Monday, 03 August 2026
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अल्माटी ISSF विश्व कप में भारत के 12 निशानेबाज

नई दिल्ली: जब बात निशानेबाजी की हो और मंच अंतरराष्ट्रीय हो, तो भारत पीछे नहीं रहता। इस बार का मैदान है कजाकिस्तान का अल्माटी शहर, जहाँ ISSF विश्व कप शॉटगन का दूसरा और अहम चरण खेला जाना है।

2 मई 2026 से भारतीय टीम के खिलाड़ी अल्माटी पहुँचने लगे हैं और 4 मई से शुरू होने वाली इस 10 दिवसीय प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

42 देशों के 284 एथलीट्स के बीच भारत के 12 निशानेबाज अपना दम दिखाएंगे — और उनसे देश को पदक की उम्मीद है।

कब क्या होगा

प्रतियोगिता की शुरुआत सोमवार, 4 मई को पुरुष और महिला स्कीट के क्वालीफायर राउंड से होगी।

इनके फाइनल मंगलवार, 5 मई को खेले जाएंगे।

इसके बाद 9 मई को पुरुष और महिला ट्रैप के फाइनल होंगे,

और पूरे टूर्नामेंट का समापन 10 मई को मिश्रित टीम ट्रैप इवेंट के साथ होगा।

पाँच ओलंपिक इवेंट्स में मेडल दाँव पर होंगे, यानी हर दिन कुछ न कुछ बड़ा होने की उम्मीद है।

कौन-कौन है भारतीय टीम में?

इस बार भारत ने 12 खिलाड़ियों की मजबूत टीम उतारी है।

इनके अलावा 8 और खिलाड़ी रैंकिंग पॉइंट्स ओनली यानी RPO श्रेणी में भी हिस्सा लेंगे

यानी कुल मिलाकर भारत का प्रतिनिधित्व काफी बड़ा और व्यापक है।

पहले दिन तीन अनुभवी ओलंपियन मैदान में उतरेंगे।

पुरुष स्कीट में मैराज अहमद खान और अनंतजीत सिंह नरूका अपनी चुनौती पेश करेंगे,

जबकि महिला स्कीट में राइजा धिल्लों भारत का झंडा थामेंगी।

खास बात यह है कि ये तीनों इस साल का अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला इसी मंच से शुरू कर रहे हैं

तो दबाव भी है और जोश भी।

इस बार का सफर कहाँ से शुरू हुआ

भारतीय शॉटगन टीम का यह साल मार्च में मोरक्को के टांगियर से शुरू हुआ था,

जहाँ ISSF विश्व कप का पहला चरण खेला गया।

उस अनुभव को पीछे छोड़ते हुए टीम अब दूसरे चरण में और बेहतर प्रदर्शन के इरादे से उतर रही है।

हर अंतरराष्ट्रीय मंच एक सीखने का मौका होता है और भारतीय निशानेबाज इसे अच्छी तरह जानते हैं।

चुनौती आसान नहीं होगी

अल्माटी में मुकाबला कड़ा है। इटली की टीम शॉटगन में दुनिया की सबसे दबदबे वाली टीमों में से एक है।

इसके अलावा फिनलैंड, डेनमार्क, चेक गणराज्य, साइप्रस, ग्रीस, पेरू और कतर जैसी टीमें भी मैदान में होंगी।

मेजबान कजाकिस्तान घरेलू माहौल का फायदा उठाने की कोशिश करेगा। चीन की टीम हमेशा की तरह मजबूत है,

और रूस के खिलाड़ी व्यक्तिगत न्यूट्रल एथलीट के रूप में हिस्सा लेंगे जो कम खतरनाक नहीं हैं।

इन सबके बीच भारतीय निशानेबाजों को पोडियम तक पहुँचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना होगा एक भी चूक और मेडल का मौका हाथ से निकल सकता है।

उम्मीद और जिम्मेदारी

मैराज अहमद खान जैसे अनुभवी खिलाड़ी पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को गौरवान्वित कर चुके हैं।

अनंतजीत और राइजा जैसे युवा खिलाड़ियों के पास इस बड़े मंच पर खुद को साबित करने का सुनहरा मौका है।

अल्माटी में अगले 10 दिन भारतीय निशानेबाजी के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

देश की निगाहें टिकी हैं — और उम्मीद है कि तिरंगा पोडियम पर लहराएगा।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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