भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच नया तनाव! USTR ने भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव रखा, क्या प्रभावित होगा कारोबार?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच USTR ने भारत को एक बड़ा देते हुए 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव रखा है। जानें इस फैसले से भारतीय कारोबार, निर्यात और व्यापार वार्ता पर पड़ने वाले संभावित असर।

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) को अंतिम रूप देने की कोशिशें जारी हैं। इसी बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है जिसने दोनों देशों के बीच चल रही आपसी बातचीत को और जटिल बना दिया है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने अपनी सेक्शन 301 की जांच के निष्कर्ष जारी करते हुए भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के अनुसार भारत से आने वाले कुछ आयातित उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। इस प्रस्ताव के बाद एक बार फिर से दोनों देशों के बीच की आपसी मित्रता पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होते हैं तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने सेक्शन 301 के तहत कई देशों की व्यापारिक और श्रम संबंधी नीतियों की समीक्षा की है। इस समीक्षा के दौरान भारत सहित कुल 60 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था। जांच के बाद USTR ने कहा कि कई देशों ने अपने आयात तंत्र में जबरन श्रम (Forced Labour) से जुड़े उत्पादों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जिस आधार पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। अमेरिका का दावा है कि ऐसे उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करते हैं और अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये ही कारण है कि वाशिंगटन प्रशासन इस मुद्दे को व्यापारिक दृष्टि से गंभीर मान रहा है।

क्या है सेक्शन 301?

सेक्शन 301 अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी सरकार किसी भी देश की उन नीतियों या प्रथाओं की जांच कर सकती है जिन्हें वह अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या नुकसानदायक मानती है। जांच पूरी होने के बाद अमेरिका अतिरिक्त शुल्क, व्यापारिक प्रतिबंध या अन्य जवाबी कदम उठा सकता है। आपको बता दें कि, पिछले वर्षों में अमेरिका ने इसी प्रावधान का उपयोग चीन समेत कई देशों के खिलाफ किया था। अब एक बार फिर सेक्शन 301 चर्चा में है क्योंकि इसका इस्तेमाल भारत सहित अनेक देशों के खिलाफ प्रस्तावित टैरिफ कार्रवाई के आधार पर किया जा रहा है।

भारत पर कितना टैरिफ लग सकता है?

जांच रिपोर्ट के अनुसार कुछ देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव है, जबकि भारत सहित कई अन्य देशों के लिए 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का सुझाव दिया गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर भारत के व्यापारियों को पर पड़ेगा। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने अभी इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणी मांगी गई हैं। समीक्षा पूरी होने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

क्या भारतीय उद्योगों पर पड़ेगा असर?

यदि सेक्शन 301 के तहत भारतीय उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत महंगे हो सकते हैं। विशेष रूप से वे उद्योग जो अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भर हैं, उन्हें लागत और मूल्य निर्धारण से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रस्ताव अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुआ है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता भी स्थिति को बदल सकती है। कई मामलों में प्रस्तावित शुल्क बाद में संशोधित या वापस भी लिए जाते रहे हैं।

क्या ट्रेड डील पर पड़ेगा कोई असर?

भारत और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से अंतरिम व्यापार समझौतों पर बातचीत हो रही है। दोनों देशों के अधिकारी नई दिल्ली और वाशिंगटन में कई दौर की बैठकों में हिस्सा भी ले चुके हैं। हाल के दिनों में संकेत मिले थे कि समझौते को लेकर काफी प्रगति हुई है और कई प्रमुख मुद्दों पर सहमति भी बनी है।

ऐसे समय में अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव सामने आना दोनों ही देशों के बीच व्यापार वार्ता के लिए नई चुनौती माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं, इसलिए बातचीत जारी रहने की संभावना अधिक है।

क्या हैं भारत की प्राथमिकताएं?

भारत लंबे समय से अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों को बेहतर पहुंच दिलाने की कोशिश कर रहा है। भारतीय पक्ष चाहता है कि निर्यातकों को बेहतर शुल्क दरें मिलें और व्यापारिक बाधाएं कम हों। इसके अलावा भारत फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान और अन्य क्षेत्रों में भी अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

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