Sunday, 18 October 2026
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दिल्ली के लाखों छात्रों को अब तक नहीं मिलीं किताबें, हाईकोर्ट हुआ सख्त, सरकार से जवाब तलब

दिल्ली सरकार ने ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले किताबें देने का दिया आश्वासन, 30 सितंबर को होगी अब अगली सुनवाई

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

राजधानी के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को समय पर पाठ्यपुस्तकें न मिलने का मामला अब अदालत की सख्ती तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है और साफ संकेत दिए हैं कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

मामला उस अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अदालत के पहले दिए गए आदेश का पालन नहीं किया गया। यह याचिका गैर-सरकारी संगठन सोशल जूरिस्ट की ओर से दायर की गई है। संगठन का कहना है कि अदालत के समक्ष सरकार ने पहले भरोसा दिलाया था कि छात्रों को समय पर किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के वकील अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। उनका कहना था कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि बिना किताबों के पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सचिन दत्ता ने इस देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल किया कि जब हर साल पाठ्यपुस्तकों का वितरण एक नियमित प्रक्रिया है, तो इस बार इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाली इस समस्या के पीछे असली वजह क्या है। अदालत ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है। कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

दूसरी ओर, दिल्ली सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि सभी सरकारी स्कूलों के छात्रों को ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। सरकार का कहना है कि वितरण प्रक्रिया में कुछ तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से देरी हुई है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हर साल दोहराई जाने वाली इस समस्या से यह सवाल उठता है कि क्या वितरण प्रणाली में स्थायी सुधार की जरूरत है। उनका कहना है कि पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति को लेकर बेहतर योजना और समयबद्ध मॉनिटरिंग की आवश्यकता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। अभिभावक भी इस स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि निजी स्कूलों में जहां सत्र शुरू होते ही किताबें मिल जाती हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में बार-बार ऐसी समस्याएं सामने आना चिंता का विषय है। इससे छात्रों का आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है।

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IK

Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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