हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक 10 जुलाई 2018 तक डालमिया से जुड़े चेक और बिल परचेज लोन में करीब 15.44 करोड़ रुपये का डेबिट बैलेंस था। जांच में कुछ बिलों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे थे।
रांची: झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (JSCB) से जुड़े कथित वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार, 18 सितंबर को झारखंड और ओडिशा में सात ठिकानों पर एक साथ तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई। जांच का संबंध JSCB की सरायकेला शाखा में कथित बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी से है।
ईडी अधिकारियों के मुताबिक, मामले में कारोबारी संजय कुमार डालमिया और JSCB के तत्कालीन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बैंक को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। एजेंसी का कहना है कि मौजूदा कार्रवाई का उद्देश्य कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य सबूत जुटाना है।
सरायकेला शाखा से जुड़ा है मामला
ईडी की जांच JSCB की सरायकेला शाखा से जुड़े उस मामले पर केंद्रित है, जिसमें बैंक से कथित तौर पर अनियमित तरीके से बड़ी रकम के ऋण दिए जाने और बैंक फंड के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। एजेंसी के अनुसार, कारोबारी संजय कुमार डालमिया ने बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत करके इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।
शुक्रवार की कार्रवाई के दौरान सरायकेला में डालमिया के पटनायक टोला स्थित आवास पर भी ED की टीम पहुंची। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, टीम सुबह करीब सात बजे कई वाहनों से वहां पहुंची और घर के भीतर दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी।
35 करोड़ रुपये के लोन मामले की भी जांच
स्थानीय रिपोर्टों में ईडी की कार्रवाई को करीब 35 करोड़ रुपये के ऋण और उसके भुगतान से जुड़े मामले से जोड़ा गया है। बैंक से लिए गए ऋण और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है।
35 करोड़ रुपये का आंकड़ा उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में सामने आया है, जबकि एजेंसी की पुष्टि फिलहाल JSCB की सरायकेला शाखा में कथित बड़े पैमाने के फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक सीमित है।
इस जांच का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मामले से जुड़े पुराने न्यायिक रिकॉर्ड में बैंक से कई तरह के ऋण लेने और कथित तौर पर बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करने के आरोपों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
2025 के हाईकोर्ट आदेश में क्या सामने आया?
मामले की पृष्ठभूमि समझने के लिए झारखंड हाईकोर्ट का 9 मई 2025 का आदेश महत्वपूर्ण है। संजय कुमार डालमिया ने अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही में डिस्चार्ज की मांग की थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया था कि ये टिप्पणियां केवल डिस्चार्ज याचिका पर विचार के संदर्भ में हैं और ट्रायल को प्रभावित नहीं करेंगी।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, सरायकेला थाने में 2019 में मामला दर्ज किया गया था। इसमें तत्कालीन बैंक शाखा प्रबंधक सुनील कुमार सत्यपथी और संजय कुमार डालमिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
बाद की जांच के बाद पुलिस ने डालमिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
बैंक की आंतरिक जांच में क्या आरोप सामने आए?
हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक, बैंक की आंतरिक समिति ने आरोप लगाया था कि ऋण नियमों का पालन किए बिना बैंक फंड का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा सहकारिता विभाग से जुड़े अधिकारियों की जांच में भी बैंक फंड के कथित दुरुपयोग और ऋण वितरण में अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।
अदालत के रिकॉर्ड में एक पुराने जांच निष्कर्ष का भी उल्लेख है, जिसमें बैंक फंड में 50 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की बात कही गई थी। इसके बाद सहकारिता विभाग और संबंधित अधिकारियों की टीमों ने जांच की थी। इस जांच में ऋण वितरण से संबंधित कई अनियमितताओं को रिकॉर्ड किया गया।
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तीन तरह के ऋण पर उठे थे सवाल
झारखंड हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में संजय कुमार डालमिया को दिए गए ऋणों को लेकर कई तरह की अनियमितताओं का उल्लेख है। इनमें कैश क्रेडिट लोन, लोन अगेंस्ट डिपॉजिट और चेक/बिल परचेज लोन शामिल हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2012 में डालमिया को एक करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सीमा दी गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 4.50 करोड़ रुपये किया गया। जांच में संबंधित संपत्तियों के मूल्यांकन और दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। अदालत के सामने पेश रिकॉर्ड में कहा गया कि लगभग 4.70 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन के आधार पर 4.50 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट लोन मंजूर किया गया था।
लोन अगेंस्ट डिपॉजिट (LAD) श्रेणी में भी कई ऋणों का उल्लेख अदालत के रिकॉर्ड में है। जांच एजेंसी की ओर से आरोप लगाया गया था कि कुछ ऋण ऐसे जमा या बीमा पॉलिसियों के आधार पर दिए गए जो बैंक के नियमों के अनुरूप नहीं थे। रिकॉर्ड में इन ऋणों से संबंधित कुल बकाया राशि 10 जुलाई 2018 तक 12.07 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।
चेक और बिल परचेज लोन में भी कथित गड़बड़ी
मामले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चेक/बिल परचेज लोन से संबंधित है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज जांच के मुताबिक, 10 जुलाई 2018 तक इस श्रेणी में डालमिया से जुड़ा डेबिट बैलेंस करीब 15.44 करोड़ रुपये था।
जांच में आरोप लगाया गया था कि कुछ चेक और बिलों के आधार पर ऋण राशि जारी की गई, लेकिन बाद में संबंधित चेक बैंक में उपलब्ध नहीं पाए गए या क्लियर नहीं हुए। अदालत के रिकॉर्ड में एक मामले में यह भी दर्ज है कि तीन बिलों के आधार पर करीब 15.44 करोड़ रुपये की राशि ली गई थी, जबकि जांच में केवल एक बिल के जारी होने की पुष्टि हुई और दो अन्य बिलों को कथित तौर पर फर्जी बताया गया।
हाईकोर्ट ने डिस्चार्ज याचिका क्यों खारिज की?
संजय कुमार डालमिया की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि ऋण बैंक ने उचित प्रक्रिया के तहत दिए थे और उनके खिलाफ आपराधिक साजिश का पर्याप्त आधार नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा था कि कई ऋणों के बदले संपत्ति या अन्य सुरक्षा उपलब्ध थी और ऋण लेना अपने आप में आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।
राज्य की ओर से इसका विरोध किया गया। अभियोजन ने कहा कि जांच में बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत, बैंकिंग नियमों के उल्लंघन और बैंक फंड के कथित दुरुपयोग से संबंधित पर्याप्त सामग्री सामने आई है।
हाईकोर्ट ने कहा कि डिस्चार्ज के चरण में अदालत को यह तय नहीं करना होता कि आरोपी दोषी साबित होगा या नहीं। इस स्तर पर यह देखा जाता है कि क्या मुकदमा आगे बढ़ाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री है। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि ऐसा आधार मौजूद है और डिस्चार्ज आवेदन खारिज कर दिया।
ईडी की कार्रवाई का मुख्य फोकस क्या है?
अब ED की कार्रवाई इसी पुराने बैंक फर्जीवाड़े से जुड़े संभावित मनी ट्रेल की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। PMLA के तहत जांच एजेंसी कथित अपराध से जुड़े धन, दस्तावेजों, खातों और संपत्तियों के संबंध में साक्ष्य जुटा सकती है।
शुक्रवार को की गई कार्रवाई में ED की रांची जोनल यूनिट ने झारखंड और ओडिशा में कुल सात स्थानों पर तलाशी ली। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई सुबह से शुरू हुई और स्थानीय पुलिस तथा सुरक्षा बलों के समन्वय से की गई। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य ऐसे दस्तावेज और अन्य सामग्री हासिल करना है, जो कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की कड़ी को स्पष्ट कर सके।
ओडिशा के ठिकानों पर भी जांच
मौजूदा कार्रवाई सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रही। ED ने ओडिशा में भी छापेमारी की है। हालांकि, एजेंसी ने अभी सातों स्थानों के पूरे पते या सभी संबंधित व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
ओडिशा में तलाशी का हिस्सा यह पता लगाने से जुड़ा हो सकता है कि कथित वित्तीय लेन-देन की रकम या उससे जुड़े दस्तावेजों का कोई संपर्क राज्य से बाहर था या नहीं। हालांकि, जब तक ED की ओर से इन ठिकानों और उनसे मिली सामग्री की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। एजेंसी ने इसे JSCB के कथित फर्जीवाड़े से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा बताया है।
जांच में आगे क्या होगा?
ED की मौजूदा कार्रवाई के बाद जांच में बैंक रिकॉर्ड, ऋण से संबंधित दस्तावेज, खातों के लेन-देन, संपत्तियों और संबंधित कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच अहम होगी। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर बैंक से निकली रकम का इस्तेमाल कहां हुआ और क्या उसे किसी अन्य खाते, कंपनी या संपत्ति में स्थानांतरित किया गया।
इसके साथ ही, पुराने मामले में दर्ज आरोपों और जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों को भी ED अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जोड़ सकती है। PMLA जांच का एक प्रमुख उद्देश्य कथित अपराध से हासिल रकम के स्रोत, उसके इस्तेमाल और उससे जुड़ी संपत्तियों का पता लगाना होता है।


