Sunday, 18 October 2026
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SIR प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग के बड़े फेरबदल, 20 महीने में 20 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के हुए तबादले

2025 में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के तबादलों का सिलसिला बिहार से शुरू हुआ, जहां जून में SIR प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बाद नागालैंड, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और अन्य राज्यों में नियुक्तियों में बदलाव हुए। जानिए पूरा घटनाक्रम।

नई दिल्ली: देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी बहस के बीच निर्वाचन आयोग के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच करीब 20 महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) का तबादला किया गया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल के शुरुआती 20 महीनों में हुए इन तबादलों को लेकर इसलिए चर्चा हो रही है, क्योंकि आयोग आमतौर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के पद पर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने को प्राथमिकता देता है। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया फेरबदल में कम से कम सात अधिकारी दो साल से भी कम समय तक इस पद पर कार्यरत रहे।

इन बदलावों का समय भी महत्वपूर्ण है। देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूचियों की जांच, पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बार-बार अधिकारियों के बदलने का चुनावी तैयारियों और SIR के क्रियान्वयन पर क्या असर पड़ सकता है।

20 महीने में 20 CEO बदले गए

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 से 2026 के बीच करीब 20 महीनों में देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के पद पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए। वर्ष 2025 में आठ से नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन अधिकारियों का तबादला हुआ, जबकि 2026 में 10 और बदलाव दर्ज किए गए। इनमें बिहार, नगालैंड, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, लद्दाख, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, सिक्किम और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्र शामिल बताए गए हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव आयोग के निर्देशों को लागू कराने और चुनाव संबंधी तैयारियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मतदाता सूची तैयार करने, उसके पुनरीक्षण और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में इन पदों पर लगातार होने वाले बदलावों को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, अधिकारियों के तबादलों के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनमें नियमित प्रशासनिक फेरबदल, प्रतिनियुक्ति की अवधि पूरी होना, मूल कैडर में वापसी और नई जिम्मेदारी सौंपा जाना शामिल है। इसलिए सभी बदलावों को किसी एक वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा। इन तबादलों के प्रभाव का आकलन करने के लिए संबंधित आदेशों, नियुक्तियों की तारीखों और प्रत्येक अधिकारी के स्थानांतरण के कारणों की अलग-अलग जांच जरूरी है।

पहले के मुख्य चुनाव आयुक्तों से तुलना

रिपोर्ट में पिछले मुख्य निर्वाचन आयुक्तों के कार्यकाल के दौरान हुए तबादलों की तुलना भी की गई है।

इसके मुताबिक, राजीव कुमार के मई 2022 से फरवरी 2025 तक के लगभग 33 महीने के कार्यकाल में करीब 23 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के तबादले हुए थे। इस अवधि में 2024 के लोकसभा चुनाव भी शामिल थे।

इससे पहले सुनील अरोड़ा और सुशील चंद्रा के कार्यकाल को मिलाकर लगभग 41 महीनों में करीब 29 CEO के तबादले हुए थे। उस अवधि में भी लोकसभा चुनाव आयोजित हुए थे।

इन आंकड़ों को केवल कुल संख्या के आधार पर देखना पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग कार्यकाल की अवधि, राज्यों में चुनावों की समय-सारणी, अधिकारियों की उपलब्धता और प्रशासनिक जरूरतें भी तुलना को प्रभावित करती हैं।

फिर भी, 2025 और 2026 में अपेक्षाकृत कम समय के भीतर बड़ी संख्या में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के बदलने का तथ्य प्रशासनिक निरंतरता को लेकर सवाल उठाता है। खासकर तब, जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे व्यापक काम में स्थानीय परिस्थितियों और पहले से चल रही प्रक्रियाओं की जानकारी महत्वपूर्ण होती है।

तीन साल के कार्यकाल की परंपरा

निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को सामान्य तौर पर कम से कम तीन साल तक पद पर बनाए रखने की परंपरा रही है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए पर्याप्त समय देना है।

लेकिन हालिया फेरबदल में सात अधिकारियों का कार्यकाल दो साल से कम रहा। इससे यह सवाल उठता है कि क्या इतने कम समय में बार-बार नेतृत्व बदलने से चल रहे प्रशासनिक काम प्रभावित हो सकते हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी को राज्य की मतदाता सूची, पुनरीक्षण कार्यक्रम, जिला स्तर के अधिकारियों के साथ समन्वय और चुनाव संबंधी तैयारियों पर निगरानी रखनी होती है। ऐसे में अधिकारी बदलने पर नए पदाधिकारी को मौजूदा प्रक्रियाओं, लंबित शिकायतों और राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों को समझने में समय लग सकता है।

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बिहार से शुरू हुआ तबादलों का सिलसिला

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के बदलावों की शुरुआत बिहार से हुई। बिहार वह पहला राज्य था, जहां जून 2025 में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई।

अप्रैल 2025 में विनोद सिंह गुंजियाल ने एचआर श्रीनिवास की जगह बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पद संभाला। इसके बाद मई में नागालैंड और छत्तीसगढ़ में अधिकारियों का तबादला हुआ। जून में जम्मू-कश्मीर और हरियाणा को नए मुख्य निर्वाचन अधिकारी मिले, जबकि जुलाई में मध्य प्रदेश और कर्नाटक में नियुक्तियों में बदलाव किया गया।

अगस्त 2025 में मणिपुर और लद्दाख में भी नए अधिकारियों ने जिम्मेदारी संभाली। वर्ष के अंत में लक्षद्वीप के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के तबादले का आदेश जारी हुआ।

यह सिलसिला 2026 में भी जारी रहा। जनवरी में पंजाब, फरवरी में दिल्ली और गुजरात, मार्च में सिक्किम तथा अप्रैल में चंडीगढ़ में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर बदलाव हुए।

इन घटनाक्रमों से पता चलता है कि तबादले केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशासनिक नियुक्तियों में बदलाव हुए।

लक्षद्वीप में एक साल से कम समय में तीन CEO

प्रशासनिक फेरबदल का एक उल्लेखनीय उदाहरण लक्षद्वीप का है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच यहां तीन अलग-अलग अधिकारियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली।

गौरव सिंह राजावत ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान लक्षद्वीप में इस पद पर काम किया था। नवंबर 2025 में उनके स्थानांतरण के बाद जनवरी 2026 में अवनीश कुमार ने पदभार संभाला। वह जुलाई 2026 तक इस जिम्मेदारी पर रहे, जिसके बाद एएस शिवकुमार को नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया।

एक साल से भी कम समय में तीन अधिकारियों का बदलना प्रशासनिक निरंतरता को लेकर चर्चा का विषय बन सकता है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण में स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल, पुराने रिकॉर्ड की जानकारी और लंबित मामलों की निगरानी जरूरी होती है।

उप निर्वाचन आयुक्तों के स्तर पर भी बदलाव

राज्यों में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के तबादलों के साथ निर्वाचन आयोग के मुख्यालय, निर्वाचन सदन, में भी वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक, उप निर्वाचन आयुक्तों के स्तर पर चार बड़े बदलाव हुए। मई 2025 में भानु प्रकाश येतुरु की नियुक्ति हुई, जबकि सितंबर 2025 में पवन कुमार शर्मा को इस पद पर नियुक्त किया गया।

अगस्त 2026 में उप निर्वाचन आयुक्त संजय कुमार को उनके मूल कैडर में वापस भेजा गया। इसके बाद अक्टूबर 2026 में प्रकाश राजपुरोहित की नियुक्ति हुई।

उप निर्वाचन आयुक्त आयोग के प्रशासनिक और चुनाव संबंधी कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे राज्यों से जुड़े मामलों, चुनावी तैयारियों और आयोग के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में योगदान देते हैं।

क्या अधिकारियों के तबादलों का SIR पर असर पड़ेगा?

यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है, लेकिन इसका उत्तर केवल तबादलों की संख्या से नहीं दिया जा सकता। किसी अधिकारी के बदलने का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नई नियुक्ति कितनी जल्दी होती है, जिम्मेदारियों का हस्तांतरण कैसे किया जाता है और राज्य में पुनरीक्षण का काम किस चरण में है।

अगर पदभार संभालने वाले अधिकारी को पुराने रिकॉर्ड, लंबित दावों और आपत्तियों तथा जिला स्तर की व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी समय पर मिल जाती है, तो प्रशासनिक बदलाव के बावजूद कामकाज जारी रह सकता है। इसके उलट, जिम्मेदारियों के हस्तांतरण में देरी या स्पष्टता की कमी होने पर समन्वय संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टें अधिकारियों के व्यापक फेरबदल की जानकारी देती हैं, लेकिन वे यह स्थापित नहीं करतीं कि इन तबादलों के कारण SIR की प्रक्रिया में व्यवस्थित रूप से देरी हुई या गलतियां बढ़ीं।

पारदर्शिता और जवाबदेही की अहमियत

निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी केवल चुनाव की तारीखें घोषित करने या मतदान कराने तक सीमित नहीं है। मतदाता सूची की तैयारी और उसका पुनरीक्षण भी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद हैं।

ऐसे में प्रशासनिक नियुक्तियों में स्थिरता और अधिकारियों की जवाबदेही महत्वपूर्ण हो जाती है। बार-बार बदलाव होने पर आयोग के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर अधिकारी को स्पष्ट जिम्मेदारी मिले और चल रहे काम में निरंतरता बनी रहे।

इसी तरह, मतदाताओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनका नाम सूची में है या नहीं, किसी प्रविष्टि पर आपत्ति होने पर क्या प्रक्रिया अपनानी है और गलती मिलने पर सुधार कैसे कराया जा सकता है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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