इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी लगातार सत्ता में रहकर सिल्वियो बर्लुस्कोनी का रिकॉर्ड तोड़ दिया। पीएम मोदी ने बधाई देते हुए भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी का जिक्र किया।
नई दिल्ली/रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश के युद्धोत्तर राजनीतिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड कायम कर लिया है। मेलोनी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1,413 दिन लगातार सत्ता में रहने के साथ पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के कार्यकाल को पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 4 सितंबर को मेलोनी को बधाई दी और इसे इटली की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास का प्रतिबिंब बताया।
मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी ‘मित्र’ बताते हुए कहा कि उनकी दोस्ती ने भारत-इटली Special Strategic Partnership को मजबूत करने में भी योगदान दिया है। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के समृद्ध भविष्य के लिए आगे भी करीबी सहयोग जारी रखने की इच्छा जताई और मेलोनी के आगे के कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इटली का राजनीतिक इतिहास सरकारों के बार-बार बदलने के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में मेलोनी की सरकार का करीब चार साल तक लगातार सत्ता में बने रहना उनके गठबंधन प्रबंधन और राजनीतिक स्थिरता की एक बड़ी परीक्षा का परिणाम माना जा रहा है।
1,413 दिन का रिकॉर्ड कैसे बना?
मेलोनी की सरकार ने 4 सितंबर 2026 को 1,413 दिन पूरे किए। इससे पहले लगातार सबसे लंबे समय तक चलने वाली युद्धोत्तर सरकार का रिकॉर्ड सिल्वियो बर्लुस्कोनी के नाम था। बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार जून 2001 से अप्रैल 2005 तक 1,412 दिन चली थी। मेलोनी ने एक दिन के अंतर से यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। यह रिकॉर्ड मुख्य रूप से एक ही सरकार के लगातार कार्यकाल से जुड़ा है, न कि किसी व्यक्ति के कुल प्रधानमंत्री कार्यकाल से। इटली में गठबंधन सरकारों और मंत्रिमंडलों के बदलने का इतिहास काफी लंबा रहा है। इसलिए मेलोनी की सरकार का बिना टूटे इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना खास महत्व रखता है।
इटली में राजनीतिक अस्थिरता का लंबा इतिहास
मेलोनी के रिकॉर्ड को समझने के लिए इटली की राजनीतिक व्यवस्था को देखना जरूरी है। 1946 में गणराज्य बनने के बाद देश में सरकारों के लगातार बदलने का सिलसिला रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 80 वर्षों में इटली में 68 सरकारें और 31 प्रधानमंत्री रह चुके हैं। एक सरकार का औसत कार्यकाल करीब 14 महीने रहा है।
यही वजह है कि 2022 में जब मेलोनी सत्ता में आईं तो राजनीतिक स्थिरता उनके प्रमुख संदेशों में शामिल थी। उस समय देश में प्रधानमंत्री मारियो द्राघी के नेतृत्व वाली सरकार का कार्यकाल समाप्त हुआ था और सितंबर 2022 के चुनाव में मेलोनी की पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी।
मेलोनी के गठबंधन में ब्रदर्स ऑफ इटली, माटेओ साल्विनी की लीग और सिल्वियो बर्लुस्कोनी की फ़ोर्ज़ा इटालिया प्रमुख दल थे। इस गठबंधन ने संसद में बहुमत हासिल किया और मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
पीएम मोदी ने दी खास बधाई
मेलोनी की उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया सिर्फ औपचारिक बधाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने इस रिकॉर्ड को इटली की जनता के भरोसे और विश्वास से जोड़ते हुए भारत-इटली संबंधों का भी उल्लेख किया।
मोदी और मेलोनी के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई उच्चस्तरीय मुलाकातें हुई हैं। दोनों देशों के संबंधों को मई 2026 में एक नई ऊंचाई मिली, जब मोदी की रोम यात्रा के दौरान भारत और इटली ने अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया।
दोनों देशों ने रक्षा, बंदरगाह और बुनियादी ढांचा, कृषि, संस्कृति, महत्वपूर्ण खनिज, उच्च शिक्षा और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में समझौतों और सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है।
कौन हैं जॉर्जिया मेलोनी?
जॉर्जिया मेलोनी का जन्म 15 जनवरी 1977 को रोम में हुआ था। इटली की संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वह ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ यानी Fratelli d’Italia से जुड़ी हैं और 22 अक्टूबर 2022 से प्रधानमंत्री पद पर हैं।
राजनीति में उनकी सक्रियता काफी कम उम्र में शुरू हुई। आगे चलकर वह संसद पहुंचीं और 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की सरकार में युवा मामलों की मंत्री बनीं। वह 31 वर्ष की उम्र में मंत्री बनने वाली इटली की सबसे कम उम्र की नेताओं में शामिल थीं।
2012 में उन्होंने Brothers of Italy पार्टी की स्थापना में भूमिका निभाई। अगले वर्षों में पार्टी ने धीरे-धीरे अपना जनाधार बढ़ाया। 2018 के आम चुनाव में पार्टी को करीब 4 फीसदी वोट मिले थे, जबकि 2022 के चुनाव में यह आंकड़ा करीब 26 फीसदी तक पहुंच गया और वह दक्षिणपंथी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
शुरुआत में क्यों चर्चा में थीं मेलोनी?
2022 में सत्ता में आने के समय मेलोनी की राजनीतिक पृष्ठभूमि और उनकी पार्टी की दक्षिणपंथी विचारधारा को लेकर यूरोप में काफी चर्चा थी। ब्रदर्स ऑफ इटली की जड़ें इटली के पुराने दक्षिणपंथी और पोस्ट-फासिस्ट राजनीतिक आंदोलन से जुड़ी रही हैं। मेलोनी ने हालांकि अपनी पार्टी को आधुनिक राष्ट्रवादी और रूढ़िवादी राजनीतिक ताकत के रूप में पेश किया।
उनकी सरकार को शुरुआत से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें कमजोर आर्थिक वृद्धि, सार्वजनिक कर्ज, महंगाई, ऊर्जा की कीमतें, अवैध प्रवासन और यूरोप की बदलती सुरक्षा परिस्थितियां प्रमुख थीं।
इसके बावजूद सरकार गठबंधन के भीतर बड़े विभाजन से बची रही और मेलोनी ने अपना राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखा।
सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?
मेलोनी की सबसे बड़ी उपलब्धि फिलहाल राजनीतिक स्थिरता मानी जा रही है। इटली में गठबंधन सरकारों के जल्दी गिरने के इतिहास के बीच उनकी सरकार लगातार चलती रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेलोनी ने यूरोपीय संघ के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने, यूक्रेन के समर्थन और राजकोषीय अनुशासन पर जोर दिया। वहीं घरेलू स्तर पर उनकी सरकार ने अवैध प्रवासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया।
उनकी सरकार ने आव्रजन नीति में सख्ती, तस्करी विरोधी कानून और उत्तरी अफ्रीकी देशों के साथ समझौतों जैसे कदम उठाए। सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं में भी बदलाव किया और पिछली नागरिक आय व्यवस्था की जगह अधिक लक्षित लाभ योजनाओं पर जोर दिया।
आर्थिक मोर्चे पर मेलोनी सरकार का प्रदर्शन
मेलोनी सरकार के समर्थक रोजगार बढ़ने, बेरोजगारी में कमी और राजकोषीय अनुशासन को उपलब्धि के रूप में पेश करते हैं। बाजारों में भी सरकार की स्थिरता को सकारात्मक संकेत माना गया है।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि इटली की मूल आर्थिक समस्याएं अभी पूरी तरह हल नहीं हुई हैं। देश की आर्थिक वृद्धि कमजोर बनी हुई है और उत्पादकता, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
यानी रिकॉर्ड लंबा कार्यकाल अपने आप में आर्थिक सफलता का प्रमाण नहीं है। मेलोनी के सामने अब यह चुनौती है कि राजनीतिक स्थिरता को ठोस आर्थिक परिणामों में कैसे बदला जाए।
संवैधानिक सुधारों में मिली चुनौतियां
मेलोनी सरकार ने प्रधानमंत्री पद को अधिक शक्तिशाली बनाने और देश की राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता बढ़ाने के उद्देश्य से कई संस्थागत सुधारों की कोशिश की। लेकिन इन प्रयासों को हर मोर्चे पर सफलता नहीं मिली।
न्यायिक सुधार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव जनमत संग्रह में खारिज हो गया। सीधे प्रधानमंत्री के चुनाव से संबंधित सुधार को भी संसद में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। क्षेत्रीय स्वायत्तता से जुड़ी सरकार की योजना को भी संवैधानिक न्यायालय के हस्तक्षेप का सामना करना पड़ा।
जुलाई 2026 में प्रस्तावित चुनाव कानून में सुधार को भी संसद में झटका लगा। हालांकि सरकार ने इसके बावजूद सुधार की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
2027 का चुनाव अब अगली बड़ी परीक्षा
मेलोनी के सामने अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा 2027 का आम चुनाव है। उनकी सरकार रिकॉर्ड तो बना चुकी है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या वह इस स्थिरता को अगले चुनाव में जनसमर्थन में बदल पाएंगी।
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने गठबंधन के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। दक्षिणपंथी खेमे में पूर्व जनरल रॉबर्टो वाननाची के नेतृत्व में नया राजनीतिक दल फुतूरो नात्स्योनाले (Futuro Nazionale) उभरा है। इसने मेलोनी के लिए दक्षिणपंथी वोटों के भीतर प्रतिस्पर्धा का एक नया आयाम पैदा किया है।
मेलोनी की ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ अभी भी प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी हुई है, लेकिन गठबंधन के सहयोगी दलों की स्थिति और विपक्ष की एकजुटता 2027 के चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती है।
भारत-इटली संबंधों के लिए क्या मायने रखता है रिकॉर्ड?
मेलोनी की सरकार की स्थिरता भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों ने हाल के वर्षों में अपने संबंधों को तेजी से विस्तार दिया है।
भारत और इटली के बीच अब केवल व्यापार और निवेश ही नहीं, बल्कि रक्षा, अंतरिक्ष, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।
दोनों देश भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) को लेकर भी सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा भारत और इटली ने 2025-2029 के लिए संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना (Joint Strategic Action Plan) बनाया है, जो द्विपक्षीय संबंधों के अगले चरण की रूपरेखा तय करता है।
ऐसे में मेलोनी का लंबे समय तक सत्ता में बने रहना भारत के लिए भी निरंतरता का संकेत है।
फिलहाल इतना जरूर है कि जॉर्जिया मेलोनी ने इटली की युद्धोत्तर राजनीति में सरकार के टिकाऊपन का एक नया मानक स्थापित कर दिया है। एक ऐसे देश में जहां सरकारों का बदलना आम राजनीतिक घटना रही है, वहां करीब चार साल तक एक ही गठबंधन को सत्ता में बनाए रखना उनकी राजनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रिकॉर्ड 2027 के चुनाव तक उनके नेतृत्व और उनकी नीतियों के लिए कितना मजबूत राजनीतिक आधार साबित होता है।
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