Wednesday, 07 October 2026
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सौर ऊर्जा में भारत की छलांग, 2026 तक दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनने का अनुमान: एनएसईएफआई

केवल 14 महीनों में 50 गीगावाट जोड़कर भारत ने 150 गीगावाट का आंकड़ा किया पार

नई दिल्ली, 12 अप्रैल 2026

भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक की सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज करते हुए केवल 14 महीनों में 50 गीगावाट क्षमता जोड़कर कुल स्थापित क्षमता को 150 गीगावाट तक पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि खास इसलिए भी है क्योंकि पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में देश को 11 साल लगे थे, जबकि 100 गीगावाट तक पहुंचने में लगभग तीन साल का समय लगा।

इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) के सीईओ सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने कहा, “भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा से 280–300 गीगावाट की उम्मीद की गई थी। मौजूदा गति को देखते हुए भारत सालाना लगभग 50 गीगावाट की वृद्धि के ट्रैक पर है, जो इस लक्ष्य के अनुरूप है। इतना ही नहीं, पीएम सूर्य घर, आगामी पीएम कुसुम 2.0, फ्लोटिंग सोलर नीतियों और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी बढ़ती मांग के चलते आने वाले चार वर्षों में यह क्षमता इन अनुमानों से भी आगे जा सकती है।”

वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच एनएसईएफआई का मानना है कि भारत 2026 में वार्षिक स्थापना के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर बाजार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पुलिपाका ने कहा, “अमेरिका और यूरोपीय यूनियन जैसे प्रमुख बाजारों में सौर क्षमता वृद्धि की गति धीमी पड़ने के संकेत मिल रहे हैं, जो फिलहाल दूसरे स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसके विपरीत भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और तय लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। अगले वर्ष भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक सौर स्थापना वाला देश बनकर उभरेगा। भारत की यह सफलता विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों के लिए महत्वपूर्ण सीख प्रदान करती है।”

एनएसईएफआई के अनुसार, आने वाले तीन वर्षों में वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (DRE) और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक (C&I) सौर क्षेत्र विकास के प्रमुख चालक होंगे।

उन्होंने कहा, “C&I क्षेत्र ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहली बार लगभग 10 गीगावाट की वार्षिक स्थापना का आंकड़ा पार किया है और यह केवल शुरुआत है। ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस, वर्चुअल पावर परचेज एग्रीमेंट (VPPA) और रिन्यूएबल कंजम्पशन ऑब्लिगेशन (RCO) जैसे नीतिगत उपाय मांग को बढ़ावा दे रहे हैं। अगले दो वर्षों में C&I क्षमता वृद्धि यूटिलिटी आधारित पीपीए के बराबर पहुंच सकती है।”

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और पीएम कुसुम जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं ने वितरित नवीकरणीय ऊर्जा को मजबूत किया है। वर्तमान में कुल सौर क्षमता में DRE की हिस्सेदारी लगभग 20% है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 35% तक पहुंचने का अनुमान है।

निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI), एएलएमएम (ALMM) और बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) जैसे उपायों के चलते देश ने सोलर मॉड्यूल निर्माण में मजबूत स्थिति बनाई है और अब सोलर सेल के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

एनएसईएफआई ने कहा कि अगले चरण की वृद्धि के लिए वेफर, इनगॉट, पॉलीसिलिकॉन और क्वार्ट्ज जैसे अपस्ट्रीम सप्लाई चेन को मजबूत करना जरूरी होगा।

आगे देखते हुए, 2026 भारत के लिए एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा विकास का अहम वर्ष साबित हो सकता है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एनएसईएफआई का अनुमान है कि अगले 18 महीनों में भारत ऊर्जा भंडारण क्षमता में भी दो अंकों की वृद्धि हासिल करेगा।

पुलिपाका ने अंत में कहा, “हाल के नीतिगत और नियामकीय कदमों—जैसे वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और नॉन-सोलर आवर्स कनेक्टिविटी—ने मजबूत आधार तैयार किया है। आने वाले 12 से 18 महीनों में ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में तेज़ी देखने को मिलेगी।”

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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