सोलुखुम्बु जिले के फेरेचे हेलीपैड पर उतरने के दौरान हुआ हादसा, दोनों हेलीकॉप्टरों के रोटर ब्लेड आपस में टकराए; सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई घटना
सोलुखुम्बु/ नई दिल्ली: नेपाल के माउंट एवरेस्ट क्षेत्र में मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह दो हेलीकॉप्टरों की टक्कर से एक भारतीय पर्यटक की मौत हो गई, जबकि न्यूजीलैंड का एक नागरिक घायल हो गया। यह दुर्घटना सोलुखुम्बु जिले के फेरेचे हेलीपैड पर हुई, जहां दोनों हेलीकॉप्टर उतरने की कोशिश कर रहे थे। हादसे में शामिल विमान निजी विमानन कंपनियों फिस्टेल एयर और एयर डायनेस्टी के थे।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, लैंडिंग के दौरान दोनों हेलीकॉप्टरों के रोटर ब्लेड आपस में टकरा गए। दुर्घटना में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिक की उम्र 47 वर्ष बताई गई है। वहीं, घायल न्यूजीलैंड के नागरिक को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया। दोनों हेलीकॉप्टरों के पायलटों को भी मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए राजधानी पहुंचाया गया।
इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें दोनों हेलीकॉप्टर हेलीपैड के पास आते और लैंडिंग के दौरान एक-दूसरे से टकराते दिखाई दे रहे हैं। अधिकारियों ने हादसे की पुष्टि की है, लेकिन दुर्घटना के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। मामले की जांच की जा रही है।
कहां और कब हुआ हादसा?
नेपाल के सोलुखुम्बु जिले में मंगलवार सुबह करीब 8 बजकर 11 मिनट पर दो हेलीकॉप्टरों की टक्कर हो गई। यह दुर्घटना खुम्बू पासांग ल्हामू ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड नंबर 4 में स्थित फेरेचे हेलीपैड पर हुई। यह जगह माउंट एवरेस्ट बेस कैंप जाने वाले मार्ग पर पड़ती है। रिपोर्टों के मुताबिक, फेरेचे काठमांडू से लगभग 150 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है।
द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एयर डायनेस्टी और फिस्टेल एयर के हेलीकॉप्टर हेलीपैड पर उतरने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनके बीच टक्कर हो गई। सोलुखुम्बु जिला पुलिस कार्यालय के डीएसपी नवीनराज बुधाथोकी ने भी दुर्घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों विमान खुम्बू पासांग ल्हामू के फेरेचे हेलीपैड पर लैंडिंग कर रहे थे। इसी दौरान दोनों के रोटर ब्लेड आपस में टकरा गए।
नेपाल की नागरिक उड्डयन व्यवस्था से जुड़े अधिकारी ज्ञानेंद्र भुल ने भी हादसे की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारी घटना से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जुटा रहे हैं। हालांकि, शुरुआती जानकारी में दुर्घटना की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई थी।
भारतीय पर्यटक की पहचान, न्यूजीलैंड का नागरिक घायल
हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति की पहचान 47 वर्षीय भारतीय नागरिक वसंत कुमार बलारा माडू के रूप में हुई है। वह फिस्टेल एयर के हेलीकॉप्टर में सवार थे। दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। वहीं, इसी हेलीकॉप्टर में मौजूद 53 वर्षीय शैलेश किशन पटेल घायल हो गए। पटेल न्यूजीलैंड के नागरिक हैं और भारतीय मूल के बताए गए हैं।
हादसे के बाद पटेल को पहले हेलीकॉप्टर के जरिए लुकला पहुंचाया गया। वहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए काठमांडू के मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया। उनकी चोटों की गंभीरता को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
दुर्घटना में शामिल दोनों हेलीकॉप्टरों के पायलटों को भी मामूली चोटें आईं। उन्हें इलाज के लिए काठमांडू पहुंचाया गया। इस तरह हादसे में एक यात्री की जान गई, जबकि एक अन्य यात्री और दोनों पायलट घायल हुए। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना में शामिल सभी लोगों की स्थिति और इलाज से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जुटाई जा रही है।
फिस्टेल एयर और एयर डायनेस्टी के हेलीकॉप्टर शामिल
नेपाल के एवरेस्ट क्षेत्र में हुई इस दुर्घटना में दो निजी विमानन कंपनियों फिस्टेल एयर और एयर डायनेस्टी के हेलीकॉप्टर शामिल थे। दोनों विमान लैंडिंग के दौरान आपस में टकरा गए। हालांकि, दोनों हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।
रॉयटर्स के मुताबिक, फिस्टेल एयर के हेलीकॉप्टर में ऐसे यात्री सवार थे, जिन्हें एवरेस्ट क्षेत्र से रेस्क्यू कर लाया जा रहा था। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि हेलीपैड पर उतरने के दौरान उसका हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुआ। इसी विमान में भारतीय नागरिक वसंत कुमार बलारा माडू और न्यूजीलैंड के नागरिक शैलेश किशन पटेल मौजूद थे।
वहीं, एयर डायनेस्टी के एक अधिकारी ने बताया कि उनकी कंपनी का हेलीकॉप्टर यात्रियों के बजाय सामान लेकर जा रहा था। इस तरह एक विमान बचाव अभियान से जुड़े यात्रियों को ले जा रहा था, जबकि दूसरा माल परिवहन के काम में लगा था।
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सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई टक्कर
नेपाल के एवरेस्ट क्षेत्र में दो हेलीकॉप्टरों के बीच हुई टक्कर का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। वीडियो में दोनों विमान फेरेचे हेलीपैड के पास उतरने के लिए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। इसी दौरान उनके रोटर ब्लेड आपस में टकरा जाते हैं। नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, दोनों हेलीकॉप्टरों के ब्लेड हेलीपैड के नजदीक पहुंचने के दौरान एक-दूसरे से टकराए।
हालांकि, फुटेज में दुर्घटना का क्षण दिखाई देने के बावजूद इससे हादसे की पूरी वजह स्पष्ट नहीं होती। जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी होगा कि दोनों हेलीकॉप्टर किस दिशा से आ रहे थे, उनके बीच कितनी दूरी थी और लैंडिंग के समय पायलटों को क्या निर्देश दिए गए थे। इन पहलुओं की जानकारी मिलने के बाद ही दुर्घटना की स्थिति बेहतर तरीके से समझी जा सकेगी।
हादसे के बाद घायल यात्री को प्राभु एयर के हेलीकॉप्टर से लुकला पहुंचाया गया। वहां से उसे आगे के इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया। एवरेस्ट जैसे दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क सीमित होने के कारण हेलीकॉप्टर परिवहन और आपातकालीन बचाव के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता है।
एवरेस्ट क्षेत्र में हेलीकॉप्टर क्यों हैं अहम?
नेपाल का सोलुखुम्बु जिला माउंट एवरेस्ट और आसपास के हिमालयी इलाकों में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और पर्वतारोही यहां पहुंचते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र का भौगोलिक स्वरूप ऐसा है कि कई जगहों तक सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में हेलीकॉप्टर परिवहन, बचाव अभियान और जरूरी सामान की आपूर्ति का महत्वपूर्ण साधन बन जाते हैं।
एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने के लिए पर्यटकों और पर्वतारोहियों को कई दिनों तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है। अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के दौरान सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक थकान और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित लोगों को निचले इलाकों या अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा पर्वतारोहण अभियानों के लिए जरूरी उपकरण, खाद्य सामग्री और राहत से जुड़ा सामान भी हवाई मार्ग से पहुंचाया जाता है।
नवंबर का समय नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग के व्यस्त मौसम में शामिल है। इस दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और पर्वतारोही एवरेस्ट क्षेत्र पहुंचते हैं। यात्रियों की आवाजाही के साथ बचाव और सामान ढोने के लिए भी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में हवाई यातायात और सुरक्षित लैंडिंग के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।
ऊंचाई और मौसम के बीच उड़ान की चुनौतियां
नेपाल का हिमालयी क्षेत्र हेलीकॉप्टर संचालन के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां ऊंचे पहाड़, संकरी घाटियां, सीमित लैंडिंग स्थल और तेजी से बदलने वाली मौसम परिस्थितियां उड़ान को कठिन बना सकती हैं। पर्वतीय इलाकों में हेलीकॉप्टरों को सामान्य मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अलग तरह की परिचालन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
फेरेचे जैसे स्थान एवरेस्ट क्षेत्र के पर्वतीय मार्ग पर स्थित हैं। यहां हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल ट्रेकिंग करने वालों, पर्वतारोहियों और बचाव दलों की आवाजाही के लिए किया जाता है। ऐसे इलाकों में लैंडिंग के दौरान पायलटों को आसपास के पहाड़ों, हवा की दिशा, दृश्यता और दूसरे विमानों की स्थिति पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
हालांकि, इस दुर्घटना के पीछे खराब मौसम, पायलट की गलती, संचार में कमी या किसी तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। केवल क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर हादसे का कारण तय नहीं किया जा सकता। जांच में उपलब्ध वीडियो, विमान से जुड़े रिकॉर्ड, पायलटों के बयान और अन्य तकनीकी जानकारियों की मदद ली जा सकती है।
पर्वतीय पर्यटन और हवाई सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
नेपाल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन और पर्वतारोहण की महत्वपूर्ण भूमिका है। माउंट एवरेस्ट और आसपास के पर्वतीय क्षेत्र हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवाएं पर्यटन गतिविधियों और आपातकालीन बचाव अभियानों के लिए जरूरी हैं। लेकिन इन सेवाओं की बढ़ती मांग के साथ उड़ान सुरक्षा और हेलीपैड पर विमानों की आवाजाही का समन्वय भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
फेरेचे में हुई दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि व्यस्त पर्वतीय हेलीपैड पर एक से अधिक हेलीकॉप्टरों के संचालन को किस तरह सुरक्षित बनाया जाए। खासकर ट्रेकिंग के व्यस्त मौसम में जब पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है, तब लैंडिंग और टेकऑफ के समय स्पष्ट समन्वय की जरूरत होती है।
हालांकि, इस एक घटना के आधार पर नेपाल की पूरी हेलीकॉप्टर सेवा व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। दुर्घटना की जांच से यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या यह किसी विशेष परिचालन चूक का नतीजा था या इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद था।
