्रवाई से सुरक्षा देना है, लेकिन मंजूरी में अत्यधिक देरी होने पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
7) जुलाई 2026: 4,200 करोड़ का एक्सप्रेसवे बारिश के बाद धंसा
जुलाई में उत्तर प्रदेश का 4,200 करोड़ रुपये का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे चर्चा में आया। 13 जुलाई को इसके उद्घाटन के बाद 25 जुलाई को उन्नाव के पास करीब पांच से सात मीटर का हिस्सा धंसने और दरारों की तस्वीरें सामने आईं। NHAI ने इसे लेकर ‘प्रिवेंटिव मेंटेनेंस’ और सतही समस्या की बात कही, जबकि विपक्ष ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
4,200 करोड़ रुपये की परियोजना अगर शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद मरम्मत की जरूरत में पहुंच जाए, तो उसकी गुणवत्ता और निगरानी की जांच होना स्वाभाविक है।
8) अगस्त 2026: डीप-टेक फंड (Deep-Tech Fund) आवंटन घोटाला
अगस्त 2026 में केंद्र सरकार के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड के तहत डीप-टेक कंपनियों को दी गई वित्तीय सहायता को लेकर सवाल उठे। जांच के मुताबिक, फंड के पहले चरण में 124 आवेदनों में से 22 निजी कंपनियों को कुल ₹2,192 करोड़ के सॉफ्ट लोन मंजूर किए गए। इनमें से 15 कंपनियों के निवेश या कारोबारी संबंध 12 सदस्यीय चयन समिति के सात सदस्यों से जुड़े पाए गए। इन 15 कंपनियों को कुल ₹1,377 करोड़ से अधिक, यानी करीब 62 प्रतिशत राशि मंजूर हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, चयन समिति के कुछ सदस्यों के पास संबंधित कंपनियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष निवेश हित थे। इससे संभावित हितों के टकराव और सार्वजनिक धन के आवंटन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे। हालांकि, समिति के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने अपने हितों की जानकारी सरकार को पहले ही दे दी थी और जिन कंपनियों से उनका संबंध था, उनके मूल्यांकन और फैसले से खुद को अलग रखा।
9) सितंबर 2026: सत्य निकेतन की इमारत और सात जिंदगियां
6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें छात्र भी शामिल थे। बाद की पुलिस जांच में कथित अनधिकृत निर्माण और बेसमेंट में चल रहे काम से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। इस मामले में दो पीजी संचालकों और इमारत के मालिक समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस हादसे पर गंभीर टिप्पणी की और पीजी तथा छात्र आवासों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों पर सुनवाई की।
यहां भी सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है। सवाल यह है कि शहरों में हजारों छात्र और युवा जिन पीजी में रहते हैं, उनकी संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच कितनी प्रभावी है।
तो आज के दिन दो दीये क्यों?
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर एक दीया उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए जलाया जा रहा है। लेकिन इसी रोशनी में उन सवालों को भी जगह मिलनी चाहिए, जो पूरे साल सरकारी व्यवस्था के सामने खड़े होते रहे हैं।
एक दीया उस व्यवस्था के नाम भी हो सकता है, जहां गुरुग्राम में निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दीवार गिरने से सात मजदूरों की जान चली गई। दूसरा दीया उन 74 भ्रष्टाचार के मामलों की याद में, जो केरल में अभियोजन की मंजूरी लंबित रहने के कारण आगे नहीं बढ़ सके। एक तरफ जन्मदिन पर 76 किलो दूध से दुग्धाभिषेक और ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील है, तो दूसरी तरफ उन परिवारों के घर हैं, जहां हादसों के बाद हमेशा के लिए अंधेरा छा गया।
इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि आज कितने दीये जलेंगे। सवाल यह भी है कि क्या उन दीयों की रोशनी में जवाबदेही, सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही के सवाल दिखाई देंगे? जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ अगर एक दीया नागरिकों के अधिकार और जवाबदेही के नाम भी जले, तो शायद यह रोशनी ज्यादा अर्थपूर्ण हो सकती है।




