Wednesday, 26 August 2026
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ISIS Supporter Jailed: लखनऊ की NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, ISIS समर्थक राकिब इमाम अंसारी को 5 साल की सजा

लखनऊ की विशेष NIA अदालत ने ISIS समर्थक राकिब इमाम अंसारी को 5 साल की सजा सुनाई। जानिए पूरा मामला, अदालत का फैसला, ATS-NIA जांच और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम तथ्य।

नई दिल्ली/लखनऊ: प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े एक मामले में लखनऊ स्थित विशेष NIA अदालत ने गुरुवार (16 जुलाई) को बड़ा फैसला सुनाते हुए राकिब इमाम अंसारी को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने उस पर 6,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में आतंकी संगठनों के नेटवर्क, ऑनलाइन कट्टरपंथ और युवाओं की भर्ती जैसी गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर रखे हुए हैं।

अभियोजन के अनुसार, राकिब प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS की गतिविधियों में सहयोग कर रहा था और उससे जुड़े अन्य आरोपियों के संपर्क में था। अदालत के समक्ष उसने अपना अपराध भी स्वीकार किया, जिसके बाद दोषसिद्धि और सजा सुनाई गई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) की जांच से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, राकिब इमाम अंसारी उन लोगों के संपर्क में था जिन पर भारत में ISIS की विचारधारा फैलाने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने और संगठन के लिए समर्थन जुटाने का आरोप था।

जांच के दौरान एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्य, संपर्क विवरण और अन्य सामग्री मिली, जिसके आधार पर उसके खिलाफ मामला मजबूत हुआ। बाद में यह मामला विशेष NIA अदालत में चला।

अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

लखनऊ की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े मामले में राकिब इमाम अंसारी को दोषी करार देते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 6,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, राकिब प्रतिबंधित आतंकी संगठन की गतिविधियों और उसकी विचारधारा का समर्थन करने के आरोपों का सामना कर रहा था। सुनवाई के दौरान उसने अदालत के समक्ष अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर उसे दोषी ठहराया।

न्यायालय ने माना कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन से किसी भी प्रकार का जुड़ाव या सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। अदालत का यह फैसला आतंकी संगठनों के समर्थकों के खिलाफ कानून के कड़े रुख को भी दर्शाता है।

राकिब इमाम अंसारी कौन है?

जांच एजेंसियों के अनुसार, राकिब इमाम अंसारी उन लोगों में शामिल था जो कथित रूप से ISIS समर्थक नेटवर्क के संपर्क में थे। अभियोजन पक्ष का कहना था कि वह संगठन की विचारधारा का समर्थन करता था और अन्य आरोपियों के साथ लगातार संपर्क में था।

जांच में यह भी सामने आया कि वह कथित रूप से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने और संगठन की गतिविधियों को समर्थन देने में भूमिका निभा रहा था। हालांकि एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल आरोपियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ थी तथा इसे किसी समुदाय या छात्र वर्ग से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में क्या कहा?

अदालत की सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान राकिब इमाम अंसारी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए, जिनसे उसके प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की पुष्टि हुई।

अभियोजन के अनुसार, मामले में कुल 17 गवाह पेश किए गए, जिन्होंने जांच के विभिन्न पहलुओं पर अपने बयान दर्ज कराए। इसके अलावा, अदालत के समक्ष इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री शामिल थी।

जांच एजेंसियों का दावा था कि आरोपी और उसके सहयोगी भारत में ISIS की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने, युवाओं को संगठन से जोड़ने तथा आतंकी गतिविधियों के लिए समर्थन तैयार करने का प्रयास कर रहे थे। अभियोजन ने अदालत से कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की भूमिका को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं। अदालत ने इन्हीं साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार करने को ध्यान में रखते हुए उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

ISIS क्यों है भारत के लिए चिंता?

ISIS (Islamic State of Iraq and Syria), जिसे ISIL या दाएश (Daesh) भी कहा जाता है, एक प्रतिबंधित अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन है। भारत में यह संगठन गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित है। स

रक्षा एजेंसियां लंबे समय से ऐसे मॉड्यूल पर कार्रवाई करती रही हैं जो कथित रूप से सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।

ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां केवल प्रत्यक्ष आतंकी गतिविधियों ही नहीं, बल्कि भर्ती, प्रचार, वित्तीय सहायता और संगठन को सहयोग देने जैसे आरोपों की भी जांच करती हैं।

ऑनलाइन कट्टरपंथ बन रही नई चुनौती

हाल के वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार आगाह किया है कि आतंकी संगठन अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया, बंद मैसेजिंग समूह और ऑनलाइन प्रचार सामग्री के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश की जाती है।

ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कट्टरपंथ की शुरुआती प्रक्रिया अक्सर डिजिटल प्लेटफॉर्म से शुरू होती है।

NIA और ATS की भूमिका

इस मामले की जांच में उत्तर प्रदेश ATS और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आतंकवाद से जुड़े मामलों में स्थानीय और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

जांच के दौरान डिजिटल डेटा, संचार रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाता है ताकि किसी भी आतंकी नेटवर्क या उसके सहयोगियों तक पहुंचा जा सके। इसी प्रक्रिया के तहत यह मामला विशेष NIA अदालत तक पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम फैसला

यह फैसला केवल एक आरोपी को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को किसी भी प्रकार का सहयोग कानून की नजर में गंभीर अपराध है।

अदालतों द्वारा ऐसे मामलों में त्वरित और साक्ष्य-आधारित फैसले सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आतंकी नेटवर्क, उनके समर्थकों और सहयोगियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है।

राकिब इमाम अंसारी को सुनाई गई पांच साल की सजा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी के अपराध स्वीकार करने के आधार पर यह फैसला सुनाया। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि आतंकी संगठनों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन, उनकी विचारधारा का प्रचार या उनके लिए सहयोग जुटाना भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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