Friday, 25 September 2026
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जंतर-मंतर पर EPS-95 पेंशनरों का आंदोलन दूसरे दिन तेज: सांसदों ने बढ़ाया हौसला, पेंशन बढ़ोतरी और सरकार से जवाबदेही की मांग

संजय सिंह, शक्ति सिंह गोहिल और नागेश अस्तीकर सहित कई सांसदों ने जंतर-मंतर पहुंचकर हजारों पेंशनरों को दिया समर्थन

नई दिल्ली, 10 मार्च 2026:

जंतर-मंतर पर चल रहे ईपीएस-95 पेंशनरों के तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन का दूसरा दिन और अधिक प्रभावशाली हो गया, जब देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर आवाज बुलंद की। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, गोवा सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में पेंशनर इस आंदोलन में शामिल हुए।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) कर रही है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने केंद्रीय श्रम मंत्री से जंतर-मंतर पहुंचकर पेंशन बढ़ोतरी की तत्काल घोषणा करने की अपील की। पेंशनरों ने सरकार के सामने यह गंभीर सवाल उठाया कि 30-35 वर्षों तक वेतन से नियमित अंशदान देने के बावजूद उन्हें औसतन केवल ₹1,171 मासिक पेंशन मिलती है, जबकि अन्य सरकारी योजनाओं के तहत ₹3,000 से ₹5,000 तक की सहायता दी जाती है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे कई बुजुर्ग पेंशनरों ने कहा कि इतनी कम पेंशन में जीवनयापन करना बेहद कठिन हो गया है, फिर भी सरकार उनकी पीड़ा के प्रति संवेदनशील नहीं दिख रही।

प्रदर्शन के दौरान कई प्रमुख सांसदों ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर पेंशनरों के आंदोलन को समर्थन दिया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, गुजरात के भावनगर से कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल, और महाराष्ट्र के हिंगोली से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद नागेश अस्तीकर ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने पेंशनरों की मांगों का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि इतने वर्षों से न्याय में हो रही देरी अस्वीकार्य है। नेताओं ने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।

सभा को संबोधित करते हुए एनएसी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत, राष्ट्रीय मुख्य समन्वयक रामकांत नर्गुंड, राष्ट्रीय सचिव राजीव भटनागर, सरिता नर्खेड़े, ओम शंकर तिवारी, एस.एन. अंबेकर, एस.एन. कुलकर्णी, तपन दत्ता, श्री लक्ष्मी, शशिभान सिंह सहित अन्य नेताओं ने भी आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

पेंशनरों ने अपनी मुख्य मांगों को दोहराते हुए कहा कि उन्हें न्यूनतम ₹7,500 मासिक पेंशन महंगाई भत्ते के साथ दी जाए, पेंशनरों और उनके जीवनसाथियों के लिए निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार उच्च पेंशन लाभों को पूरी तरह लागू किया जाए और योजना से वंचित पात्र लोगों को इसमें शामिल किया जाए।

पिछले एक दशक से पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से चल रहा यह आंदोलन 11 मार्च को अपने अंतिम दिन में प्रवेश करेगा, जिसमें और अधिक संख्या में पेंशनरों के शामिल होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने सरकार से अपील की है कि संसद के चल रहे बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देते हुए सार्थक संवाद शुरू किया जाए, ताकि देशभर के 80 लाख से अधिक ईपीएस-95 पेंशनरों को सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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