नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने कैश कांड विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपा। दिल्ली स्थित सरकारी आवास से जली हुई नकदी मिलने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को यहां पदभार संभाला था। फिलहाल उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की आंतरिक जांच जारी है।
संसद में भी उठा मामला, जांच समिति गठित
इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी लिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। माना जा रहा है कि यह समिति अपनी रिपोर्ट आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है। दरअसल, पिछले वर्ष 12 अगस्त को बहुदलीय सांसदों द्वारा लाए गए नोटिस को स्वीकार करने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए थे। इसी के तहत जांच समिति बनाई गई थी।
Justice Yashwant Varma of the Allahabad High Court has submitted his resignation to the President. He was earlier transferred from the Delhi High Court back to Allahabad following a controversy over alleged cash discovery at his residence. He took oath on April 5, 2025, and is… pic.twitter.com/KZJNpcLP2a
— ANI (@ANI) April 10, 2026
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी जस्टिस वर्मा को राहत नहीं दी थी। उन्होंने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत गठित जांच समिति को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। यह फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनाया था।
महाभियोग की कोशिशें और राजनीतिक घटनाक्रम
21 जुलाई 2025 को संसद के दोनों सदनों में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किए गए थे। उसी दिन तत्कालीन राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया था, जिससे घटनाक्रम और भी चर्चा में आ गया। हालांकि, 11 अगस्त को राज्यसभा के उपसभापति ने उच्च सदन में लाए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके एक दिन बाद, 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ने औपचारिक रूप से जांच समिति के गठन की घोषणा की। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एम. श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य को शामिल किया गया था। फिलहाल, जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के बाद इस पूरे मामले पर नई कानूनी और संवैधानिक बहस छिड़ने के आसार हैं।
